खेल

शिकायतकर्ता का दावा—नक्शा, परमिशन और सरकारी फीस की जांच हो तो खुल सकता है लाखों के राजस्व का खेल!

लुधियाना | जीत समाचार ब्यूरो

लुधियाना नगर निगम की जोन-सी बिल्डिंग ब्रांच एक बार फिर सवालों के घेरे में है। इस बार मामला सिर्फ अवैध निर्माण के आरोपों तक सीमित नहीं, बल्कि सरकारी राजस्व की संभावित वसूली और कार्रवाई की प्रक्रिया पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।शिकायतकर्ता दिनेश कुमार ने पंजाब सरकार के चीफ सेक्रेटरी और मुख्यमंत्री को शिकायत भेजकर आरोप लगाया है कि जोन-C क्षेत्र में बन रही कुछ कमर्शियल बिल्डिंगों के खिलाफ चालान तो काटे जा रहे हैं, लेकिन उसके बाद प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं हो रही, यह बड़ा सवाल है।

चालान हुआ… फिर बिल्डिंग कैसे खड़ी हुई?

शिकायतकर्ता ने अपनी शिकायत में सवाल उठाया है कि यदि किसी निर्माण के खिलाफ नगर निगम द्वारा चालान काटा गया था तो उसके बाद निर्माण रोकने, नियमों के मुताबिक जुर्माना वसूलने और जरूरी अनुमति/नक्शे की स्थिति स्पष्ट करने के लिए क्या कार्रवाई की गई?यही वह सवाल है, जिसका जवाब अब रिकॉर्ड से मिलना चाहिए, दावों से नहीं।

सरकारी खजाने का सवाल—लाखों की फीस गई कहां ?

शिकायत में दावा किया गया है कि यदि संबंधित बिल्डिंगों के मामलों की नियमों के अनुसार जांच हो और देय कंपाउंडिंग फीस, जुर्माना, नक्शा फीस या अन्य सरकारी शुल्क वसूले जाएं तो सरकारी खजाने में लाखों रुपये जमा हो सकते हैं। लेकिन सवाल यह है—

 1 क्या पूरी देय राशि वसूली गई?

2  कितना चालान हुआ और कितना पैसा जमा हुआ?

3  किस अधिकारी ने कितनी राशि वसूल की? और अगर पैसा नहीं वसूला गया तो क्यों?

कमिश्नर को शिकायत… फिर भी कार्रवाई का इंतजार!

शिकायतकर्ता के अनुसार इस मामले को लेकर पहले ही नगर निगम कमिश्नर के समक्ष शिकायत की जा चुकी है। शिकायत की कॉपी और संबंधित ई-मेल भी पंजाब सरकार को भेजे गए हैं। इसके बावजूद शिकायतकर्ता का कहना है कि संबंधित बिल्डिंगों पर

अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। अब सवाल यह है कि शिकायत नगर निगम की फाइलों में दब गई या फिर मौके पर कार्रवाई ही नहीं हुई ?

चालान की पूरी कहानी” रिकॉर्ड खोलेगा ?

अगर सरकार वास्तव में इस मामले की तह तक जाना चाहती है तो जांच बहुत आसान है। बस जोन-सी की संबंधित बिल्डिंगों की फाइलें खोलिए और जांचिए—

1 नक्शा पास है या नहीं?

2बिल्डिंग परमिशन ली गई या नहीं?

3 निर्माण कब शुरू हुआ?

4 कब-कब निरीक्षण हुआ?

5 कितने चालान काटे गए?

6 चालान के बाद कितना जुर्माना वसूला गया?

7 सरकारी खाते में कितनी राशि जमा हुई?

8 चालान के बाद निर्माण जारी रहा तो किसकी अनुमति/लापरवाही से?

इन सवालों के जवाब सामने आते ही तस्वीर साफ हो सकती है।

मिलीभगत का आरोप—जांच जरूरी

शिकायतकर्ता ने संबंधित बिल्डिंग ब्रांच कर्मचारी पर बिल्डिंग मालिकों से मिलीभगत का आरोप भी लगाया है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि जीत समाचार नहीं करता। इसीलिए अब जरूरी है कि निगम प्रशासन मामले की जांच उसी शाखा के बजाय किसी

वरिष्ठ और निष्पक्ष अधिकारी से करवाए, ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके।

बड़ा सवाल ❓

अगर चालान के बाद भी निर्माण चलता रहा… तो फिर चालान किस काम का?”

जीत समाचार की मांग नहीं, सवाल है—सरकार रिकॉर्ड की जांच करवाए और बताए कि सरकारी खजाने को कितना राजस्व मिला और कितना संभावित रूप से बकाया है।

You may have missed