लुधियाना नगर निगम फिर विवादों में: भ्रष्टाचार केस में फंसे अफसर को एटीपी जोन-डी का चार्ज, कानून पर उठे सवाल

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विजिलेंस द्वारा फगवाड़ा में पकड़े गए राजकुमार को मिली पब्लिक डीलिंग सीट, कोर्ट केस लंबित होने के बावजूद जिम्मेदारी सौंपने पर उठे सवाल

जीत समाचार | लुधियाना डेस्क
लुधियाना, 23 जून 2026

लुधियाना नगर निगम एक बार फिर विवादों में घिरता नजर आ रहा है। इस बार बिल्डिंग ब्रांच की कार्यप्रणाली ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सूत्रों के अनुसार, विजिलेंस ब्यूरो द्वारा फगवाड़ा में भ्रष्टाचार के मामले में रंगे हाथ पकड़े गए अधिकारी राजकुमार को नगर निगम के जोन-डी (फिरोजपुर रोड) में बतौर एटीपी सजापक्ष नियुक्त कर दिया गया है।

क्या है पूरा मामला ?

1. विजिलेंस की कार्रवाई

सूत्रों के मुताबिक, राजकुमार को कुछ समय पहले विजिलेंस ब्यूरो ने फगवाड़ा में भ्रष्टाचार के मामले में गिरफ्तार किया था। इसके बाद विभागीय कार्रवाई के तहत उन्हें चंडीगढ़ मुख्यालय में अटैच किया गया था। बताया जाता है कि उस समय यह निर्णय लिया गया था कि वे केवल दफ्तरी कार्य करेंगे और किसी प्रकार की पब्लिक डीलिंग नहीं करेंगे।

2. राजनीतिक पहुंच से बदले आदेश ?

आरोप है कि राजकुमार ने अपनी राजनीतिक पकड़ का इस्तेमाल करते हुए अपने आदेशों में बदलाव करवाया और अब उन्हें सीधे जोन-डी फिरोजपुर रोड में ATP सजापक्ष का पूरा चार्ज दे दिया गया है। यह पद सीधे तौर पर जनता से जुड़ा हुआ है और इसमें पब्लिक डीलिंग प्रमुख भूमिका निभाती है।

3. कानून और नियमों पर सवाल

सेवा नियमों और प्रशासनिक प्रक्रिया के अनुसार, यदि किसी अधिकारी के खिलाफ अदालत में मामला लंबित हो, तो उसे सामान्यतः फील्ड या पब्लिक डीलिंग वाले पदों पर तैनात नहीं किया जाता। ऐसे मामलों में गैर-फील्ड या कार्यालयी जिम्मेदारी दी जाती है। ऐसे में यह नियुक्ति कई सवाल खड़े कर रही है।

4. निगम की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

इस पूरे घटनाक्रम से यह सवाल खड़ा हो गया है कि क्या नगर निगम की नियुक्तियां नियमों के आधार पर हो रही हैं या राजनीतिक दबाव के तहत? एक ओर सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति की बात करती है, वहीं दूसरी ओर आरोपों में घिरे अधिकारी को अहम जिम्मेदारी देना चर्चा का विषय बन गया है।

5. उच्च अधिकारियों की भूमिका भी सवालों में

इस फैसले के बाद उच्च अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। आखिर किस आदेश और किस नियम के तहत लंबित कोर्ट केस वाले अधिकारी को यह जिम्मेदारी सौंपी गई?

अब आगे क्या ?

अब सबकी निगाहें नगर निगम कमिश्नर और स्थानीय निकाय विभाग पर टिकी हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इस मामले के सामने आने के बाद राजकुमार को इस पद से हटाया जाएगा या फिर वे अपनी वर्तमान जिम्मेदारी पर बने रहेंगे। आने वाला समय तय करेगा कि नगर निगम में कानून और नियमों का पालन प्राथमिकता है या प्रभावशाली पहुंच।

“Jeet Samachar Daily Hindi Newspaper Ludhiana – RNI PUNHIN/2013/60106. Read today’s e-paper online at zeetsamachar.com”

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