ट्रांसफर के बाद भी नहीं बदली तस्वीर? ब्लॉक-32 की चौथी मंजिल पर फिर उठे सवाल
नगर निगम बिल्डिंग ब्रांच पर निगाहें—सीलिंग के बावजूद लेंटर की तैयारी के आरोप, अब कार्रवाई का इंतजार
लुधियाना/21 सितंबर 2026/विक्की कुमार
नगर निगम बिल्डिंग ब्रांच में कुछ समय पहले अधिकारियों और कर्मचारियों के तबादले किए गए थे। उस समय उम्मीद जताई गई थी कि इससे कामकाज में पारदर्शिता आएगी और अनियमितताओं पर लगाम लगेगी। लेकिन अब जोन-A के ब्लॉक-32 में एक कमर्शियल बिल्डिंग की चौथी मंजिल को लेकर उठ रहे सवालों ने बिल्डिंग ब्रांच की कार्यप्रणाली पर फिर चर्चा छेड़ दी है।जानकारी के अनुसार, उक्त इमारत में चौथी मंजिल के निर्माण को लेकर आपत्ति जताई गई थी और मौके पर सीलिंग संबंधी कार्रवाई किए जाने की बात सामने आई है। इसके बावजूद चौथी मंजिल के लेंटर की तैयारी होने के आरोप लगाए जा रहे हैं। सूत्रों का दावा है कि रात के समय निर्माण कार्य आगे बढ़ाने की कोशिश हो सकती है। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है।
सील लगी है तो तैयारी कैसे?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि भवन के संबंध में नगर निगम की ओर से सीलिंग कार्रवाई की गई है, तो उसके बाद निर्माण सामग्री और लेंटर की तैयारी कैसे हो रही है?
क्या मौके पर निगम की निगरानी है?
क्या सीलिंग आदेश प्रभावी है?
क्या संबंधित अधिकारी ने दोबारा मौके का निरीक्षण किया है?
और यदि निर्माण नियमों के विपरीत पाया जाता है तो कार्रवाई कब होगी?
तबादले के बाद भी पुराने सवाल
नगर निगम में अधिकारियों और कर्मचारियों के तबादलों को लेकर पहले भी यह उम्मीद जताई जाती रही है कि इससे व्यवस्था में सुधार आएगा। लेकिन ब्लॉक-32 का मामला यह सवाल खड़ा कर रहा है कि क्या केवल तबादला कर देने से बिल्डिंग ब्रांच की कार्यप्रणाली में वास्तविक बदलाव आएगा?जोन-A में तैनात अधिकारियों के सामने अब यह मामला एक तरह की प्रशासनिक परीक्षा बन गया है। खासकर तब, जब सरकार लगातार भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई और पारदर्शी प्रशासन की बात कर रही है।
राजनीतिक सिफारिश के आरोप—साबित होना बाकी
इस मामले में कुछ लोगों की ओर से राजनीतिक सिफारिश के आरोप भी लगाए जा रहे हैं। हालांकि ऐसे आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए असली सवाल यह है कि नगर निगम के रिकॉर्ड में इस भवन की स्थिति क्या है और संबंधित अधिकारियों ने अब तक क्या कार्रवाई की है।जीत समाचार की ओर से संबंधित दस्तावेजों, सीलिंग कार्रवाई और मौके की स्थिति की जानकारी जुटाई जा रही है। यदि चौथी मंजिल का लेंटर वास्तव में डाला जाता है, तो यह जांच का महत्वपूर्ण विषय होगा कि निगम की कार्रवाई के बावजूद निर्माण कैसे आगे बढ़ा।
अब नजर कमिश्नर और बिल्डिंग ब्रांच के PCS अधिकारी पर
अब देखना होगा कि नगर निगम कमिश्नर और बिल्डिंग ब्रांच के वरिष्ठ अधिकारी इस मामले में क्या कदम उठाते हैं।
अगर निर्माण नियमों के विरुद्ध है तो क्या लेंटर रुकवाया जाएगा?
अगर सीलिंग का उल्लंघन हुआ है तो जिम्मेदारी किसकी तय होगी?
और अगर सब कुछ नियमों के मुताबिक है तो निगम रिकॉर्ड में इसकी अनुमति किस आधार पर है?
ब्लॉक-32, जोन-A का यह मामला अब सिर्फ एक इमारत का सवाल नहीं, बल्कि नगर निगम की बिल्डिंग ब्रांच की निगरानी और कार्रवाई की गंभीर परीक्षा बनता दिखाई दे रहा है।
जीत समाचार इस मामले से जुड़े दस्तावेज और अगली कार्रवाई सामने आने पर रिपोर्ट का अगला भाग प्रकाशित करेगा।

