सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: फुटपाथ पर चलना मौलिक अधिकार, गाड़ियों से पहले पैदल वालों का हक

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फुटपाथ न मिलने पर अफसरों से मांग सकेंगे मुआवजा | 5 साल के बच्चे की मौत के केस में ₹11.45 लाख का आदेश

नई दिल्ली, 19 जून:जीत समाचार

सुप्रीम कोर्ट ने सड़क सुरक्षा पर ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए फुटपाथ पर सुरक्षित चलने के अधिकार को नागरिकों का मौलिक अधिकार घोषित कर दिया है। कोर्ट ने साफ कहा कि किसी भी सड़क पर मोटर वाहनों से पहले पैदल चलने वालों का हक है।

फैसले की 3 बड़ी बातें:

मुआवजे का रास्ता खुला: अगर सुरक्षित फुटपाथ न मिलने से किसी का हक मारा जाता है, तो वह संबंधित सरकारी अधिकारियों या एजेंसियों के खिलाफ कोर्ट जाकर मुआवजा और कानूनी राहत मांग सकता है।

पैदल = प्राथमिक: “इंसानी सभ्यता वाहनों के आविष्कार से बहुत पहले से पैदल चल रही है। इसलिए, ‘चलने का अधिकार’ सबसे मूल अधिकार है, जो कार-बाइक के अधिकार से ऊपर है।”

बुनियादी ढांचे पर सख्ती: कोर्ट ने कहा कि बिना फुटपाथ और पेडेस्ट्रियन क्रॉसिंग के हादसे नहीं रुकेंगे। नजरिया बदलना होगा।

किस केस से निकला फैसला:

एक पिता अपने 5 साल के बेटे को स्कूल छोड़ने जा रहे थे। तेज रफ्तार टैंकर ने बच्चे को कुचल दिया। ट्रायल कोर्ट ने ₹7.82 लाख मुआवजा दिया, जिसे दिल्ली हाईकोर्ट ने घटाकर ₹4.70 लाख कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने इसे बढ़ाकर ₹11.45 लाख कर दिया और कहा कि यह सिर्फ एक्सीडेंट नहीं, सिस्टम की नाकामी है।

जजों की टिप्पणी:

जिस जगह हादसा हुआ, वहां न फुटपाथ था, न जेब्रा क्रॉसिंग। पीठ ने कहा- “ऐसे हादसे तब तक नहीं रुकेंगे जब तक सड़कों को सिर्फ गाड़ियों के लिए नहीं, इंसानों के लिए नहीं देखेंगे।”

आपके लिए मतलब:

अगर आपके मोहल्ले में फुटपाथ टूटा है, कब्जा है, या बना ही नहीं है → फोटो-वीडियो सबूत के साथ नगर निगम/MCD को शिकायत दें। काम न हो तो कोर्ट जा सकते हैं। अब मुआवजा क्लेम का हक मिला है

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