“ज़ोन A ब्लॉक-25 में 15 फुट गली का बड़ा खेल? 6 मंजिला बिल्डिंग पर पहले सील, फिर खुली—अब कंपाउंडिंग की चर्चा!”

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ATP राजकुमार के जोन-A में बिल्डिंग बायलॉज से लेकर सीलिंग तक उठे बड़े सवाल —क्या पूरी प्रक्रिया की होगी उच्चस्तरीय जांच?

सील लगी थी तो खुली कैसे? अब कंपाउंडिंग होगी तो किस नियम के तहत?

लुधियाना | 21 सितंबर 2026 | विक्की कुमार

नगर निगम लुधियाना की बिल्डिंग ब्रांच, जोन-A, ब्लॉक-25 में 15 फुट की गली से जुड़े छह मंजिला कमर्शियल निर्माण का मामला लगातार चर्चा में है। जीत समाचार द्वारा मामला उठाए जाने के बाद अब इस इमारत को लेकर कंपाउंडिंग फीस जमा किए जाने की संभावित प्रक्रिया की चर्चा सामने आ रही है।हालांकि, कंपाउंडिंग वास्तव में होगी या नहीं और संबंधित निर्माण लागू बिल्डिंग बायलॉज के तहत कंपाउंडिंग योग्य है या नहीं, इसका अंतिम निर्णय सक्षम नगर निगम अधिकारी द्वारा नियमों और उपलब्ध रिकॉर्ड की जांच के बाद ही किया जा सकता है।मामले में अब मुख्य सवाल यह है कि निर्माण स्वीकृत नक्शे के अनुरूप है या नहीं, इमारत की सील खोलने की प्रक्रिया किस आदेश के तहत हुई और यदि कंपाउंडिंग का प्रस्ताव है तो उसका कानूनी आधार क्या है।

अब नजर नगर निगम की जांच और आधिकारिक रिकॉर्ड पर है।

सबसे बड़ा सवाल—पहले सील लगी थी तो खुली कैसे, अब कंपाउंडिंग क्यों?

अगर इमारत में नियमों के विपरीत निर्माण पाए जाने के कारण उसे सील किया गया था, तो अब ब्लॉक-25 की इस 6 मंजिला इमारत को लेकर चार बड़े सवाल सामने खड़े हैं—

1️⃣ क्या यह पूरा निर्माण कंपाउंडिंग के योग्य है?

2️⃣ यदि हां, तो कंपाउंडिंग किस नियम और किस सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के तहत होगी?

3️⃣ क्या बनी हुई सभी मंजिलें लागू बिल्डिंग बायलॉज और स्वीकृत नक्शे के दायरे में आती हैं?

4️⃣ सबसे अहम—इमारत की सील खोलने का आदेश किसने दिया और क्या पूरी प्रक्रिया नियमों के मुताबिक हुई?

🔎 अब जवाब सिर्फ बयान से नहीं, फाइल से चाहिए!

छह मंजिल बनने के बाद कंपाउंडिंग की बारी?

स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि अब इमारत को कंपाउंडिंग प्रक्रिया के जरिए नियमित करने की कोशिश की जा सकती है।

लेकिन यहां असली सवाल यही है कि यदि निर्माण स्वीकृत नक्शे और लागू बायलॉज के अनुरूप नहीं था तो निर्माण के शुरुआती चरण में ही कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

यदि कंपाउंडिंग नियमों के तहत संभव है तो नगर निगम को स्पष्ट करना चाहिए कि कौन-कौन से हिस्से कंपाउंडिंग योग्य हैं और किन हिस्सों पर कार्रवाई जरूरी है।

ATP राजकुमार की भूमिका भी जांच के दायरे में?

क्षेत्र में ATP राजकुमार की तैनाती के बाद इस मामले को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। हालांकि, किसी अधिकारी पर व्यक्तिगत आरोप को तथ्य मानने से पहले आधिकारिक रिकॉर्ड और जांच जरूरी है।

इसलिए सवाल यह नहीं कि “किसका राज चल रहा है?”

सवाल यह है कि क्या इस मामले में नगर निगम कमिश्नर के निर्देश और लागू बिल्डिंग बायलॉज के अनुसार कार्रवाई हो रही है?

 राजनीतिक सिफारिशों की चर्चा—पुष्टि बाकी

सूत्रों के हवाले से राजनीतिक सिफारिशों की चर्चा भी सामने आ रही है। किसी विधायक या राजनीतिक व्यक्ति की भूमिका के बारे में जीत समाचार स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता।

यदि ऐसी कोई सिफारिश हुई है तो उसका रिकॉर्ड सामने आना चाहिए और नगर निगम को स्पष्ट करना चाहिए कि किसी बाहरी दबाव का निर्णय प्रक्रिया पर कोई प्रभाव पड़ा या नहीं।

पुराने इंस्पेक्टर की भूमिका पर भी उठ रहे सवाल

इमारत की पहले की कार्रवाई में संबंधित बिल्डिंग इंस्पेक्टर की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।

यदि पहले सील की गई थी तो यह पता लगाना जरूरी है कि सील किस आदेश पर लगी, किस आदेश पर खुली और इसके बाद निर्माण की स्थिति की जांच किस अधिकारी ने की।

किसी कर्मचारी को दोषी बताने से पहले विभागीय जांच आवश्यक है।

अब कमिश्नर के सामने तीन बड़े सवाल

1. क्या छह मंजिला निर्माण लागू बायलॉज के तहत कंपाउंडिंग योग्य है?

2. सील खोलने का लिखित आदेश किस सक्षम अधिकारी ने जारी किया?

3. यदि नियमों का उल्लंघन हुआ है तो जिम्मेदारी किस अधिकारी/कर्मचारी की तय होगी?

जीत समाचार का सवाल

“कंपाउंडिंग होगी या नियमों के मुताबिक कार्रवाई?—अब फैसला फाइल करेगी या दबाव?”

नगर निगम कमिश्नर द्वारा इस मामले की जांच की बात पहले सामने आ चुकी है। अब देखना होगा कि जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और इमारत के संबंध में सीलिंग, कंपाउंडिंग तथा निर्माण की वैधता पर नगर निगम का आधिकारिक निर्णय क्या होता है।

जीत समाचार संबंधित ATP, बिल्डिंग इंस्पेक्टर और इमारत मालिक का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित करेगा।

 

 

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