लुधियाना की तहसीलों में फिर रजिस्ट्री घोटाले का बड़ा धमाका, 256 लोगों पर एफआईआर दर्ज
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135 कथित फर्जी रजिस्ट्रियों से करोड़ों की स्टांप ड्यूटी चोरी का आरोप | 10 साल की कानूनी लड़ाई के बाद कार्रवाई | पहले दर्ज मामलों में कार्रवाई न होने पर भी उठे सवाल
लुधियाना (विक्रम सैनी)
लुधियाना जिले की तहसीलों में कथित फर्जी रजिस्ट्रियों और स्टांप ड्यूटी चोरी का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। पुलिस ने सब-रजिस्ट्रार पूर्वी की शिकायत पर 256 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। आरोप है कि 135 रजिस्ट्रियों में कथित अनियमितताएं कर सरकारी खजाने को भारी नुकसान पहुंचाया गया।मामले में शहर के कई व्यापारी, कारोबारी, प्रॉपर्टी डीलर और कॉलोनाइजरों के नाम शामिल होने की बात सामने आई है। शिकायतकर्ता और समाजसेवी सुभाष कैटी का दावा है कि वह पिछले करीब 10 वर्षों से इस मामले को लेकर कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं।
कमर्शियल को रिहायशी, मेन रोड को गली दिखाने के आरोप
एफआईआर और शिकायत में आरोप लगाया गया है कि वर्ष 2004 से 2026 के बीच कराई गई कई रजिस्ट्रियों में संपत्तियों की प्रकृति और स्थिति को कथित तौर पर गलत दर्शाया गया। कहीं व्यावसायिक संपत्ति को रिहायशी बताया गया, कहीं मुख्य सड़क की संपत्ति को गली में स्थित दिखाया गया, तो कहीं फैक्ट्री को मकान बताकर रजिस्ट्री कराई गई।आरोप है कि इस तरह संपत्तियों का मूल्यांकन और स्टांप ड्यूटी कम दर्शाकर सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाया गया। हालांकि कथित राजस्व नुकसान की अंतिम राशि जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
तहसील पूर्वी और पश्चिमी की रजिस्ट्रियों पर ज्यादा सवाल
मामले में सबसे अधिक कथित संदिग्ध रजिस्ट्रियां तहसील पूर्वी और पश्चिमी क्षेत्र से जुड़ी होने की बात कही जा रही है। पुलिस अब दर्ज मामले के आधार पर दस्तावेजों, संपत्तियों के वास्तविक स्वरूप, मूल्यांकन और संबंधित रजिस्ट्रियों की जांच करेगी।
10 साल की कानूनी लड़ाई के बाद एफआईआर
सुभाष कैटी के अनुसार, उन्होंने इस कथित घोटाले को लेकर लंबे समय से कानूनी लड़ाई लड़ी। उनका कहना है कि पहले भी बड़ी संख्या में लोगों के खिलाफ नामजद मामले दर्ज हुए थे, लेकिन उन मामलों में आगे की कार्रवाई को लेकर सवाल बने रहे।उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्व में दर्ज मामलों में कई आरोपियों को न तो नोटिस जारी किए गए और न ही गिरफ्तारी हुई। कैटी ने यह भी आरोप लगाया कि मामले में राजस्व विभाग के कुछ अधिकारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। इन आरोपों की स्वतंत्र जांच और पुष्टि होना बाकी है।
256 नामजद, दस्तावेजों की होगी जांच
थाना मोती नगर पुलिस ने शिकायत के आधार पर 256 लोगों को नामजद किया है। इनमें शहर और आसपास के क्षेत्रों के संपत्ति मालिकों तथा अन्य व्यक्तियों के नाम शामिल हैं। अब पुलिस और संबंधित विभाग रजिस्ट्रियों से जुड़े दस्तावेजों की जांच कर यह पता लगाएंगे कि कथित अनियमितताओं में किसकी क्या भूमिका रही।
बड़ा सवाल—पहले के मामलों में कार्रवाई कहां तक पहुंची?
इस नए मामले के बाद सबसे बड़ा सवाल पुराने मामलों को लेकर उठ रहा है। शिकायतकर्ता का कहना है कि पहले भी फर्जी रजिस्ट्रियों के आरोप में बड़ी संख्या में लोगों के खिलाफ मामले दर्ज हुए थे, लेकिन उनकी जांच और कार्रवाई की स्थिति सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं हुई।
अब 256 लोगों पर नई एफआईआर के बाद सवाल है कि क्या इस बार केवल पर्चा दर्ज कर मामला आगे बढ़ेगा या फिर रजिस्ट्रियों की पूरी चेन की जांच कर कथित जिम्मेदार लोगों तक कार्रवाई पहुंचेगी?
फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है। सभी आरोप जांच के अधीन हैं और अंतिम जिम्मेदारी जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही तय होगी।
