सियासत का ‘सिद्धू’ शास्त्र: कैंसर से जंग जीती, अब कांग्रेस से ‘आजादी’ की बारी!

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अमृतसर/चंडीगढ़ |(कमल पवार)

पंजाब की राजनीति में जहाँ नेता अक्सर अपनी कुर्सी बचाने की जुगत में रहते हैं, वहीं डॉ. नवजोत कौर सिद्धू ने एक बिल्कुल अलग मोर्चा खोल दिया है। आज (31 जनवरी, 2026) उन्होंने सिर्फ कांग्रेस नहीं छोड़ी, बल्कि एक पुराने सिस्टम को चुनौती दे डाली है।

1. ‘गोमूत्र’ और ‘ईश्वर’ के सहारे बड़ी जीत:

जहाँ दुनिया कैंसर जैसे रोग में सिर्फ अस्पतालों के चक्कर काटती है, वहीं डॉ. सिद्धू ने अपनी रिकवरी का श्रेय वृंदावन की धूल और गोमूत्र को देकर सबको चौंका दिया है। हाल ही में अनिरुद्धाचार्य महाराज के दरबार में उनके आंसू और उनकी आस्था ने यह साफ कर दिया कि अब वे राजनीति से ज्यादा ‘शक्ति’ और ‘भक्ति’ पर भरोसा कर रही हैं।

2. राजा वड़िंग और मान की ‘जुगलबंदी’ पर सर्जिकल स्ट्राइक:

डॉ. सिद्धू ने अपने इस्तीफे में जो सबसे बड़ा बम फोड़ा है, वह है राजा वड़िंग और सीएम भगवंत मान की कथित ‘दोस्ती’। उन्होंने आरोप लगाया कि पर्दे के पीछे पंजाब की विपक्षी पार्टी ही सरकार के साथ मिली हुई है। यह दावा पंजाब की राजनीति में एक बड़ा भूचाल ला सकता है।

3. क्या ‘कैंसर डिटेक्शन’ बनेगा नया राजनीतिक हथियार?

राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि डॉ. सिद्धू अब घर-घर जाकर कैंसर के प्रति जागरूकता फैलाएंगी। उनका यह सामाजिक चेहरा उन्हें आम लोगों के बेहद करीब ले जा रहा है। वे अब सिर्फ ‘नेता’ नहीं, बल्कि ‘सर्वाइवर’ के तौर पर उभरी हैं।

4. खामोश शेर की दहाड़ का इंतजार:

सबसे बड़ा सस्पेंस अभी भी बरकरार है—नवजोत सिंह सिद्धू क्या करेंगे? डॉ. सिद्धू ने साफ कर दिया है कि उनके पति सिर्फ ‘चेहरा’ बनने के लिए राजनीति में लौटेंगे, ‘भीड़’ का हिस्सा बनने के लिए नहीं।

यह महज एक इस्तीफा नहीं है, बल्कि एक नई शुरुआत का ऐलान है। डॉ. नवजोत कौर सिद्धू ने दिखा दिया है कि वे अब अपनी शर्तों पर जिएंगी—चाहे वह सेहत हो या सियासत।

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