सरकार के हुक्म की कॉपी हमारे पास! सरकार ने कहा—करंट ड्यूटी चार्ज वापस लो… फिर निगम में ‘करंट’ कैसे दौड़ रहा है?
18 दिसंबर 2025 के सरकारी पत्र ने खोली व्यवस्था की पोल? जोन-A में ड्राफ्ट्समैन को बिल्डिंग इंस्पेक्टर के एरिया की जिम्मेदारी देने पर उठे सवाल
लुधियाना।18 सितंबर 2026।यदविंदर
नगर निगम लुधियाना की बिल्डिंग ब्रांच में करंट ड्यूटी चार्ज को लेकर जीत समाचार के हाथ एक ऐसा सरकारी दस्तावेज लगा है, जिसने निगम की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।18 दिसंबर 2025 को पंजाब सरकार के स्थानीय निकाय विभाग की ओर से जारी पत्र में करंट ड्यूटी चार्ज से संबंधित पहले जारी हिदायतों का हवाला देते हुए ऐसी व्यवस्था को वापस लेने संबंधी निर्देश दिए गए हैं। पत्र में स्पष्ट रूप से ऐसे अधिकारी/कर्मचारी को दिए गए करंट ड्यूटी चार्ज को तुरंत प्रभाव से वापस लेने की बात दर्ज दिखाई देती है।अब सवाल यह है—जब सरकार का आदेश इतना साफ है, तो नगर निगम में ‘करंट ड्यूटी’ की व्यवस्था फिर कैसे दिखाई दे रही है?
सरकार का हुक्म फाइल में… निगम में व्यवस्था अलग?
जीत समाचार की पड़ताल में जोन-A से जुड़ा एक मामला सामने आया है, जहां एक ड्राफ्ट्समैन को बिल्डिंग इंस्पेक्टर के एरिया से संबंधित जिम्मेदारी दिए जाने की बात सामने आई है।अब सवाल कर्मचारी पर नहीं, बल्कि आदेश जारी करने वाली प्रक्रिया पर है।क्या यह जिम्मेदारी सरकार के 18 दिसंबर 2025 के निर्देशों के अनुरूप है?अगर इसे करंट ड्यूटी चार्ज के रूप में नहीं माना जा रहा, तो फिर इस जिम्मेदारी का विभागीय आधार क्या है?और अगर यह करंट ड्यूटी से संबंधित व्यवस्था है, तो फिर सरकार के आदेश के बाद यह व्यवस्था कैसे बनी?
डिप्लोमा और अनुभव का सवाल भी सामने
बिल्डिंग इंस्पेक्टर से जुड़े कार्यों को लेकर निर्धारित योग्यता और तकनीकी अनुभव का मुद्दा भी महत्वपूर्ण है।अगर किसी कर्मचारी को दूसरे पद के कार्यों की जिम्मेदारी दी जाती है, तो निगम प्रशासन को यह स्पष्ट करना होगा कि उस कर्मचारी की निर्धारित योग्यता क्या है और उसे यह जिम्मेदारी देने के लिए कौन सा नियम लागू किया गया?कुर्सी बदली है या सिर्फ जिम्मेदारी?यह जवाब अब निगम प्रशासन को देना होगा।
कमिश्नर साहब! सरकार का आदेश आखिर किस फाइल में है?
जीत समाचार का सवाल सीधा है—
सरकार ने 18 दिसंबर 2025 को करंट ड्यूटी चार्ज वापस लेने के निर्देश दिए हैं या नहीं?
1 अगर दिए हैं तो निगम में उसके बाद ऐसी जिम्मेदारी कैसे दी गई?
2 किस अधिकारी ने आदेश जारी किया?
3 किस नियम के तहत किया?
4 क्या सक्षम अधिकारी की मंजूरी ली गई?
5 और क्या संबंधित कर्मचारी को बिल्डिंग इंस्पेक्टर के अधिकार भी दिए गए हैं?
‘सरकार ऊपर या निगम की व्यवस्था?’
मामला अब केवल एक कर्मचारी की जिम्मेदारी का नहीं रह गया है।मामला यह है कि सरकार का लिखित आदेश और नगर निगम की जमीन पर चल रही व्यवस्था—दोनों में तालमेल है या नहीं?यदि निगम की व्यवस्था सरकारी आदेश के अनुरूप है तो प्रशासन को उसका नियम और आदेश सामने रखना चाहिए।और यदि कोई अलग व्यवस्था की गई है तो उसका आधार भी स्पष्ट होना चाहिए।
जीत समाचार के पास सरकारी दस्तावेज मौजूद
जीत समाचार इस पूरे मामले में 18 दिसंबर 2025 के सरकारी पत्र की कॉपी सामने रख रहा है।दस्तावेज में करंट ड्यूटी चार्ज से संबंधित हिदायतों और पहले दिए गए चार्ज को वापस लेने संबंधी निर्देश दर्ज हैं।अब सवाल उन अधिकारियों से है जो निगम में ऐसी जिम्मेदारियां तय कर रहे हैं—
1 क्या सरकारी आदेश पढ़े गए?
2 क्या आदेश की पालना हुई?
3 अगर हुई तो जोन-A में यह व्यवस्था किस आधार पर बनी?
अब कमिश्नर साहब की परीक्षा!
सरकार भ्रष्टाचार और अनियमितताओं पर रोक लगाने की बात करती है। ऐसे में सरकारी आदेशों की पालना सुनिश्चित करना विभागीय अधिकारियों की जिम्मेदारी है।अब देखना होगा कि नगर निगम कमिश्नर इस दस्तावेज का संज्ञान लेते हैं या नहीं और जोन-A में दी गई जिम्मेदारी की पूरी फाइल और आदेशों की जांच करवाते हैं या नहीं।सरकार का हुक्म चलेगा या निगम की अपनी व्यवस्था?इस सवाल का जवाब अब बयान से नहीं, सरकारी फाइल और आदेश से मिलना चाहिए।
जीत समाचार की EXCLUSIVE पड़ताल जारी है!

