15 फीट की गली में 6 मंजिला कमर्शियल बिल्डिंग पर मेहरबानी | ब्लॉक-32 में चौथी मंजिल पर लेंटर की तैयारी पर ही कार्रवाई, ब्लॉक-25 में छह मंजिल तक निर्माण कैसे?

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जोन-A का गुरविंदर सिंह (लकी) इंस्पेक्टर बना खुद को ATP! वरिष्ठ अधिकारी के आदेश को भी ठेंगा?

लुधियाना 03 सितंबर2026(विक्की कुमार)

नगर निगम बिल्डिंग ब्रांच जोन-A में एक बिल्डिंग इंस्पेक्टर की कार्यप्रणाली लगातार सवालों के घेरे में है। इलाके में ‘लकी इंस्पेक्टर’ के नाम से चर्चित बताए जा रहे इस कर्मचारी पर आरोप है कि वह कथित तौर पर खुद को ATP से भी ऊपर समझते हुए काम करता है और वरिष्ठ अधिकारियों के आदेशों की भी परवाह नहीं करता।

दोहरा कानून? गरीब पर हथौड़ा, रसूखदार पर मेहरबानी !

एक ही जोन में कार्रवाई के कथित अलग-अलग पैमानों ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। ब्लॉक-32 में जैसे ही चौथी मंजिल का लेंटर डालने की तैयारी हुई, निर्माण रुकवाने के लिए कार्रवाई शुरू कर दी गई।वहीं ब्लॉक-25 में करीब 15 फीट की तंग गली में छह मंजिला कमर्शियल बिल्डिंग खड़ी होने तक निर्माण कैसे चलता रहा? नगर निगम की बिल्डिंग ब्रांच को इसका जवाब देना चाहिए।आरोप है कि संबंधित इंस्पेक्टर की कथित राजनीतिक पहुंच के कारण उक्त निर्माण पर समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई

जीत समाचार की खबर के बाद बिल्डिंग सील

जब जीत समाचार ने ब्लॉक-25 की कथित अवैध छह मंजिला बिल्डिंग का मामला प्रमुखता से उठाया, तो जोन-A के ATP ने कार्रवाई करते हुए बिल्डिंग को सील करवा दिया। लेकिन इसके बाद कहानी ने नया मोड़ ले लिया।

एटीपी ज़ोन A ने सील कीबिल्डिंग, फिर रात में किसने खोल दी?

आरोप है कि ATP द्वारा सील की गई बिल्डिंग को बाद में रातों-रात खोल दिया गया। जब ATP जोन-A से इस संबंध में पूछा गया तो उन्होंने बताया कि संबंधित इंस्पेक्टर को बिल्डिंग दोबारा सील करने के आदेश दिए गए हैं।लेकिन सवाल यह है कि आदेश के बावजूद खबर लिखे जाने तक बिल्डिंग दोबारा सील क्यों नहीं हुई?

कोई मेरा कुछ नहीं बिगाड़ सकता!—सूत्रों के हवाले से दावा

सूत्रों के अनुसार, संबंधित इंस्पेक्टर के बारे में यह भी चर्चा है कि वह कथित तौर पर बेखौफ होकर कहता है कोई मेरा कुछ नहीं बिगाड़ सकता, ज्यादा से ज्यादा अधिकारी चार्जशीट ही करेंगे, नौकरी तो बिल्डिंग इंस्पेक्टर की ही करनी है।”यदि यह दावा सही है तो मामला बेहद गंभीर है। यह केवल एक बिल्डिंग का विवाद नहीं, बल्कि नगर निगम के वरिष्ठ अधिकारियों के आदेशों की साख और विभागीय अनुशासन से जुड़ा सवाल बन जाता है।

सील खोलने का अधिकार किसके पास?

सील की गई बिल्डिंग को खोलने के लिए सक्षम प्राधिकारी की अनुमति आवश्यक होती है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि ATP के आदेश के बाद सील आखिर किसके आदेश पर खोली गई?यदि कमिश्नर की अनुमति नहीं थी तो सील खोलने वाले कर्मचारी के खिलाफ क्या कार्रवाई होगी?

कमिश्नर ने कहा—होगी कानूनी कार्रवाई

इस मामले में नगर निगम कमिश्नर से बात की गई तो उन्होंने कहा कि संबंधित कर्मचारी के खिलाफ जल्द कानूनी कार्रवाई की जाएगी।कमिश्नर के अनुसार, दोबारा खोली गई सील के मामले में सरकार को भी लिखा जाएगा और बिल्डिंग को दोबारा सील किया जाएगा।

अब असली परीक्षा कमिश्नर की!

एक तरफ वरिष्ठ अधिकारियों के आदेश, दूसरी तरफ एक बिल्डिंग इंस्पेक्टर पर लगे गंभीर आरोप—अब निगाहें नगर निगम प्रशासन पर हैं।

1 क्या ब्लॉक-25 की छह मंजिला बिल्डिंग की निष्पक्ष जांच होगी?

2 सील किसके आदेश पर खोली गई, इसका खुलासा होगा?

3 और क्या संबंधित इंस्पेक्टर पर वास्तव में कार्रवाई होगी?

सबसे बड़ा सवाल—नगर निगम में चलेगा कमिश्नर का आदेश या ‘लकी इंस्पेक्टर’ की मनमर्जी?

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