खबर लगते ही इंस्पेक्टर जागे—“काम बंद करवा दिया!” अब एप्लीकेशन से बिल्डिंग बचाने का खेल?
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अब एमटीपी – एटीपी जोन सी की असली अग्निपरीक्षा—बिल्डिंग नियमों के मुताबिक रुकेगी या फिर एप्लीकेशन के सहारे दोबारा शुरू होगी?
लुधियाना 31 अगस्त अरुण कुमार
जोन सी में विवादों में घिरी कमर्शियल बिल्डिंग को लेकर जीत समाचार की खबर के बाद बिल्डिंग इंस्पेक्टर हरकत में आए हैं। इंस्पेक्टर का दावा है कि बिल्डिंग का काम बंद करवा दिया गया है। लेकिन इसके साथ ही एक नई एप्लीकेशन सामने आने की बात कही जा रही है, जिसमें बिल्डिंग मालिक ने “जितना पैसा बनेगा, जमा करवा देंगे” कहकर मामले को आगे बढ़ाने की कोशिश की है।
पहले निर्माण चलता रहा, अब काम बंद!
जीत समाचार ने जब इंस्पेक्टर से पूछा कि चालान के बाद आगे क्या कार्रवाई होगी, तो जवाब मिला—“काम बंद करवा दिया है।” सवाल यह है कि अगर निर्माण में नियमों को लेकर पहले से सवाल थे, तो इतनी बड़ी बिल्डिंग बनने तक विभाग की नजर क्यों नहीं पड़ी? निर्माण शुरू होते ही कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
अब असली खेल एप्लीकेशन का?
सिर्फ यह कहना कि “जितना पैसा बनेगा जमा कर देंगे”, क्या बिल्डिंग से जुड़े सभी नियमों की कमी पूरी कर देता है? इसका जवाब नगर निगम के रिकॉर्ड और लागू नियमों की जांच के बाद ही स्पष्ट होगा। पार्किंग कहां है? सड़क की चौड़ाई कितनी है? नक्शे में क्या मंजूर है? चालान क्यों हुआ? कंपाउंडिंग किस आधार पर होगी? इन सभी सवालों का जवाब अब जरूरी है।
एमटीपी और एटीपी जोन सी की भी परीक्षा
अब नजर एमटीपी और एटीपी जोन सी पर है। क्या अधिकारी मौके पर जाकर पूरी बिल्डिंग की जांच करेंगे या मामला फिर “चालान काट दिया और एप्लीकेशन दे दी” तक सीमित रह जाएगा?
जीत समाचार का सवाल साफ है—अगर निर्माण नियमों के खिलाफ था तो पहले क्यों नहीं रोका गया, और अगर नियमों के मुताबिक है तो रिकॉर्ड जनता के सामने क्यों नहीं रखा जाता?
Part-2 जल्द
जोन सी में ऐसी अन्य कमर्शियल बिल्डिंगों को लेकर भी जीत समाचार की पड़ताल जारी है। पार्किंग, सड़क, नक्शा, चालान और कंपाउंडिंग—हर पहलू पर सवाल उठाए जाएंगे।
अब देखना है—काम वास्तव में बंद रहता है या एप्लीकेशन के रास्ते बिल्डिंग फिर शुरू होती है!
जीत समाचार—सच्चाई आपके सामने।
