PAU का ‘ग्रीन ड्रामा’ या मजबूरी ? अधिकारियों के दावों की हवा निकाल रहे ‘जुगाड़’ और छात्रों का गुस्सा !

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लुधियाना:10 फरवरी (दिनेश कुमार शर्मा)

पंजाब एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी (PAU) इन दिनों शिक्षा से ज्यादा अपनी सड़कों पर चल रही ‘जंग’ को लेकर चर्चा में है। एक तरफ कुलपति डॉ. सतबीर सिंह गोसल और एस्टेट ऑफिसर का भारी-भरकम अमला कैंपस को ‘स्वर्ग’ जैसा प्रदूषण मुक्त बनाने का दावा कर रहा है, तो दूसरी तरफ गेट पर खड़ी सिक्योरिटी और छात्रों के बीच तकरार का माहौल है।

अधिकारियों का ‘फरमान‘: स्कूटी-रिक्शा पर नो-एंट्री, ई-रिक्शा के भरोसे जिंदगी !
यूनिवर्सिटी के आला अधिकारियों ने कैंपस में ‘स्कूटी वाली रिक्शा’ (जुगाड़) को यह कहकर बैन कर रखा है कि ये ‘प्रदूषण का दानव’ हैं। चीफ सिक्योरिटी ऑफिसर का तर्क है कि ये वाहन असुरक्षित हैं। लेकिन सवाल यह है कि जब कैंपस के अंदर कीमती पेट्रोल फूँकती और धुआं छोड़ती अधिकारियों की लंबी लग्जरी गाड़ियां फर्राटा भरती हैं, तब ‘ग्रीन कैंपस’ का मिशन कहाँ सो जाता है? सहयोगी समूह The Times of India की रिपोर्ट बताती है कि नियम सिर्फ छात्रों और छोटे रिक्शा वालों के लिए हैं, जबकि रसूखदारों की गाड़ियों के लिए गेट हमेशा खुले रहते हैं।

“जुगाड़” से इतनी नफरत क्यों ?
अंदर की खबर यह है कि स्कूटी-रिक्शा को रोकने के पीछे सिर्फ प्रदूषण मुद्दा नहीं है। सूत्रों की मानें तो यूनिवर्सिटी प्रशासन कुछ खास वेंडर्स के E-Rickshaws को एकाधिकार (Monopoly) देना चाहता है। गरीब रिक्शा वाले जो अपनी स्कूटी के पीछे रेहड़ी जोड़कर छात्रों को ₹10 में मंजिल तक पहुँचाते थे, उन्हें ‘असुरक्षित’ बताकर बाहर कर दिया गया है। छात्र संगठनों का कहना है कि “जब अधिकारी खुद ऐसी कारों में घूमते हैं जो ई-रिक्शा से 10 गुना ज्यादा प्रदूषण फैलाती हैं, तो उन्हें छात्रों के वाहनों पर लेक्चर देने का कोई हक नहीं।” सहयोगी समूह Hindustan Times

अधिकारियों के दावों की पोल खोलती हकीकत:

वीकेंड पर गायब ई-रिक्शा: अधिकारियों ने बड़े-बड़े विज्ञापनों में कहा कि 5 नए ई-रिक्शा बेड़े में शामिल किए गए हैं, लेकिन शनिवार-रविवार को जब दूर-दराज से छात्र भारी बैग लेकर आते हैं, तो ये ई-रिक्शा नजर नहीं आते। सहयोगी समूह The Times of India ने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया था।

दोहरा मापदंड: कैंपस में 94 पेड़ों को काटने की तैयारी अधिकारियों ने ही की थी, जिसे छात्रों ने आंदोलन करके रुकवाया। ऐसे में प्रशासन का खुद को ‘पर्यावरण प्रेमी’ बताना छात्रों के गले नहीं उतर रहा।

सिक्योरिटी का खौफ: गेट नंबर 1 और 2 पर तैनात सुरक्षाकर्मी छात्रों के साथ ऐसे पेश आते हैं जैसे वे अपराधी हों, जबकि रसूखदार बिना पास के भी अंदर चले जाते हैं।

PAU प्रशासन कागजों पर तो कैंपस को ‘क्लीन और ग्रीन’ दिखा रहा है, लेकिन हकीकत में यह सिर्फ आम छात्रों और गरीब रिक्शा चालकों पर लगाम कसने का जरिया बन गया है। जब तक अधिकारियों की गाड़ियां कैंपस में धुआं छोड़ेंगी, तब तक ‘स्कूटी-रिक्शा’ पर बैन का तर्क सिर्फ एक दिखावा ही लगेगा।

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