नगर निगम जोन-सी भाग-2: चिमनी रोड पर बिल्डिंग ब्रांच का ‘खेल’ जारी
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एटीपी जोन-सी के ‘काम रुकवाया’ वाले बयान के 24 घंटे बाद भी नहीं रुका निर्माण, कमिश्नर के आदेश बेअसर
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चालान काटो-बिल्डिंग बनाओ’ फॉर्मूला हिट, इंस्पेक्टर बोले — ‘ऊपर से फोन आ जाएगा’

जीत समाचार | लुधियाना | 25 जून 2026
रिपोर्ट: विक्की कुमार
जीत समाचार में कल प्रकाशित खबर “चिमनी रोड ब्लॉक-29 में नाजायज कमर्शियल निर्माण” के बाद भी नगर निगम जोन-सी बिल्डिंग ब्रांच की कार्यप्रणाली पर कोई असर दिखाई नहीं दिया। कॉरपोरेशन भाग-2 में हम सामने ला रहे हैं कि कैसे एटीपी जोन-सी के “काम रुकवा दिया गया” वाले दावे के 24 घंटे बाद भी मौके पर निर्माण कार्य धड़ल्ले से जारी है।
ग्राउंड रिपोर्ट: हालात जस के तस
आज सुबह जब जीत समाचार की टीम चिमनी रोड ब्लॉक-29 पहुंची तो स्थिति चौंकाने वाली थी। जहां कल डेढ़ दीवार खड़ी थी, वहीं आज दो नई दीवारें और सामने की दीवार भी खड़ी हो चुकी थी। मौके पर ट्रैक्टर-ट्रॉलियों से ईंटें उतारी जा रही थीं और मजदूर बिना किसी डर के लगातार काम में लगे थे।
व्हाट्सएप पर शिकायत = जीरो एक्शन
कल एटीपी जोन-सी और संबंधित बिल्डिंग इंस्पेक्टर के व्हाट्सएप पर खबर की कटिंग और निर्माण की तस्वीरें भेजी गई थीं। एटीपी जोन-सी ने दावा किया था कि “काम रुकवा दिया गया है”, लेकिन हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। शिकायत के बाद निर्माण रुकने की बजाय और तेज हो गया। इससे साफ है कि जोन-सी बिल्डिंग ब्रांच के कुछ अधिकारी न तो एटीपी जोन-सी की परवाह करते हैं और न ही कमिश्नर के आदेशों की।
‘ऊपर से फोन आ जाएगा’
सूत्रों के मुताबिक जोन-सी में एक नया फॉर्मूला चल रहा है — ‘चालान काटो, बिल्डिंग बनाओ’। इंस्पेक्टर मौके पर सामान जब्त करने या निर्माण रुकवाने की बजाय सिर्फ चालान काटकर अपना फर्ज पूरा मान लेते हैं। जब सख्त कार्रवाई की बात होती है तो जवाब आता है — “चालान दे दिया है, अब ऊपर से फोन आ जाएगा तो हम क्या करें?”

सियासी संरक्षण का खेल
सूत्रों का कहना है कि बिल्डिंग ब्रांच के कुछ अधिकारियों को भरोसा है कि उनके सिर पर राजनीतिक संरक्षण है। इसी कारण वे नियमों और आदेशों को गंभीरता से नहीं लेते।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश भी बेअसर
सुप्रीम कोर्ट स्पष्ट कर चुकी है कि बिना नक्शा पास कराए कोई भी निर्माण कार्य नहीं हो सकता। इस रोड पर कमर्शियल बिल्डिंग बनना नियमों के खिलाफ है। इसके बावजूद ब्लॉक-29 में पहले से कई दुकानें खड़ी हो चुकी हैं और नई दुकानें तेजी से बन रही हैं।
अब सवाल यह है कि क्या नगर निगम कमिश्नर इस पूरे मामले में जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई करेंगे या यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।
कमिश्नर का सख्त बयान
जब इस पूरे मामले पर नगर निगम कमिश्नर से सवाल किया गया तो उन्होंने साफ कहा कि “चालान काटने का मतलब काम रोकना होता है, न कि बिल्डिंग बनाना। कानून के मुताबिक चालान के बाद नक्शा पास होने तक एक ईंट भी नहीं लग सकती।”
कमिश्नर ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि बिल्डिंग ब्रांच का कोई भी अधिकारी इस मामले में दोषी पाया गया तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने जोन-सी के सभी बिल्डिंग इंस्पेक्टरों को चेतावनी देते हुए कहा कि “चालान काट दिया, अभी आदमी भेजता हूं” वाला बहाना अब नहीं चलेगा।
“Jeet Samachar Daily Hindi Newspaper Ludhiana – RNI PUNHIN/2013/60106. Read today’s e-paper online at zeetsamachar.com”
