भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरे कर्मचारी को ‘क्लीन चिट’ कैसे ?
नगर निगम की अहम पोस्ट पर तैनाती, जीत समाचार के पास पहुंचे दस्तावेजों से उठे सवाल
आरोप लगे थे तो कार्रवाई क्या हुई? क्लीन चिट मिली तो किसने दी?
लुधियाना | जीत समाचार | 17 सितंबर 2026 | विक्की कुमार
लुधियाना नगर निगम में एक कर्मचारी की वर्तमान तैनाती को लेकर सवाल उठ रहे हैं। जीत समाचार के पास पहुंचे दस्तावेजों और उपलब्ध जानकारी के अनुसार, संबंधित कर्मचारी पहले भ्रष्टाचार संबंधी आरोप/मामले में कार्रवाई का सामना कर चुका बताया जा रहा है। इसके बावजूद वह फिलहाल नगर निगम में एक महत्वपूर्ण पद पर कार्यरत है।अब सवाल है कि उस मामले में विभागीय जांच का नतीजा क्या रहा और कर्मचारी को वर्तमान जिम्मेदारी किस आधार पर दी गई?
‘क्लीन चिट’ का दावा, आदेश कहां है?
संबंधित कर्मचारी की ओर से खुद को ‘क्लीन चिट’ मिलने का दावा किए जाने की बात सामने आई है।
लेकिन इस दावे को स्पष्ट करने के लिए कुछ बुनियादी सवाल जरूरी हैं—
1 क्लीन चिट किस जांच के बाद दी गई?
2 आदेश किस सक्षम अधिकारी ने जारी किया?
3 आदेश की तारीख और संदर्भ क्या है?
4 क्या उसकी प्रमाणित प्रति विभागीय रिकॉर्ड में मौजूद है? जब तक संबंधित आदेश और रिकॉर्ड सामने नहीं आते, ‘क्लीन चिट’ को केवल एक दावा ही माना जाएगा।
वर्तमान तैनाती पर भी सवाल
यदि किसी कर्मचारी के खिलाफ पहले भ्रष्टाचार संबंधी मामला या विभागीय कार्रवाई हुई थी, तो उसकी मौजूदा पोस्टिंग और जिम्मेदारियों का आधार सार्वजनिक रिकॉर्ड से स्पष्ट होना चाहिए।जीत समाचार किसी व्यक्ति को दोषी नहीं ठहरा रहा। आरोप, जांच, विभागीय कार्रवाई और दोष सिद्ध होना अलग-अलग कानूनी स्थितियां हैं। इसलिए इस मामले में अंतिम निष्कर्ष आधिकारिक रिकॉर्ड और सक्षम प्राधिकारी के निर्णय के आधार पर ही निकाला जा सकता है।
कमिश्नर से सीधे सवाल
नगर निगम प्रशासन से अब यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि:
1 क्या पुराने मामले की विभागीय जांच पूरी हुई थी?
2 क्या कर्मचारी को वास्तव में क्लीन चिट मिली है?
3 यदि मिली है तो उसका आदेश क्या कहता है?
4 और वर्तमान तैनाती किस नियम या आदेश के तहत की गई है?
इन सवालों का जवाब मिलने से पूरे मामले की स्थिति साफ हो सकती है।
जीत समाचार की पड़ताल जारी
जीत समाचार के पास उपलब्ध दस्तावेजों की जांच की जा रही है। आगे की रिपोर्ट में पुराने मामले की कार्रवाई, कथित क्लीन चिट और वर्तमान तैनाती के बीच की पूरी कड़ी दस्तावेजों के आधार पर सामने रखी जाएगी।संबंधित कर्मचारी और नगर निगम प्रशासन का पक्ष भी लिया जाएगा और उनका जवाब खबर में शामिल किया जाएगा।
फोन पर सवाल पूछते ही कर्मचारियों का दो टूक जवाब—“मैं विधायक के साथ बैठा हूं” कहकर काट दिया फोन
जब इस मामले को लेकर संबंधित कर्मचारियों से फोन पर उनका पक्ष जानने के लिए संपर्क किया गया तो उन्होंने पहले पूछा, “आप कौन बोल रहे हो?” पत्रकार द्वारा “जीत समाचार से बोल रहे हैं” बताए जाने पर दोनों कर्मचारियों की ओर से कथित तौर पर जवाब आया कि “मैं विधायक के साथ बैठा हूं” और इसके बाद फोन काट दिया गया।अब सवाल यह है कि जब किसी सरकारी कर्मचारी से उसके विभागीय कामकाज को लेकर आधिकारिक पक्ष जानने की कोशिश की जाए, तो क्या किसी विधायक के साथ बैठे होने का हवाला देकर पत्रकार का फोन काट देना उचित है? मामले में संबंधित अधिकारियों का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है।
सबसे बड़ा सवाल—क्लीन चिट सच में मिली या सिर्फ दावा है?
दस्तावेज सामने आएंगे तो जवाब भी सामने आएगा।

