मुख्यमंत्री भगवंत मान के ‘फोन उठाओ, समस्या सुलझाओ’ दावे की खुलेआम धज्जियां, लुधियाना नगर निगम अफसरों का जनता-पत्रकारों से ‘फोन ब्लैकआउट’

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लुधियाना, 5 जनवरी: दिनेश कुमार शर्मा

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने बार-बार दावा किया है कि उनके शासन में कोई भी सरकारी अधिकारी या कर्मचारी लोगों की शिकायत सुनने को तैयार रहेगा, उनका फोन उठाएगा और समस्या का तुरंत निवारण करेगा। लेकिन लुधियाना नगर निगम में यह दावा जमीन पर पूरी तरह फेल साबित हो रहा है, जहां न सिर्फ आम नागरिकों बल्कि पत्रकारों के फोन तक अनदेखे कर दिए जाते हैं।
लुधियाना नगर निगम के कमिश्नर अपने मोबाइल पर किसी भी कॉल का जवाब देने से कतरा रहे हैं। हाल ही में जूनियर सहायक लखबीर सिंह की विवादित बहाली के मामले में पत्रकारों ने कमिश्नर से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन न तो फोन उठा और न ही कोई जवाब मिला। यह वही कमिश्नर हैं जिनके नेतृत्व में नगर निगम में विजिलेंस केस झेल चुके कर्मचारी को दोबारा संवेदनशील पद पर बैठाने का फैसला लिया गया।

शहर की मेयर भी इससे बेहतर नहीं।

एक-आध बार बात कर लेने के बाद दोबारा फोन उठाना बंद कर देती हैं। जूनियर सहायक लखबीर सिंह केस और ज़ोन-सी पोस्टर विवाद पर मेयर से स्पष्टीकरण मांगने वाले पत्रकारों के बार-बार प्रयास नाकाम रहे। मेयर का यह रवैया मुख्यमंत्री के उस वादे के सीधे उलट है जिसमें कहा गया था कि अधिकारी जनता के हर सवाल का जवाब देंगे।

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने

अनेक सार्वजनिक सभाओं में यह नारा दिया था – “अधिकारी फोन उठाएंगे, जनता की हर समस्या सुलझेगी”। लेकिन लुधियाना नगर निगम का ताजा मामला इस दावे को खोखला साबित कर रहा है। न तो भ्रष्टाचार के आरोपी जूनियर सहायक लखबीर सिंह की बहाली पर सफाई दी जा रही है, न ही ज़ोन-सी पोस्टर कांड पर कोई प्रतिक्रिया। अफसरों का फोन न उठाना और पत्रकारों को अनदेखा करना साफ बता रहा है कि सिस्टम में जवाबदेही का अभाव है।

पोस्टर प्रदर्शन के दौरान भी निगम अधिकारियों ने न तो मौके पर पहुंचकर लोगों से बात की, न ही गुमनाम प्रदर्शनकारियों के आरोपों का जवाब दिया। सहायक कमिश्नर की फोटो लगाकर भ्रष्टाचार का संरक्षण करने का इल्ज़ाम लगाने वाले पोस्टरों पर भी चुप्पी साधे हुए हैं। आम जनता का कहना है कि जब अफसर पत्रकारों के फोन तक नहीं उठाते, तो उनकी शिकायत कौन सुनेगा ?

लुधियाना के नागरिकों का गुस्सा अब हद पार कर चुका है। उनका कहना है

कि भगवंत मान सरकार ने भ्रष्टाचार हेल्पलाइन नंबर तो जारी कर दिए, मगर निगम अफसर फोन ही नहीं उठाते। जूनियर सहायक लखबीर सिंह को विजिलेंस केस के बाद भी कुर्सी पर बिठाने वाले अधिकारियों पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही। ऐसे में मुख्यमंत्री का “अधिकारी जनता के दरवाजे पर” का वादा केवल जुमला साबित हो रहा है।

लोगों की मांग:नगर निगम कमिश्नर और मेयर जनता-पत्रकारों के सवालों का सार्वजनिक जवाब दें

जूनियर सहायक लखबीर सिंह की बहाली तुरंत रद्द हो भ्रष्टाचार हेल्पलाइन पर दर्ज शिकायतों की मॉनिटरिंग सीएम कार्यालय से हो जो अफसर फोन न उठाएं, उनकी जवाबदेही तय हो लुधियाना नगर निगम का यह मामला पंजाब सरकार के लिए परीक्षा बन गया है। अगर जल्द ही कमिश्नर-मेयर ने खुलकर सामने न आया, तो जनता का भरोसा और पत्रकार बिरादरी का गुस्सा बढ़ना तय है।

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