हरियाणा में ढाबों पर होगा ये बड़ा बदलाव, इन नियमों की अनदेखी पर सख्ती तय
Views: 5
हरियाणा/28 जनवरी 2026 जीत समाचार
हरियाणा की पहचान बन गए मुरथल के ढाबों पर अब स्वाद के साथ-साथ जिम्मेदारी भी निभाएंगे। जीटी रोड पर स्थित ढाबों में जल संरक्षण और प्रदूषण नियंत्रण को लेकर सरकार ने सख्त रुख अपना लिया है। वन एवं पर्यावरण मंत्री राव नरबीर सिंह ने साफ शब्दों में कहा है कि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) का अधिग्रहण हर हाल में करना होगा, वह एसटीपी-सीटीपी की स्थापना हो या वैधानिक शेयरधारकों की स्थापना।
मंत्री राव नरबीर सिंह ने
आज रविवार को यहां गन्नौर के प्रमुख नेता कादियान के नेतृत्व में मुरथल के ढेबा मठ में आए, सामिल के साथ हुई बैठक में कहा। बैठक के दौरान मंत्री ने दो टूक कहा कि पानी का अंधाधुंध इस्तेमाल किया गया है और पानी का सीधा बहाव अब नहीं किया गया है। हर ढेबे को सीवेज प्लांट प्लांट (एसटीपी) या कॉमनवेल्थ प्लांट (सीटीपी) के जरिए पानी के पुनः उपयोग की व्यवस्था की जाएगी। मंत्री ने पर्यावरण हितैशीस्टेप यात्रा से पर्यावरण हितैषी कदम की अपील की। सरकार और कुपोषण के सहयोग से मुरथल को न सिर्फ स्वाद का, बल्कि स्वच्छता और पर्यावरण संतुलन का भी मॉडल बनाया जा सकता है।
मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया
जो लोग बिना कंपनी ऑफ लैंड यूजी (सीएलयू) के चल रहे हैं, उन्हें नगर निगम से संबंधित टैक्स, शुल्क और दस्तावेज तुरंत पूरा करना होगा। वहीं जिन ढाबों के पास सीएलयू प्लांट है, उनमें भी हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सभी मानकों का पालन करना अनिवार्य होगा। बूढ़े की अनदेखी करने वा
राव नरबीर सिंह ने कहा कि सरकार का उद्देश्य किसी भी ढाबा या व्यवसाय को नुकसान पहुंचाना नहीं है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के साथ कानूनसम्मत संचालन सुनिश्चित करना है। उन्होंने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सचिव योगेश कुमार को निर्देश दिया कि बोर्ड अध्यक्ष से समन्वय कर व्यावहारिक समाधान निकाला जाए, जिससे नियम भी लागू हों और व्यापार भी प्रभावित न हो।
बैठक में ढाबा संचालकों ने यह मुद्दा भी उठाया कि एनजीटी के निरीक्षण के दौरान क्लोजर आदेश जारी होने पर भारी जुर्माना लगाया जाता है। इस पर मंत्री ने कहा कि जुर्माने की गणना ढाबे के संचालन की अवधि के आधार पर होती है, इसलिए बेहतर है कि सभी संचालक समय पर रहें नियमों का पालन करें
