फौजी के बेटे से लुधियाना के पुलिस कमिश्नर तक: IPS स्वपन शर्मा के संघर्ष, साहस और ‘जीरो टॉलरेंस’ की मुकम्मल दास्तां
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लुधियाना | 24 जनवरी (कमल पवार)
बचपन और प्रारंभिक जीवन
जन्म: स्वपन शर्मा का जन्म 10 अक्टूबर, 1980 को हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले की ज्वालामुखी तहसील के ढोग गांव में हुआ था।
पारिवारिक पृष्ठभूमि: उनके पिता, कर्नल महेश शर्मा, भारतीय सेना के एक सम्मानित अधिकारी रहे हैं, जिससे उन्हें बचपन से ही अनुशासन विरासत में मिला। उनकी माता, बीना शर्मा, एक गृहिणी हैं।
शिक्षा और प्रारंभिक करियर
स्कूली शिक्षा: उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा हिमाचल प्रदेश के आर्मी पब्लिक स्कूल, डगशाई से पूरी की।
इंजीनियरिंग: उच्च शिक्षा के लिए वे पंजाब आए और बठिंडा के ज्ञानी जैल सिंह कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी से ग्रेजुएशन (वास्तुकला/आर्किटेक्ट) किया।
पहला करियर मोड़: यूपीएससी में सफलता से पहले, उन्होंने हिमाचल प्रशासनिक सेवा (HAS) की परीक्षा पास की थी। साल 2008 में वे शिमला के चौपाल में बीडीओ (BDO) के पद पर तैनात थे, जहाँ उन्होंने लगभग 9 महीने तक सेवा दी।
आईपीएस बनने का सफर
स्वपन शर्मा हमेशा से अंग्रेजी साहित्य पढ़ाने की इच्छा रखते थे, लेकिन उन्होंने सिविल सेवा की तैयारी की और साल 2009 में यूपीएससी परीक्षा उत्तीर्ण कर भारतीय पुलिस सेवा (IPS) ज्वाइन की।
ट्रेनिंग के बाद उन्होंने पंजाब कैडर को चुना और राजपुरा में अपनी पहली तैनाती के साथ करियर की शुरुआत की।
सफर की मुख्य विशेषताएं (अब तक)
एनकाउंटर स्पेशलिस्ट की छवि: वे पंजाब पुलिस में अपनी सख्त कार्यशैली के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने अब तक 50 से अधिक मुठभेड़ों (Encounters) का नेतृत्व किया है और खूंखार गैंगस्टर दविंदर बंबीहा जैसे अपराधियों के नेटवर्क को ध्वस्त किया।
आम जनता का अटूट साथ: साल 2012 में लुधियाना में तैनाती के दौरान उनके एक सख्त ‘टो-अवे’ (वाहनों को हटाने) अभियान के कारण उनका तबादला कर दिया गया था। तब लुधियाना के निवासियों और उद्योगपतियों ने उनके समर्थन में आंदोलन किया था, जिसके बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री ने उनका तबादला रद्द कर दिया—यह किसी पुलिस अधिकारी के लिए जनता के प्यार का एक दुर्लभ उदाहरण था।
महत्वपूर्ण पद: वे फाजिल्का, बठिंडा, जालंधर और अमृतसर जैसे जिलों में एसएसपी रहे। वर्तमान में, मार्च 2025 से वे लुधियाना के 24वें पुलिस कमिश्नर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
लुधियाना पुलिस की नई पहल: कमिश्नर स्वपन शर्मा के नेतृत्व में अपराधियों पर नकेल और ‘स्मार्ट पुलिसिंग’ का उदय
पंजाब के औद्योगिक केंद्र लुधियाना में कानून-व्यवस्था को एक नई दिशा देने और अपराध मुक्त समाज की परिकल्पना को साकार करने के लिए पुलिस कमिश्नर स्वपन शर्मा के कार्यकाल को उनके कड़े फैसलों और तकनीकी सुधारों के लिए याद किया जा रहा है। अपने अब तक के सफर में उन्होंने न केवल अपराधियों में खौफ पैदा किया है, बल्कि आम जनता के बीच पुलिस की छवि को ‘मित्र’ के रूप में स्थापित किया है।
करियर और जीवनी की एक झलक
स्वपन शर्मा, जो एक अनुभवी आईपीएस (IPS) अधिकारी हैं, अपनी कर्तव्यनिष्ठा और अनुशासन के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने पंजाब के विभिन्न जिलों (जैसे जालंधर और अमृतसर) में अपनी सेवाओं के दौरान नशे के सौदागरों और गैंगस्टरों के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाई। उनके नेतृत्व में पुलिस बल ने कई जटिल मामलों को सुलझाया है, जिससे उन्हें प्रदेश के काबिल अधिकारियों की सूची में प्रमुख स्थान मिला।
अब तक के प्रमुख कार्य और उपलब्धियां:
नशे के खिलाफ ‘सर्जिकल स्ट्राइक’: लुधियाना और आसपास के क्षेत्रों में नशे की सप्लाई चेन को तोड़ने के लिए उन्होंने ‘एंटी-ड्रग ड्राइव’ शुरू की। सैकड़ों तस्करों की गिरफ्तारी और करोड़ों की संपत्ति कुर्क करना उनकी बड़ी उपलब्धि रही।
गैंगस्टर कल्चर का खात्मा: स्वपन शर्मा के मार्गदर्शन में ‘एंटी-गैंगस्टर टास्क फोर्स’ के साथ मिलकर कई नामी अपराधियों को सलाखों के पीछे भेजा गया। उन्होंने साफ संदेश दिया कि पंजाब की धरती पर गुंडागर्दी के लिए कोई जगह नहीं है।
ट्रैफिक प्रबंधन और आधुनिक तकनीक: शहर की ट्रैफिक समस्या को सुलझाने के लिए उन्होंने ‘स्मार्ट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम’ और सीसीटीवी निगरानी को प्राथमिकता दी, जिससे दुर्घटनाओं में कमी आई।
जनता के साथ सीधा संवाद: ‘पुलिस-पब्लिक मीट’ के जरिए उन्होंने शिकायतों का त्वरित निवारण सुनिश्चित किया। भ्रष्टाचार के खिलाफ उनकी मुहिम ने विभाग के भीतर भी पारदर्शिता बढ़ाई है।
स्वपन शर्मा के विचार: “सुरक्षा केवल वर्दी का काम नहीं, जिम्मेदारी है” अपने विभिन्न संबोधनों में स्वपन शर्मा ने हमेशा कुछ प्रमुख विचारों पर जोर दिया है:
टेक्नोलॉजी का उपयोग: उनका मानना है कि आधुनिक अपराधों से लड़ने के लिए पुलिस को अपराधियों से दो कदम आगे डिजिटल रूप से तैयार रहना होगा।
सामुदायिक पुलिसिंग: वे अक्सर कहते हैं, “पुलिस तभी सफल है जब शहर का हर नागरिक खुद को सुरक्षित महसूस करे और बिना डरे पुलिस के पास आ सके।”
युवाओं को प्रेरणा: वे युवाओं को नशे से दूर रहकर खेलों और शिक्षा की ओर मुड़ने के लिए लगातार प्रेरित करते रहे हैं।
निष्कर्ष: स्वपन शर्मा की कार्यशैली यह दर्शाती है कि दृढ़ इच्छाशक्ति और सही रणनीति से बड़े से बड़े अपराध तंत्र को ध्वस्त किया जा सकता है। लुधियाना पुलिस के साथ उनका जुड़ाव शहर की सुरक्षा व्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुआ है।
