लुधियाना की रग-रग से वाकिफ IAS नीरू कत्याल गुप्ता को मिली नगर निगम की जिम्मेदारी; क्या खत्म होगा फाइलों का खेल ?
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पंजाब सरकार ने 21 जनवरी, 2026 को एक बड़ा प्रशासनिक फेरबदल करते हुए नीरू कत्याल गुप्ता (IAS 2016) को लुधियाना नगर निगम (MCL) का नया कमिश्नर नियुक्त किया है।
जीत समाचार की लुधियाना की स्पेशल रिपोर्ट
लुधियाना निगम की नई कमान

राज्य सरकार द्वारा जारी आदेशों के अनुसार, नीरू कत्याल गुप्ता अब लुधियाना शहर के नागरिक प्रशासन और विकास कार्यों की जिम्मेदारी संभालेंगी। यह नियुक्ति पंजाब में प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने और शासन को सुव्यवस्थित करने के सरकार के प्रयासों का हिस्सा है।
नीरू कत्याल गुप्ता का पिछला रिकॉर्ड
नीरू कत्याल गुप्ता का प्रशासनिक करियर काफी प्रभावशाली रहा है और वे पहले भी लुधियाना में विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर कार्य कर चुकी हैं: मुख्य प्रशासक, PUDA: इस नियुक्ति से ठीक पहले वे ‘पंजाब शहरी योजना एवं विकास प्राधिकरण’ (PUDA) की मुख्य प्रशासक के रूप में कार्यरत थीं।निदेशक, पर्यटन और सांस्कृतिक मामले: अक्टूबर 2023 में उन्हें पंजाब सरकार के पर्यटन और सांस्कृतिक मामलों के विभाग का निदेशक नियुक्त किया गया था।
अतिरिक्त उपायुक्त (ADC), लुधियाना:
लुधियाना में अतिरिक्त उपायुक्त (सामान्य) और जगराओं की अतिरिक्त उपायुक्त (ADC) के रूप में भी सेवाएँ दे चुकी हैं। कोरोना काल में योगदान: 2020 में ADC जगराओं के पद पर रहते हुए उन्होंने महामारी के दौरान सक्रिय भूमिका निभाई और खुद संक्रमित होने के बाद भी हौसला बनाए रखने के लिए जानी गईं।प्रमोशन: उन्होंने पंजाब सिविल सेवा (PCS) से अपना सफर शुरू किया और 2016 बैच के IAS अधिकारी के रूप में पदोन्नत हुईं।उनकी इस नई नियुक्ति से उम्मीद जताई जा रही है कि लुधियाना नगर निगम के लंबित विकास कार्यों और नागरिक समस्याओं के समाधान में तेजी आएगी।
लुधियाना नगर निगम (MCL) में भ्रष्टाचार एक गंभीर मुद्दा रहा है,
जिसने पिछले कुछ वर्षों में शहर के विकास और प्रशासन की छवि को प्रभावित किया है। नई कमिश्नर नीरू कत्याल गुप्ता के सामने इन चुनौतियों से निपटना एक बड़ी प्राथमिकता होगी।
यहाँ लुधियाना निगम में भ्रष्टाचार और प्रशासनिक खामियों से जुड़े प्रमुख पहलू दिए गए हैं:
1. बिल्डिंग ब्रांच और अवैध निर्माण
नगर निगम की बिल्डिंग ब्रांच सबसे अधिक विवादों में रहती है। अक्सर आरोप लगते हैं कि अधिकारियों की मिलीभगत से शहर में बिना नक्शा पास कराए या नियमों के उल्लंघन के साथ अवैध कमर्शियल इमारतें खड़ी कर दी जाती हैं। इससे निगम को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान होता है।
2. प्रॉपर्टी टैक्स और रिकवरी में हेरफेर
प्रॉपर्टी टैक्स विभाग में अक्सर डेटा के साथ छेड़छाड़ और टैक्स चोरी के मामले सामने आते हैं। कई बार ऐसी शिकायतें मिली हैं कि प्रभावशाली लोगों के टैक्स कम करने के लिए रिकॉर्ड में बदलाव किए गए या उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई।
3. सफाई और कचरा प्रबंधन (Garbage Scams)
शहर की सफाई व्यवस्था और कचरा उठाने के ठेकों में भी अनियमितताओं के आरोप लगते रहे हैं। कूड़ा निस्तारण के लिए दी जाने वाली ग्रांट और मशीनों के रखरखाव में भ्रष्टाचार की वजह से शहर का सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम अक्सर फेल नजर आता है।
4. विजीलेंस जांच और कार्रवाई
अधिकारियों पर गाज: पिछले कुछ वर्षों में पंजाब विजीलेंस ब्यूरो ने लुधियाना निगम के कई अधिकारियों, इंजीनियरों और क्लर्कों को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा है।
5.फर्जी बिलिंग:
विकास कार्यों और सड़कों के निर्माण में घटिया सामग्री का इस्तेमाल और फर्जी बिलिंग (Paper work) के जरिए पैसा निकालने के मामले भी उजागर हुए हैं।
6.नीरू कत्याल गुप्ता के सामने चुनौतियाँ
नीरू कत्याल गुप्ता पहले भी लुधियाना में ADC रह चुकी हैं, वे यहाँ की कार्यप्रणाली से वाकिफ हैं। उनके लिए मुख्य चुनौतियाँ होंगी:
भ्रष्ट अधिकारियों पर नकेल: निगम के भीतर मौजूद “काली भेड़ों” की पहचान करना और उन पर कार्रवाई करना।
7.डिजिटलीकरण:
भ्रष्टाचार कम करने के लिए सेवाओं को पूरी तरह ऑनलाइन और पारदर्शी बनाना।
8.शिकायत निवारण:
आम जनता की शिकायतों के लिए एक सीधा और प्रभावी पोर्टल सुनिश्चित करना ताकि बिचौलियों की भूमिका खत्म हो सके।
