जीत समाचार | EXCLUSIVE लुधियाना नगर निगम में ‘सेटिंग’ का खेल ?

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एमटीपी  से  एटीपी और इंस्पेक्टर तक—अवैध निर्माणों पर कार्रवाई में भेदभाव के आरोप, सरकारी राजस्व को करोड़ों के नुकसान का दावा

 

लुधियाना 4 सितंबर 2026 — रिकी कुमार

लुधियाना नगर निगम में अवैध इमारतों और अवैध कॉलोनियों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। जीत समाचार को मिले मामलों और सामने आ रही शिकायतों के आधार पर आरोप है कि कुछ जगहों पर कार्रवाई तेजी से होती है, जबकि कुछ प्रभावशाली मामलों में कार्रवाई कथित तौर पर ठंडे बस्ते में चली जाती है।नगर निगम की बिल्डिंग ब्रांच में एमटीपी, एटीपी बिल्डिंग इंस्पेक्टर और अन्य कर्मचारियों की भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। आरोप लगाए जा रहे हैं कि कुछ अधिकारी राजनीतिक प्रभाव या दबाव में काम करते हैं। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है और संबंधित अधिकारियों का पक्ष भी इस मामले में महत्वपूर्ण होगा।

कहां होती है कार्रवाई, कहां क्यों रुक जाती है?

सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि नियम सभी के लिए समान हैं तो फिर अवैध निर्माणों के मामलों में कार्रवाई का पैमाना अलग-अलग क्यों दिखाई देता है?आरोप है कि जिन मामलों में किसी तरह की ‘सेटिंग’ नहीं होती, वहां निगम की कार्रवाई दिखाई देती है, जबकि प्रभावशाली लोगों से जुड़े बताए जा रहे मामलों में चालान, नोटिस और सीलिंग जैसी कार्रवाई आगे नहीं बढ़ती।यदि ये आरोप सही पाए जाते हैं तो यह केवल प्रशासनिक लापरवाही का मामला नहीं होगा, बल्कि नगर निगम  के राजस्व और सरकारी व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े करेगा।

MTP की भूमिका पर भी सवाल

शिकायतकर्ताओं का एक बड़ा सवाल यह है कि जब अवैध निर्माण से संबंधित शिकायतें MTP कार्यालय को भेजी जाती हैं, तो उनका निपटारा किस स्तर पर और कितने समय में होता है?शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि कई मामलों में उन्हें शिकायत पर हुई कार्रवाई अथवा अधिकारी की रिपोर्ट की स्पष्ट जानकारी नहीं मिलती।ऐसे में सवाल उठता है कि शिकायत की फाइल पर अधिकारी ने क्या कार्रवाई की, क्या रिपोर्ट दी और मौके पर क्या स्थिति पाई गई—इसका रिकॉर्ड शिकायतकर्ता को क्यों नहीं मिलता?

फील्ड में कौन करेगा निगरानी?

बिल्डिंग ब्रांच के अधिकारियों की जिम्मेदारी केवल कार्यालय तक सीमित नहीं है। अवैध निर्माणों की वास्तविक स्थिति जानने के लिए नियमित फील्ड निरीक्षण जरूरी है।ऐसे में यह भी सवाल उठता है कि यदि अधिकारी कार्यालय में ही बैठे रहेंगे तो शहर में चल रहे अवैध निर्माणों की निगरानी कौन करेगा?

सरकारी राजस्व को कितना नुकसान?

अवैध निर्माणों और अवैध कॉलोनियों के मामले में यदि समय रहते कार्रवाई नहीं होती तो इससे नगर निगम के संभावित राजस्व को नुकसान हो सकता है।जीत समाचार के पास ऐसे कई मामलों की जानकारी और दस्तावेज पहुंच रहे हैं, जिनमें निर्माण कार्य, निगम की कार्रवाई और उसके बाद की स्थिति की जांच जरूरी दिखाई देती है।इन मामलों की स्वतंत्र जांच होने पर ही स्पष्ट हो सकेगा कि कहीं नियमों की अनदेखी हुई या नहीं और यदि हुई तो इसके लिए कौन जिम्मेदार है।

राजनीतिक दबाव के आरोप—जांच जरूरी

कुछ मामलों में यह भी आरोप सामने आए हैं कि राजनीतिक रूप से प्रभावशाली लोगों के दबाव के कारण अधिकारी कार्रवाई करने से बचते हैं।जीत समाचार बिना जांच के किसी अधिकारी या राजनीतिक व्यक्ति को दोषी नहीं ठहरा रहा। लेकिन यदि ऐसे आरोप लगातार सामने आ रहे हैं तो नगर निगम प्रशासन को इनकी निष्पक्ष जांच जरूर करवानी चाहिए।

कमिश्नर से बड़ा सवाल

अब सवाल नगर निगम कमिश्नर से भी है—

नगर निगम कार्यालय से MTP को शिकायतें भेजे जाने के बावजूद यदि कार्रवाई नहीं होती, तो इसकी जवाबदेही किसकी है?

1 क्या प्रत्येक शिकायत की समयबद्ध जांच होती है?

2 क्या मौके का निरीक्षण किया जाता है?

3 क्या अधिकारी अपनी रिपोर्ट रिकॉर्ड पर डालते हैं?

4 और यदि कार्रवाई नहीं होती तो इसकी जिम्मेदारी किस अधिकारी की तय की जाती है?

इन सवालों के जवाब जनता को मिलना जरूरी है।

अगली कड़ी में दस्तावेजों के साथ खुलासा

जीत समाचार के पास शहर की कुछ ऐसी इमारतों और कॉलोनियों से संबंधित जानकारी पहुंची है, जिनके निर्माण और निगम की कार्रवाई की पड़ताल की जा रही है।अगली कड़ी में संबंधित मामलों के दस्तावेज, कार्रवाई का रिकॉर्ड और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका से जुड़े तथ्य सामने रखे जाएंगे।यदि किसी अधिकारी, कर्मचारी या अन्य संबंधित पक्ष का पक्ष प्राप्त होता है तो उसे भी पूरी प्रमुखता के साथ प्रकाशित किया जाएगा।

सवाल किसी व्यक्ति विशेष का नहीं—सवाल व्यवस्था का है।

हक और सच की लड़ाई—जीत समाचार!

अगली खबर: दस्तावेजों के साथ बड़ा खुलासा।

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