नगर निगम जोन-C के ब्लॉक-37 में ‘चारदीवारी’ के नाम पर निर्माण का खेल? नोटिस के बाद भी काम जारी होने के आरोप, बिल्डिंग ब्रांच पर उठे गंभीर सवाल!

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पहले चारदीवारी की बात, अब नए ATP का नोटिस—क्या पुराने बिल्डिंग इंस्पेक्टर की भूमिका की भी होगी जांच? PCS अधिकारी ने कहा, “मामले को दोबारा चेक करवाऊंगा”

लुधियाना | 20 अक्टूबर 2026 विक्की कुमार

लुधियाना नगर निगम की बिल्डिंग ब्रांच की कार्यप्रणाली को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। जीत समाचार की पड़ताल में सामने आए एक अन्य मामले में जोन-C के ब्लॉक-37 में निर्माण को लेकर विवाद सामने आया है। आरोप है कि पहले संबंधित बिल्डिंग इंस्पेक्टर की ओर से मामले को केवल चारदीवारी तक सीमित बताकर कार्रवाई की गई, लेकिन अब निर्माण की वास्तविक स्थिति और पहले दी गई रिपोर्ट पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

 चारदीवारी का हवाला, लेकिन मौके पर क्या हो रहा है?

मिली जानकारी के अनुसार, पहले संबंधित बिल्डिंग मालिक की ओर से चारदीवारी करने की बात कही गई थी। आरोप है कि इसी आधार पर बिल्डिंग ब्रांच की ओर से रिपोर्ट तैयार की गई। लेकिन अब सवाल यह है कि क्या मौके पर वास्तव में केवल चारदीवारी का काम हो रहा है या निर्माण इससे आगे बढ़ चुका है?

यदि पहले दी गई रिपोर्ट और मौजूदा स्थिति में अंतर पाया जाता है, तो इसकी जिम्मेदारी तय करना जरूरी होगा। आखिर मौके पर निरीक्षण करने वाले अधिकारी ने क्या देखा था और रिपोर्ट किस आधार पर तैयार की गई थी?

 नए ATP का नोटिस, फिर भी काम जारी होने का दावा!

सूत्रों के अनुसार, हाल ही में जॉइन करने वाले नए ATP की ओर से भी इस बिल्डिंग को लेकर नोटिस जारी किया गया है। दावा किया जा रहा है कि नोटिस के बावजूद मौके पर काम जारी है।

अब सवाल यह है कि क्या नोटिस के बाद दोबारा निरीक्षण किया गया? यदि निर्माण नियमों के विपरीत पाया जाता है, तो क्या आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी? केवल नोटिस जारी करना पर्याप्त नहीं, उसकी पालना सुनिश्चित करना भी प्रशासन की जिम्मेदारी है।

पुराने बिल्डिंग इंस्पेक्टर की भूमिका की जांच होगी?

इस मामले में पहले तैनात बिल्डिंग इंस्पेक्टर की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं, जो अब दूसरे जोन में तैनात बताए जा रहे हैं। आरोपों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए कि पहले निरीक्षण के दौरान क्या रिपोर्ट दी गई, क्या निर्माण की सही स्थिति अधिकारियों के सामने रखी गई और क्या नियमों के अनुसार कार्रवाई की गई थी।

जीत समाचार का सवाल है—यदि पहले की रिपोर्ट सही थी, तो नए ATP को नोटिस जारी करने की जरूरत क्यों पड़ी? और यदि रिपोर्ट में कोई कमी थी, तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?

PCS अधिकारी का बयान—मामले को दोबारा चेक करवाऊंगा

जीत समाचार के अनुसार, जब इस मामले को बिल्डिंग ब्रांच के PCS अधिकारी और इंचार्ज के ध्यान में लाया गया, तो उन्होंने बताया कि यह मुद्दा पहले भी उनके सामने उठाया गया था। उनके अनुसार, उन्होंने पहले भी मामले की जांच के निर्देश दिए थे, लेकिन ATP और बिल्डिंग इंस्पेक्टर की ओर से रिपोर्ट दी गई थी कि वहां चारदीवारी और फेंसिंग का काम है।

अधिकारी ने अब मामले को दोबारा चेक करवाने की बात कही है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि जांच में कोई अनियमितता सामने आती है, तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

सरकारी खजाने को नुकसान हुआ तो जवाबदेह कौन?

यदि जांच में यह साबित होता है कि निर्माण को गलत तरीके से चारदीवारी बताकर वास्तविक स्थिति छिपाई गई या लागू नियमों का पालन नहीं हुआ, तो इसकी जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। साथ ही, यदि सरकार की निर्धारित फीस या अन्य देनदारियों में कोई कमी पाई जाती है, तो रिकॉर्ड के आधार पर उसका आकलन कर नियमानुसार वसूली की जानी चाहिए।

जीत समाचार के सीधे सवाल

1 क्या ब्लॉक-37 की बिल्डिंग का दोबारा मौके पर निरीक्षण होगा?

2 क्या पहले तैयार की गई रिपोर्ट और नए ATP के नोटिस की जांच की जाएगी?

3 क्या पुराने बिल्डिंग इंस्पेक्टर की भूमिका भी जांच के दायरे में आएगी?

4 नोटिस के बाद काम जारी होने के दावे की पुष्टि कौन करेगा?

5 यदि नियमों का उल्लंघन मिला, तो क्या जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई होगी?

जीत समाचार का स्पष्ट पक्ष: बिल्डिंग मालिक हो या सरकारी अधिकारी, नियम सभी के लिए समान होने चाहिए। निर्माण मंजूरशुदा नक्शे और लागू बिल्डिंग बायलॉज के अनुसार होना चाहिए। अब देखना यह है कि दोबारा जांच के बाद नगर निगम प्रशासन क्या कार्रवाई करता है।

 

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