सरकारी डिस्पेंसरी में मुफ्त दवाइयों की कथित कालाबाजारी! ‘नॉट फॉर सेल’ गोलियां बाहर बेचने के आरोप, जांच शुरू
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सोशल मीडिया वीडियो से खुला मामला, आधार कार्ड नंबरों के कथित दुरुपयोग का भी आरोप; एसएमओ ने जांच के लिए कमेटी गठित की
लुधियाना, 21 अगस्त (विक्रम सैनी)
लुधियाना की एक सरकारी डिस्पेंसरी में मरीजों को मुफ्त वितरित की जाने वाली दवाइयों की कथित कालाबाजारी के आरोप सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग में हलचल मच गई है। सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो के आधार पर यह मामला चर्चा में आया है, जिसमें सरकारी सप्लाई की ‘नॉट फॉर सेल’ लिखी गोलियों को कथित तौर पर डिस्पेंसरी से बाहर बेचने के आरोप लगाए गए हैं।शिकायतकर्ता के अनुसार, सरकारी डिस्पेंसरी से मिलने वाली ‘एडनोक’ गोलियां कथित रूप से बाहर पहुंचाई जाती थीं। युवक ने दावा किया कि उसके पास प्रतिदिन करीब 60 से 70 पत्ते पहुंचते थे और वह लंबे समय से इन गोलियों को आगे बेचता रहा।
आधार कार्ड के कथित दुरुपयोग का आरोप
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि कई लोगों के आधार कार्ड नंबरों का इस्तेमाल कर रिकॉर्ड में दवाइयां वितरित दिखा दी जाती थीं, जबकि वही दवाइयां कथित तौर पर बाहर अधिक कीमत पर बेची जाती थीं। उसने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
महंगी गाड़ियां और संपत्ति की भी जांच की मांग
युवक ने कथित अवैध कमाई से महंगी गाड़ियां और संपत्ति बनाए जाने के आरोप लगाते हुए इस पहलू की भी जांच कराने की मांग की है। शिकायतकर्ता का कहना है कि मामला उजागर करने के बाद उसे कथित तौर पर धमकियां भी मिल रही हैं। उसने पुलिस और प्रशासन से सुरक्षा की मांग की है।
एसएमओ बोलीं—जांच कमेटी गठित
संबंधित एसएमओ रमिंदर कौर गिल ने बताया कि शिकायत उनके संज्ञान में है और मामले की जांच के लिए कमेटी गठित कर दी गई है। उन्होंने कहा कि जांच रिपोर्ट आने के बाद तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
बड़ा सवाल—अगर आरोप सही निकले तो जिम्मेदार कौन?
अब जांच के घेरे में यह सवाल है कि यदि सरकारी दवाइयों की कथित कालाबाजारी और आधार कार्ड के दुरुपयोग के आरोप सही पाए जाते हैं, तो इसमें कौन-कौन शामिल था और सरकारी दवा वितरण व्यवस्था में कथित गड़बड़ी इतने लंबे समय तक कैसे चलती रही।
फिलहाल पूरे मामले की सच्चाई जांच रिपोर्ट के बाद ही सामने आएगी और उसके आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।
