जोन-सी बिल्डिंग ब्रांच पर गंभीर आरोप, पीसीएस अधिकारी बोले—”यह बहुत गलत है, मामले की जांच कराई जाएगी”
लुधियाना, 28 जुलाई |विक्की कुमार
लुधियाना नगर निगम के जोन-सी बिल्डिंग ब्रांच की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। आरोप हैं कि अवैध निर्माणों के खिलाफ कार्रवाई के नाम पर केवल चालान काटे जाते हैं, लेकिन निर्माण कार्य रुकवाने के बजाय इमारतों को पूरा होने दिया जाता है।
नियमों के अनुसार किसी अवैध निर्माण का चालान किए जाने का अर्थ है कि निर्माण कार्य तत्काल रुकवाया जाए, भवन का नक्शा स्वीकृत कराया जाए और निर्धारित सरकारी शुल्क जमा कराया जाए। लेकिन आरोप है कि जोन-C बिल्डिंग ब्रांच में इसके विपरीत हो रहा है।
चालान के बाद भी जारी रहा निर्माण
सूत्रों के अनुसार कई मामलों में चालान काटने की कार्रवाई तो की जाती है, लेकिन निर्माण कार्य बिना किसी रोक-टोक के चलता रहता है और इमारतें पूरी तरह तैयार हो जाती हैं। आरोप है कि चालान केवल कागजों तक सीमित रह जाते हैं।
सरकारी खजाने को करोड़ों के नुकसान का आरोप
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यदि नियमों का पालन नहीं कराया जाता और बिना स्वीकृति के भवन तैयार हो जाते हैं, तो इससे सरकार को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान हो सकता है। साथ ही प्रशासनिक जवाबदेही और पारदर्शिता पर भी गंभीर सवाल खड़े होते हैं।
जोनल कमिश्नर, जोन-सी ने कहा
कि संबंधित मामला एमटीपी विजय कुमार के पास है। उन्होंने बताया कि इसके बाद बिल्डिंग ब्रांच की निगरानी पीसीएस अधिकारी तपन भनोट करते हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि बिल्डिंग ब्रांच का कार्य उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं आता।
एमटीपी विजय कुमार से संपर्क करने का प्रयास किया गया,
लेकिन खबर लिखे जाने तक उन्होंने न तो फोन उठाया और न ही कोई वापस कॉल किया।
पीसीएस अधिकारी ने दिया जांच का भरोसा
चालान का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि भवन का नक्शा नियमानुसार स्वीकृत कराया जाए और कानूनी प्रक्रिया का पालन हो। यदि चालान के बाद भी इमारतें तैयार हो रही हैं, तो यह बेहद गलत है। मैं इस मामले की जांच कराऊंगा और नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।”
बड़ा सवाल
यदि संबंधित अधिकारी आम लोगों की शिकायतों और फोन कॉल का जवाब ही नहीं देंगे, तो शहर में हो रहे अवैध निर्माणों की प्रभावी निगरानी कैसे होगी? क्या चालान अब केवल औपचारिकता बनकर रह गए हैं या फिर इसके पीछे कोई और खेल चल रहा है? अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच के बाद वास्तव में जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई होती है या नहीं।
