जोन-सी बिल्डिंग ब्रांच में बड़ा खेल? | बिना नक्शा पास बिल्डिंगें तैयार, फिर चालान के नाम पर ‘सेटिंग’ का आरोप
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ब्लॉक-16 में कथित बातचीत ने खड़े किए सवाल | हजारों की सेटिंग, लाखों का नुकसान?” | जोन-सी बिल्डिंग ब्रांच पर बड़ा एक्सपोज़

लुधियाना, 17 अगस्त (जीत समाचार ब्यूरो)
नगर निगम लुधियाना की जोन-सी बिल्डिंग ब्रांच एक बार फिर सवालों के घेरे में है। आरोप है कि कुछ स्थानों पर बिना स्वीकृत नक्शे के निर्माण कार्य होने दिया जा रहा है और बाद में कार्रवाई के नाम पर केवल चालान काटकर मामला आगे बढ़ने दिया जाता है। इस पूरे मामले में सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचने की आशंका जताई जा रही है।
ब्लॉक-16 की पुरानी खबर से फिर उठा मामला
‘जीत समाचार’ इससे पहले जोन-सी के ब्लॉक-16 में चल रहे एक निर्माण को लेकर खबर प्रकाशित कर चुका है। आरोप था कि आवश्यक मंजूरी और स्वीकृत नक्शे को लेकर सवालों के बावजूद निर्माण कार्य जारी रहा।
मामले से जुड़ी एक कथित बातचीत में बिल्डिंग इंस्पेक्टर से यह बात सामने आने का दावा किया गया—
“कितने में सेटिंग हो चुकी है, हम आपकी बिल्डिंग को हाथ नहीं लगाएंगे।”यदि इस कथित बातचीत और आरोपों की पुष्टि होती है तो यह नगर निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
चालान कट गया”… लेकिन निर्माण क्यों नहीं रुका?
सूत्रों के अनुसार, कुछ मामलों में खबर सामने आने या शिकायत होने के बाद अधिकारियों की ओर से कहा जाता है कि संबंधित निर्माण का चालान काट दिया गया है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि निर्माण नियमों के विरुद्ध है और चालान काटा गया है, तो उसके बाद भी काम लगातार कैसे जारी रहता है?
क्या चालान कार्रवाई है या अवैध निर्माण को जारी रखने का रास्ता?
आरोप है कि जिन निर्माणों से नियमानुसार भारी फीस, जुर्माना या अन्य सरकारी राजस्व बन सकता है, वहां कथित तौर पर बहुत कम राशि जमा करवाकर मामला निपटाने की कोशिश की जाती है। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक जांच और पुष्टि होना बाकी है।
सबसे बड़ा सवाल—सरकार का राजस्व कहां जा रहा है?
लोगों का आरोप है कि यदि नियमों के अनुसार बनने वाली फीस और शुल्क पूरी तरह वसूले नहीं जा रहे, तो इसका सीधा नुकसान सरकारी खजाने को हो सकता है।एक तरफ बिल्डिंग मालिक को राहत, दूसरी तरफ सरकारी राजस्व को नुकसान—तो फायदा आखिर किसका ?
पत्रकारों के फोन से क्यों बचते हैं अधिकारी ?
‘जीत समाचार’ को मिल रही शिकायतों के अनुसार, कई बार बिल्डिंग ब्रांच के संबंधित अधिकारियों से पक्ष जानने के लिए संपर्क करने पर फोन नहीं उठाया जाता। इससे संदेह और गहरा होता है। सवाल यह है कि यदि सब कुछ नियमानुसार हो रहा है, तो अधिकारी कैमरे और सवालों से दूरी क्यों बना रहे हैं?
गंभीर आरोपों की निष्पक्ष जांच जरूरी
शिकायतकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया है कि कुछ अधिकारियों पर कार्रवाई या निलंबन के बाद भी कथित राजनीतिक प्रभाव के चलते उन्हें फिर प्रभावशाली पदों पर तैनाती मिल जाती है। साथ ही कुछ इमारतों को नियमों के बावजूद कथित रूप से मंजूरी या अन्य लाभ दिए जाने के आरोप भी लगाए गए हैं।इन सभी आरोपों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
जीत समाचार’ के बड़े सवाल
1 क्या ब्लॉक-16 सहित जोन-सी में बिना स्वीकृत नक्शे के निर्माण हुए ?
2 यदि निर्माण नियमों के विरुद्ध था, तो उसे तुरंत रुकवाया क्यों नहीं गया ?
3चालान काट दिया” कहने के बाद भी निर्माण कार्य कैसे चलता रहा?
4क्या सरकार को मिलने वाला पूरा राजस्व वसूला गया?
5कथित “सेटिंग” वाली बातचीत की जांच कौन करेगा?
6क्या संबंधित एटीपी जोन-सी और बिल्डिंग इंस्पेक्टरों की भूमिका की जांच होगी ?
क्या नगर निगम कमिश्नर पूरे जोन-सी की संदिग्ध बिल्डिंगों की विशेष जांच करवाएंगे?
विजिलेंस जांच की मांग
लोगों ने नगर निगम कमिश्नर से मांग की है कि जोन-C में सामने आए अवैध निर्माण और राजस्व से जुड़े मामलों की निष्पक्ष जांच करवाई जाए। आरोप सही पाए जाने पर जिम्मेदार अधिकारियों और अन्य संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाए।
‘जीत समाचार’ के पास मौजूद कथित सबूतों और शिकायतों की पड़ताल जारी है। इस पूरे मामले में आगे भी जो तथ्य सामने आएंगे, उन्हें जनता के सामने रखा जाएगा। अब निगाहें नगर निगम प्रशासन पर हैं—क्या इन गंभीर आरोपों की जांच होगी या फिर मामला फाइलों में ही दबकर रह जाएगा?
