जनता के टैक्स पर ‘ऐश’ कर रहे बागवानी विभाग के अफसर: न काम, न सहयोग, बस जेब भरने में मशगूल

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लुधियाना | विशेष संवाददाता

शहर के बागवानी विभाग के अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर अब सवालिया निशान खड़े होने लगे हैं। एक तरफ जहां लुधियाना में हरियाली का ग्राफ गिर रहा है, वहीं दूसरी तरफ विभाग के बड़े अधिकारी ‘सफेद हाथी’ साबित हो रहे हैं। आरोप है कि ये अधिकारी दफ्तरों में बैठकर केवल मोटी तनख्वाहें बटोर रहे हैं, जबकि धरातल पर काम शून्य है।

एन.जी.ओ. को दरकिनार, बजट पर कब्ज़ा

शहर की कई समाज सेवी संस्थाओं (NGOs) ने अपनी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा है कि जब वे जनहित में पार्कों या पर्यावरण के लिए कोई प्रोजेक्ट लेकर जाते हैं, तो अधिकारी सहयोग करने के बजाय रोड़े अटकाते हैं। न तो जनता को समय पर उचित पेड़-पौधे उपलब्ध कराए जा रहे हैं और न ही किसी मूल्य-आधारित (Value-based) कार्य को मंजूरी दी जा रही है। सूत्रों की मानें तो अफसरों का पूरा ध्यान सरकारी बजट को ठिकाने लगाने और अपना निजी स्वार्थ सिद्ध करने में लगा है।

मुख्य आरोप:

कामचोरी: जनता के काम लटकाना और फील्ड विजिट के नाम पर गायब रहना।

तानाशाही: निजी संस्थाओं और जागरूक नागरिकों को काम करने से रोकना।

मुफ्त की तनख्वाह: बिना किसी ठोस आउटपुट के सरकारी खजाने पर बोझ बनना।

अब देखना यह होगा कि इन कुर्सियां तोड़ने वाले अफसरों पर कब और क्या कार्रवाई होती है।

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