यूपीआई शुल्क विवाद पर केंद्र सरकार पर ‘आप’ का हमला
कल्याण भंडारी ने यूपीआई को उपभोक्ताओं और छोटे कारोबारियों के लिए पूरी तरह शुल्क-मुक्त रखने की मांग की
जीत समाचार | कांगड़ा, हिमाचल प्रदेश | अभिषेक
आम आदमी पार्टी हिमाचल प्रदेश के राज्य प्रवक्ता कल्याण भंडारी ने यूपीआई लेन-देन पर प्रस्तावित मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) और अन्य शुल्कों को लेकर केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने मांग की कि उपभोक्ताओं और छोटे कारोबारियों के लिए यूपीआई भुगतान को पूरी तरह शुल्क-मुक्त रखा जाए।
कल्याण भंडारी ने कहा कि डिजिटल भुगतान को लंबे समय से निःशुल्क और आसान व्यवस्था के रूप में बढ़ावा दिया गया है। ऐसे में यूपीआई लेन-देन पर शुल्क लगाने की किसी भी संभावित व्यवस्था से आम उपभोक्ताओं और छोटे कारोबारियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ सकता है।
उन्होंने कहा कि यदि व्यापारियों से लेन-देन शुल्क वसूला जाता है तो इसकी भरपाई कुछ कारोबारी वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों में वृद्धि के माध्यम से ग्राहकों से करने की कोशिश कर सकते हैं। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि ग्राहकों से किसी भी प्रकार की अतिरिक्त वसूली को रोकने के लिए स्पष्ट कानूनी प्रावधान किए जाएं।
शुल्क व्यवस्था में पारदर्शिता की मांग
भंडारी ने यूपीआई भुगतान में गूगल-पे और फोन-पे जैसी कंपनियों की बड़ी हिस्सेदारी का उल्लेख करते हुए शुल्क व्यवस्था को लेकर पारदर्शिता की मांग की। उन्होंने कहा कि यूपीआई शुल्क को लेकर अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं, इसलिए केंद्र सरकार और एनपीसीआई को स्थिति स्पष्ट करते हुए आधिकारिक जानकारी जारी करनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि रेहड़ी-पटरी वालों, ग्रामीण दुकानदारों, टैक्सी चालकों और छोटे व्यापारियों के लिए लेन-देन पर मामूली प्रतिशत की कटौती भी उनके सीमित मुनाफे को प्रभावित कर सकती है।
आवश्यक सेवाओं के भुगतान पर भी शुल्क न लगाने की मांग
कल्याण भंडारी ने मांग की कि यूपीआई को उपभोक्ताओं और छोटे कारोबारियों के लिए कानूनी रूप से पूर्णतः शुल्क-मुक्त रखा जाए। इसके साथ ही उन्होंने बिजली, पानी, गैस, पेट्रोल, दूरसंचार और रेलवे जैसी आवश्यक सेवाओं से जुड़े भुगतानों पर भी किसी अतिरिक्त शुल्क को लागू नहीं करने की मांग रखी।
उन्होंने कहा कि डिजिटल भुगतान व्यवस्था की पहुंच को बनाए रखने के लिए शुल्क संबंधी नियमों में स्पष्टता और पारदर्शिता जरूरी है।

