नालागढ़ पुलिस स्टेशन ब्लास्ट मामला: पंजाब से BKI के दो गुर्गे गिरफ्तार,एक जनवरी को किया था धमाका
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पंजाब20 जनवरी 2026 जीत समाचार
हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले के नालागढ़ पुलिस स्टेशन पर एक जनवरी को बम ब्लास्ट हुआ था। इस घटना को अंजाम देने वाले दोनों आरोपियों को पंजाब पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। जिसमें पाक-आईएसआई समर्थित बब्बर खालसा इंटरनेशनल (बीकेआई) आतंकी नेटवर्क से जुड़े एक नार्को-टेरर मॉड्यूल की संलिप्तता का पता चला है और इसके दो गुर्गों को गिरफ्तार किया है।
इस संबंध में जानकारी देते हुए पंजाब पुलिस के महानिदेशक (डीजीपी) गौरव यादव ने बताया
कि यह ऑपरेशन हिमाचल प्रदेश पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों के साथ मिलकर किया गया। आरोपियों की पहचान शमशेर सिंह उर्फ शेरू उर्फ कमल और प्रदीप सिंह उर्फ दीपू के रूप में हुई है, दोनों नंवाशहर के राहों के रहने वाले हैं। पुलिस टीमों ने उनके पास से एक इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (आईईडी) भी बरामद किया है।पुलिस जांच में सामने आया कि गिरफ्तार किए गए गुर्गे गुरप्रीत उर्फ गोपी नवांशहरिया और बीकेआई के मास्टरमाइंड हरविंदर रिंदा के करीबी सहयोगी शुशांत चोपड़ा के निर्देश पर काम कर रहे थे।शुरुआती जांच में पता चला है कि 31 दिसंबर 2025 को गिरफ्तार आरोपियों ने अपने दो साथियों के साथ मिलकर पंजाब से हिमाचल प्रदेश में एक आईईडी पहुंचाया था, जिसका इस्तेमाल बाद में 1 जनवरी, 2026 को नालागढ़ पुलिस स्टेशन ब्लास्ट में पुलिस प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने की एक बड़ी साजिश के तहत किया गया था।
उन्होंने कहा कि इस मामले में आगे और पीछे के संबंधों का पता लगाने के लिए जांच जारी है। ऑपरेशनल डिटेल्स शेयर करते हुए, सीनियर सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस (एसएसपी) नवांशहर तुषार गुप्ता ने बताया कि पुलिस स्टेशन राहों में एनडीपीएस एक्ट के तहत दर्ज एक मामले की जांच के दौरान, गिरफ्तार आरोपियों का रोल सुशांत चोपड़ा के निर्देशों पर काम करने में पाया गया। खुलासों और फॉलोअप कार्रवाई के आधार पर आरोपियों द्वारा बताए गए ठिकाने से एक आईईडी बरामद किया गया है, जो आतंकी साजिश में उनकी संलिप्तता की और पुष्टि करता है। उन्होंने कहा कि पुलिस टीमों ने गिरफ्तार आरोपियों के दो और साथियों की भी पहचान की है और उन्हें पकड़ने के लिए छापेमारी की जा रही है।
पकड़े गए आरोपियों के खिलाफ पुलिस स्टेशन राहों में आर्म्स एक्ट, एक्सप्लोसिव सब्सटेंस एक्ट, गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) और भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।
