कागजों पर हुक्म, जमीनी स्तर पर जीरो
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डिस्टेंस टेक्निकल डिप्लोमा पर रोक के बावजूद नगर निगम में चल रहा “सेटिंग” का खेल
चंडीगढ़ / लुधियाना, 14 जुलाई | जीत समाचार
पंजाब सरकार द्वारा डिस्टेंस मोड से प्राप्त टेक्निकल डिप्लोमा को लेकर जारी किए गए स्पष्ट निर्देशों के बावजूद नगर निगम में इन आदेशों की पालना पर सवाल उठने लगे हैं। आरोप है कि सरकारी आदेश केवल फाइलों तक सीमित रह गए हैं, जबकि जमीनी स्तर पर पुराना सिस्टम पहले की तरह जारी है।
31 अगस्त 2023 को पंजाब सरकार ने आदेश संख्या अस6-डमस-अमला-2023/303 जारी करते हुए स्पष्ट किया था कि डिस्टेंस मोड से की गई टेक्निकल डिप्लोमा को मान्यता नहीं दी जाएगी और इसके आधार पर कोई नई पदोन्नति (प्रमोशन) नहीं की जाएगी। इस आदेश पर तत्कालीन सचिव अजोय शर्मा, आई.ए.एस. के हस्ताक्षर हैं।
क्या कहता है सरकारी आदेश?
सरकारी आदेश में यूजीसी (UGC) के फरवरी 2018 के निर्देशों का हवाला दिया गया है, जिसमें कहा गया था कि डिस्टेंस मोड से प्राप्त टेक्निकल डिप्लोमा को वैध नहीं माना जाएगा।
पंजाब सरकार ने यह भी स्पष्ट किया था कि जिन अधिकारियों को पूर्व में ऐसी डिप्लोमाके आधार पर पदोन्नति मिली है, उनके मामलों में न्यायालय से मिले स्थगन आदेश (स्टे) के आधार पर आगे किसी अन्य कर्मचारी को प्रमोशन का लाभ नहीं दिया जाएगा।
यह आदेश राज्य के सभी नगर निगम आयुक्तों, उपायुक्तों तथा नगर सुधार ट्रस्टों को भेजा गया था, ताकि इसकी सख्ती से पालना सुनिश्चित की जा सके।
नगर निगम में क्या हो रहा है?
सूत्रों के अनुसार, आदेश जारी होने के बाद कुछ दिनों तक विभागों में औपचारिक गतिविधियां जरूर देखने को मिलीं। कुछ फाइलें रोकी गईं और नियमों की पालना का दिखावा भी किया गया, लेकिन कुछ समय बाद फिर से पुरानी व्यवस्था बहाल हो गई।
सूत्रों का दावा है कि आज भी ऐसे कई अधिकारी और कर्मचारी फील्ड में कार्यरत हैं, जिनकी योग्यता और पदोन्नति को लेकर सवाल उठते रहे हैं। आरोप यह भी है कि प्रभाव और कथित “सेटिंग” के चलते नियमों को नजरअंदाज किया जा रहा है।
हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है, लेकिन विभागीय कार्यप्रणाली को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं।
सबसे बड़ा सवाल
यदि सरकार ने स्पष्ट आदेश जारी कर दिए हैं, तो उनकी वास्तविक पालना कौन सुनिश्चित करेगा? क्या संबंधित विभागों द्वारा इन आदेशों की समीक्षा की गई? क्या ऐसे मामलों की जांच के लिए कोई समिति बनाई गई? और यदि नियमों का उल्लंघन हुआ है, तो जिम्मेदारी किसकी तय होगी?
जीत समाचार की बात
सरकार द्वारा जारी आदेशों का उद्देश्य प्रशासनिक पारदर्शिता और नियमों की समान पालना सुनिश्चित करना है। लेकिन यदि आदेश केवल कागजों तक सीमित रह जाएं, तो उनकी प्रभावशीलता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
अब आवश्यकता इस बात की है कि संबंधित विभाग इस मामले में स्थिति स्पष्ट करें और यदि कहीं नियमों की अनदेखी हुई है, तो उसकी निष्पक्ष जांच कर उचित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। जनता यह जानना चाहती है कि सरकारी आदेशों की वास्तविक पालना हो रही है या नहीं।
