गोबिंद सागर झील में ‘मौत का सफर’? जय सिद्ध योगी सेवा संघ ने प्रशासन को चेताया

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ओवरलोडेड नावों और बिना लाइफ जैकेट के सफर पर जताया कड़ा रोष; 28 फरवरी 2025 से लगातार दी जा रही है चेतावनी

पंजाब / ऊना ( ब्यूरो चीफ)

गोबिंद सागर झील में श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जय सिद्ध योगी सेवा संघ (रजि.) के अध्यक्ष दिनेश कुमार शर्मा ने मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव और डीजीपी हिमाचल प्रदेश को पत्र लिखकर झील में हो रही नियमों की अनदेखी पर गहरी चिंता व्यक्त की है।

 दिनेश कुमार  शर्मा ने प्रशासन को आगाह करते हुए कहा 

कि यदि समय रहते सुरक्षा इंतजाम पुख्ता नहीं किए गए, तो गोबिंद सागर झील में किसी भी समय बड़ी दुर्घटना घट सकती है।

नियमों की उड़ रही हैं धज्जियाँ:

संघ द्वारा जारी साक्ष्यों के अनुसार, वर्तमान में झील में चलने वाली नावें अपनी क्षमता से 2 गुना अधिक भरी जा रही हैं। इन नावों में न केवल श्रद्धालु ठसाठस भरे हैं, बल्कि नियमों के विरुद्ध उन पर मोटरसाइकिलें भी लादी जा रही हैं। सबसे गंभीर बात यह है कि किसी भी यात्री के पास लाइफ जैकेट उपलब्ध नहीं है, जो मरीन रेगुलेशन और आपदा प्रबंधन नियमों का सीधा उल्लंघन है।

प्रशासनिक अनदेखी पर उठाए सवाल:

दिनेश शर्मा ने बताया कि संस्था 28 फरवरी और 1 मार्च 2025 से लगातार प्रशासन को ईमेल के माध्यम से साक्ष्य भेज रही है, लेकिन अब तक जमीनी स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं दिखी है। उन्होंने कहा, “क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतज़ार कर रहा है? बिना सुरक्षा मानकों के नावों का संचालन स्थानीय विभाग की कार्यप्रणाली पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगाता है।”

24 घंटे का अल्टीमेटम:
संस्था ने प्रशासन से मांग की है कि अगले २४ घंटे के भीतर नावों में लाइफ जैकेट अनिवार्य की जाए और ओवरलोडिंग पर तुरंत रोक लगाई जाए। शर्मा ने स्पष्ट किया कि यदि जनहित में ये कदम नहीं उठाए गए, तो संस्था को मजबूरन माननीय न्यायालय की शरण लेनी पड़ेगी ताकि श्रद्धालुओं के जीवन की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

वृंदावन की हालिया घटनाओं का हवाला देते हुए संघ ने अपील की है कि आम जनता की जान की कीमत समझी जाए और सुरक्षा मानकों को सख्ती से लागू किया जाए।

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