आखिर ऐसा क्या हुआ कमिश्नर साहब को? रातों-रात सील खोलने के आदेश क्यों देने पड़े!
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15 फुट सड़क पर 5 मंजिला कमर्शियल बिल्डिंग! शाम को सील, रातों-रात खुली—आखिर किसके इशारे पर?
जीत समाचार ने पहले ही जताई थी आशंका—“शाम को सील होगी, रात को खुल जाएगी!” अब वही सवाल हकीकत बनकर सामने
लुधियाना।2 सितंबर2026 (अरुण कुमार)
लुधियाना नगर निगम बिल्डिंग ब्रांच, जोन-A में एक बार फिर कार्रवाई की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में है। जिस कमर्शियल बिल्डिंग को लेकर जीत समाचार ने पहले ही सवाल उठाए थे, वहां घटनाक्रम ने अब उन सवालों को और गंभीर बना दिया है।जीत समाचार ने पहले ही आशंका जताई थी कि बिल्डिंग शाम को सील और रातों-रात सील खुल जाएगी। अब सील खुलने की सूचना सामने आने के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर ऐसा क्या हुआ कि सील लगाने के कुछ ही समय बाद उसे खोलने की नौबत आ गई?
15 फुट सड़क पर 5 मंजिल—नियमों पर बड़ा सवाल
मामला ऐसी कमर्शियल बिल्डिंग का बताया जा रहा है, जो करीब 15 फुट चौड़ी सड़क पर 6 मंजिल तक बनी हुई है और पार्किंग को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।अगर निर्माण नियमों के अनुरूप है तो सवाल नहीं उठना चाहिए। लेकिन अगर निर्माण नियमों के विपरीत है, तो फिर सील लगाने के बाद उसे खोलने की अनुमति किस आधार पर दी गई?
जीत समाचार की खबर पर फिर उठा बड़ा सवाल
जीत समाचार ने पहले ही सवाल उठाया था कि जिस बिल्डिंग पर कार्रवाई हुई पर शाम को लगी सील, रातों-रात खुल गई ?अब सील वास्तव में खोल दी गई है तो सवाल यह है कि आखिर वह कौन-सी मजबूरी थी कमिश्नर कि कार्रवाई के कुछ ही समय बाद पूरा फैसला पलट गया?
गरीब की छोटी इमारत पर हथौड़ा, बड़ी बिल्डिंग पर इतनी नरमी क्यों?
नगर निगम की बिल्डिंग ब्रांच अगर नियमों के मुताबिक कार्रवाई कर रही है तो फिर इस मामले में पूरी प्रक्रिया सार्वजनिक करने में परेशानी क्या है?
15 फुट की सड़क पर 5 मंजिल की इमारत को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब कौन देगा?
अगर निर्माण नियमों के अनुरूप है तो जनता को बताया जाए।
अगर नियमों के विपरीत है तो सील खोलने का फैसला किस आधार पर हुआ?
सील खुली, लेकिन ATP जोन-A खामोश!
रातों-रात सील लगी बिल्डिंग कैसे खुल गई? ATP जोन-A भी जवाब देने से बच रहे—आखिर किसके आदेश पर बदला पूरा फैसला?
सील-बंद से सील-खोल’ तक आखिर कौन चला रहा है सिस्टम?
एक तरफ नगर निगम अवैध निर्माणों पर सख्ती के दावे करता है, दूसरी तरफ अगर उसी कार्रवाई के बाद कुछ घंटों में सील खुलने लगे तो सिस्टम की पारदर्शिता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।जीत समाचार किसी अधिकारी या व्यक्ति को बिना प्रमाण दोषी नहीं ठहरा रहा। लेकिन जनता के पैसे से चलने वाले सिस्टम से सवाल पूछना हमारा अधिकार और जिम्मेदारी है।अगर सब कुछ नियमों के मुताबिक हुआ है तो पूरी प्रक्रिया सामने क्यों नहीं लाई जाती?
कमिश्नर साहब से संपर्क की कोशिश—जवाब का इंतजार
पूरे मामले पर नगर निगम कमिश्नर का पक्ष जानने के लिए फोन और व्हाट्सऐप कॉल के जरिए संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन खबर तैयार होने तक जवाब नहीं मिल सका।
अब सवाल और बड़ा हो गया है—
1 कमिश्नर साहब चुप क्यों?
2 सील खोलने वाला कौन?
3 किसके फोन पर खुली सील?
4 किसके दबाव में बदला फैसला?
अगली कड़ी में बड़ा खुलासा!
सील खोलने का आदेश किस स्तर से आया? फाइल किस अधिकारी के पास गई? और इस पूरे घटनाक्रम में किसकी भूमिका रही—जीत समाचार इन सवालों की पड़ताल जारी रखेगा।
जीत समाचार का बड़ा सवाल: दाल में कुछ काला नहीं, पूरी दाल ही काली है?
क्या अधिकारी किसी दबाव में चुप हैं या फिर पूरे मामले में नियमों को दरकिनार कर फैसला लिया गया? अगर सब कुछ नियमानुसार हुआ है तो सील खोलने का आदेश और उसकी वजह सार्वजनिक करने में आखिर परेशानी क्या है?
