भांगड़ा ट्रेनिंग कैंप का समापन: कुलवंत सिंह सिद्धू बोले— “युवाओं को जड़ों से जोड़ती है लोक कला”
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लुधियाना, 21 जून।यादविंदर सिंह
पंजाब की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित और बढ़ावा देने के उद्देश्य से आयोजित 15 दिवसीय भांगड़ा ट्रेनिंग कैंप का शनिवार को उत्साहपूर्ण माहौल में समापन हो गया। समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में Kulwant Singh Sidhu शामिल हुए। उन्होंने प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन किया और सफल आयोजन के लिए आयोजकों को बधाई दी।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कुलवंत सिंह सिद्धू ने कहा कि लोक कला और लोक संस्कृति किसी भी समाज की पहचान होती है। उन्होंने कहा कि भांगड़ा केवल एक नृत्य नहीं, बल्कि पंजाब की संस्कृति, परंपरा और गौरव का प्रतीक है। उन्होंने युवाओं से अपनी सांस्कृतिक विरासत से जुड़े रहने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा, “इस तरह की कोशिशें युवा पीढ़ी को हमारी जड़ों से जोड़ने में अहम भूमिका निभाती हैं। भांगड़ा सिर्फ डांस नहीं, पंजाब की पहचान है। इसे बचाना और आगे बढ़ाना हम सबकी जिम्मेदारी है। शानदार शो करने के लिए ऑर्गनाइज़र का धन्यवाद।”
15 दिन तक चला प्रशिक्षण शिविर
आयोजकों के अनुसार, 15 दिनों तक चले इस प्रशिक्षण शिविर में 200 से अधिक युवाओं ने भाग लिया। शिविर के दौरान प्रतिभागियों को भांगड़े की विभिन्न शैलियों, ताल, लय और प्रस्तुति की बारीकियों का प्रशिक्षण दिया गया। नेशनल लेवल के अनुभवी भांगड़ा कलाकारों और प्रशिक्षकों ने युवाओं को विशेष मार्गदर्शन प्रदान किया।
इसके अलावा प्रतिभागियों को पंजाब के पारंपरिक लोक वाद्यों जैसे ढोल, तुम्बी और अल्गोजे के इतिहास और महत्व की भी जानकारी दी गई, ताकि वे अपनी सांस्कृतिक जड़ों को बेहतर ढंग से समझ सकें।
रंगारंग प्रस्तुतियों ने बांधा समां
समापन समारोह में प्रशिक्षुओं ने भांगड़े की शानदार प्रस्तुतियां देकर दर्शकों का मन मोह लिया। पारंपरिक वेशभूषा में सजे युवाओं ने जोश, ऊर्जा और तालमेल से भरपूर प्रदर्शन कर खूब वाहवाही बटोरी। कार्यक्रम में मौजूद अभिभावकों और अतिथियों ने भी कलाकारों के प्रदर्शन की सराहना की।
लोक कला संरक्षण और नशामुक्ति पर जोर
आयोजन का मुख्य उद्देश्य पश्चिमी संस्कृति के बढ़ते प्रभाव के बीच पंजाबी लोक कला को जीवित रखना, ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों और युवाओं को अपनी प्रतिभा दिखाने का मंच उपलब्ध कराना तथा उन्हें नशे जैसी सामाजिक बुराइयों से दूर रखकर कला और संस्कृति से जोड़ना रहा।
समारोह के अंत में आयोजकों ने मुख्य अतिथि का सम्मान किया और कार्यक्रम को सफल बनाने में सहयोग देने वाले सभी प्रशिक्षकों, प्रतिभागियों और सहयोगियों का आभार व्यक्त किया। कुलवंत सिंह सिद्धू ने भी इस पहल की सराहना करते हुए भविष्य में ऐसे और कार्यक्रम आयोजित करने की आवश्यकता पर बल दिया।
