हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: फुटपाथ पर चलना है आपका मौलिक अधिकार! MCL को सख्त आदेश – अवैध कब्जे तुरंत हटाओ

चंडीगढ़/लुधियाना। 10 जुलाई 2026 (दिनेश कुमार शर्मा)

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने लुधियाना की जनता को बड़ी राहत देते हुए एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट कहा है कि फुटपाथों और सार्वजनिक रास्तों पर पैदल चलना प्रत्येक नागरिक का मौलिक अधिकार है और इसे किसी भी परिस्थिति में बाधित नहीं किया जा सकता।

माननीय कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश अश्वनी कुमार मिश्रा तथा न्यायमूर्ति रोहित कपूर की खंडपीठ ने जसबीर सिंह द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए लुधियाना नगर निगम (MCL) को फुटपाथों और सार्वजनिक स्थानों से अवैध कब्जे हटाने तथा पैदल यात्रियों के लिए सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

हाईकोर्ट के प्रमुख निर्देश

1 फुटपाथों और सार्वजनिक रास्तों से अवैध कब्जे तत्काल हटाए जाएं।

2 पैदल यात्रियों के लिए सुरक्षित और बाधारहित आवागमन सुनिश्चित किया जाए।

3 सार्वजनिक स्थानों को अतिक्रमण मुक्त रखना नगर निगम की मूल जिम्मेदारी है और इस दायित्व का प्रभावी ढंग से पालन किया जाए।

मामले की पृष्ठभूमि

याचिकाकर्ता जसबीर सिंह की ओर से अधिवक्ता चंदन सिंह राणा ने अदालत में पैरवी करते हुए सुप्रीम कोर्ट के मामले मुनियार इलियास बनाम पी. अय्यापन का हवाला दिया। उन्होंने तर्क दिया कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत सुरक्षित रूप से फुटपाथ पर चलना नागरिकों के जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का अभिन्न हिस्सा है।

दलीलों से सहमत होते हुए हाईकोर्ट ने नगर निगम आयुक्त, लुधियाना को निर्देश दिए कि याचिकाकर्ता की शिकायतों की तथ्यात्मक जांच कर कानून के अनुसार आवश्यक कार्रवाई की जाए तथा फुटपाथों और सार्वजनिक मार्गों को अतिक्रमण मुक्त कराया जाए।

जीत समाचार की टिप्पणी

जीत समाचार पिछले कई वर्षों से लुधियाना में फुटपाथों पर हो रहे अतिक्रमण का मुद्दा लगातार उठाता रहा है। शहर के कई इलाकों में दुकानों, रेहड़ी-फड़ी और निर्माण सामग्री के कारण पैदल यात्रियों को सड़क पर चलने के लिए मजबूर होना पड़ता है।

अब हाईकोर्ट के स्पष्ट निर्देशों के बाद निगाहें नगर निगम (MCL) की कार्रवाई पर रहेंगी। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या आदेशों का समयबद्ध पालन कर शहर के फुटपाथ वास्तव में अतिक्रमण मुक्त बनाए जाते हैं।

इस फैसले का कानूनी विशेषज्ञों और आम नागरिकों ने स्वागत किया है। वहीं जनहित याचिका में पैरवी करने वाले अधिवक्ता चंदन सिंह राणा के प्रयासों की भी सराहना की जा रही है।

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