गरीब का घर तोड़ा, अमीर की बिल्डिंग पर ‘पीले पंजे’ को जंग!
जोन-C में निगम की कार्रवाई पर उठे सवाल—50 गज के मकान पर चला पीला पंजा, निर्माणाधीन कमर्शियल बिल्डिंग पर कार्रवाई का इंतजार
लुधियाना।18 सितंबर 2026।यदविंदर
नगर निगम लुधियाना की बिल्डिंग ब्रांच जोन-C में कार्रवाई को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। जीत समाचार के पास मौजूद दो तस्वीरों में एक तरफ करीब 50 गज के मकान को तोड़े जाने के बाद का मलबा दिखाई दे रहा है, लुधियाना नगर निगम बिल्डिंग ब्रांच जोन-C ATP दोबारा आज एक करीबन 50 गज के करीब मकान जो किसी गरीब का बन रहा था, उसको पीले पंजे से तोड़ दिया गया!
जीत समाचार पहले भी इंस्पेक्टर, ATP जोन-C की खबरें लगाकर उच्च अधिकारियों को और जनता को दिखा चुका है कि इनका पीला पंजा गरीबों पर ही चलता है! या फिर किसी राजनीतिक लोगों की सिफारिश तगड़ी आ जाए तो उस पर पीला पंजा चलेगा!जबकि दूसरी तरफ एक निर्माणाधीन कमर्शियल बिल्डिंग खड़ी दिखाई दे रही है। इन्हीं दोनों तस्वीरों को लेकर अब निगम की कार्रवाई की निष्पक्षता पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
गरीब का आशियाना मलबे में!
जीत समाचार को मिली जानकारी के अनुसार 18 सितंबर 2026 को जोन-C की बिल्डिंग ब्रांच की कार्रवाई के दौरान करीब 50 गज के मकान को तोड़ा गया। कार्रवाई के बाद मकान मलबे में तब्दील हो गया।छोटे मकान पर हुई कार्रवाई को लेकर सवाल यह है कि क्या इसी तेजी से बड़े और व्यावसायिक निर्माणों पर भी निगम की कार्रवाई होती है?
दूसरी तस्वीर में निर्माणाधीन कमर्शियल बिल्डिंग
वहीं जीत समाचार के पास मौजूद दूसरी तस्वीर में एक कमर्शियल बिल्डिंग का निर्माण जारी दिखाई दे रहा है। जानकारी के अनुसार भवन की दूसरी मंजिल के लैंटर को लेकर भी निर्माण आगे बढ़ता दिखाई दे रहा है पर एटीपी द्वारा इस कमर्शियल बिल्डिंग पर एटीपी जोन सी की मेहरबानी दिखाई दे रही है
इस बिल्डिंग में पार्किंग व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
जीत समाचार के अनुसार 18 सितंबर 2026 तक यह निर्माण मौके पर मौजूद था। ऐसे में सवाल उठता है कि अगर इस निर्माण को लेकर कोई नियमगत कमी या पूर्व कार्रवाई का रिकॉर्ड मौजूद है, तो उसके बाद भी निर्माण कैसे आगे बढ़ा?
‘पीला पंजा’ गरीब तक पहुंचा, यहां क्यों रुका?
जोन-C की बिल्डिंग ब्रांच की कार्रवाई को लेकर जीत समाचार पहले भी सवाल उठाता रहा है। अब दो तस्वीरों ने इस बहस को और तेज कर दिया है।
एक तरफ करीब 50 गज के मकान पर कार्रवाई।
दूसरी तरफ निर्माणाधीन कमर्शियल बिल्डिंग।
क्या दोनों मामलों में नियम अलग हैं?
अगर नियम और परिस्थितियां अलग हैं तो निगम प्रशासन को जनता के सामने स्पष्ट करना चाहिए कि किस मामले में किस नियम के तहत कार्रवाई की गई और दूसरे मामले में कार्रवाई क्यों नहीं हुई।
पहले कार्रवाई हुई थी तो निर्माण आगे कैसे बढ़ा?
जीत समाचार को मिली जानकारी के अनुसार संबंधित कमर्शियल बिल्डिंग को लेकर पहले भी निगम अधिकारियों द्वारा कार्रवाई किए जाने की बात कही जा रही है।यदि ऐसा कोई आदेश, नोटिस या चालान रिकॉर्ड में मौजूद है तो अब सवाल यह है कि उसके बाद निर्माण जारी रहने पर निगम ने क्या कार्रवाई की?
1 क्या भवन का नक्शा स्वीकृत है?
2 क्या निर्माण स्वीकृत नक्शे के अनुसार हो रहा है?
3 क्या निर्धारित पार्किंग उपलब्ध है?
4 क्या मौके पर कोई उल्लंघन पाया गया?
5 इन सवालों का जवाब रिकॉर्ड से मिलना चाहिए।
कमिश्नर साहब! दो तस्वीरें, जवाब एक चाहिए
जीत समाचार नगर निगम कमिश्नर से पूछता है—
▶ 18 सितंबर को करीब 50 गज के मकान पर कार्रवाई किस आदेश के तहत हुई?
▶ संबंधित कमर्शियल बिल्डिंग का स्वीकृत नक्शा क्या है?
▶ क्या बिल्डिंग के लिए निर्धारित पार्किंग उपलब्ध है?
▶ क्या इस बिल्डिंग के खिलाफ पहले कोई नोटिस, चालान या कार्रवाई हुई थी?
▶ यदि कार्रवाई हुई थी तो उसके बाद निर्माण जारी रहने पर क्या कदम उठाए गए?
▶ क्या जोन-C की दोनों साइटों पर नियमों के अनुसार समान मापदंड से कार्रवाई की गई?
सवाल किसी गरीब या अमीर का नहीं—नियम एक जैसे होने चाहिए
जीत समाचार का मुद्दा किसी व्यक्ति विशेष को निशाना बनाना नहीं है। सवाल सिर्फ इतना है कि नगर निगम की बिल्डिंग ब्रांच की कार्रवाई नियमों के अनुसार और समान मापदंड पर हो रही है या नहीं।यदि 50 गज के मकान पर नियमों के उल्लंघन के कारण कार्रवाई हुई है, तो बड़े निर्माणों की भी उसी नियम-पुस्तिका के अनुसार जांच होनी चाहिए।
कार्रवाई में अंतर क्यों दिखाई दे रहा है—यह जांच का विषय है।
अब देखना होगा कि नगर निगम कमिश्नर इस पूरे मामले का संज्ञान लेकर दोनों निर्माणों की फाइल, नक्शा, नोटिस, चालान और कार्रवाई का रिकॉर्ड जांचते हैं या नहीं।
गरीब का घर मलबे में… कमर्शियल बिल्डिंग खड़ी!
जोन-C के ‘पीले पंजे’ पर उठे सवाल—अब निगम कमिश्नर की जांच बताएगी, नियम सबके लिए एक हैं या नहीं!
जीत समाचार की पड़ताल जारी है।

