उच्च अधिकारियों की शिकायत के बाद भी नहीं बिगाड़ सके कर्मचारी का कुछ!
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कर्मचारी अपने उच्च अधिकारियों से भी ज्यादा पावरफुल
लुधियाना, 21 जुलाई | जीत समाचार ब्यूरो
लुधियाना नगर निगम एक बार फिर प्रशासनिक कार्यप्रणाली और कार्रवाई की पारदर्शिता को लेकर चर्चाओं में है। कुछ समय पहले दो बिल्डिंग इंस्पेक्टरों के खिलाफ हुई कार्रवाई अब नए सवाल खड़े कर रही है। सूत्रों के अनुसार, जिन अधिकारियों पर कार्रवाई की गई थी, उनमें से एक का सस्पेंशन आदेश पहले ही रुक गया था, जबकि दूसरे अधिकारी के भी अब दोबारा अपनी सीट पर लौटने की चर्चा है।
क्या है पूरा मामला?
सूत्रों के मुताबिक, कुछ समय पहले दो बिल्डिंग इंस्पेक्टरों के खिलाफ शिकायतें सामने आई थीं, जिसके बाद विभागीय स्तर पर कार्रवाई शुरू की गई।
1 एक अधिकारी के संबंध में चर्चा है कि राजनीतिक सिफारिश के बाद उसका सस्पेंड आदेश लागू नहीं हो सका।
2 दूसरे अधिकारी को सस्पेंड कर ट्रांसफर किए जाने की बात सामने आई थी, लेकिन अब सूत्र दावा कर रहे हैं कि वह भी पुनः अपनी सीट पर लौट आया है।
सस्पेंड होने के महज 4 दिनों के भीतर ही उसने अपना सस्पेंड आदेश रुकवा लिया और बहाली हासिल कर ली।
नगर निगम में चर्चा है कि बहाली के लिए “SIR” का हवाला दिया गया। हालांकि सवाल यह उठ रहे हैं कि जब उच्च अधिकारियों ने सस्पेंड की सिफारिश और कार्रवाई की थी, उस समय संबंधित प्रक्रिया लागू ही नहीं थी।
चंडीगढ़ तक पहुंची चर्चा
सूत्रों के अनुसार, बिल्डिंग इंस्पेक्टर की इतनी जल्दी हुई बहाली को लेकर अब चंडीगढ़ स्तर पर भी चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
प्रशासनिक हलकों में यह सवाल उठाया जा रहा है कि:”जब कार्रवाई की प्रक्रिया में दो महीने लग गए, तो आखिर चार दिनों में ऐसा क्या हुआ कि सस्पेंशन आदेश ही रद्द हो गया?”
इस घटनाक्रम ने विभागीय कार्रवाई की गंभीरता और निष्पक्षता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
निगम के गलियारों में चर्चा
नगर निगम के कर्मचारियों और अधिकारियों के बीच इस पूरे घटनाक्रम को लेकर कई तरह की चर्चाएं चल रही हैं। सबसे बड़ा सवाल यह उठाया जा रहा है कि यदि सस्पेंशन और ट्रांसफर जैसे कदम भी स्थायी प्रभाव नहीं छोड़ पाते, तो भविष्य में विभागीय जांच और जवाबदेही की स्थिति क्या होगी?
इसके साथ ही यह भी चर्चा का विषय बना हुआ है कि जिन अधिकारियों द्वारा कार्रवाई के आदेश जारी किए गए थे, वर्तमान परिस्थितियों में उनकी प्रशासनिक स्थिति क्या है और इससे आगे की प्रक्रिया किस प्रकार प्रभावित होगी।
जीत समाचार की बात
यदि किसी भी विभाग में कार्रवाई और बहाली की प्रक्रिया पारदर्शी नहीं दिखाई देती, तो इससे आम जनता का विश्वास प्रभावित होता है। प्रशासनिक कार्रवाई केवल कागजी औपचारिकता बनकर न रह जाए, इसके लिए जिम्मेदारी तय होना और निष्पक्ष जांच होना आवश्यक है।
यदि भ्रष्टाचार के आरोपों और शिकायतों पर गंभीरता से अंकुश लगाना है, तो केवल सस्पेंशन या ट्रांसफर ही नहीं, बल्कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और उसके परिणामों को सार्वजनिक करना भी उतना ही जरूरी है।
जनता अब यह जानना चाहती है कि नगर निगम में कार्रवाई वास्तव में नियमों के अनुसार हो रही है या फिर सिफारिश और प्रभाव के आधार पर फैसले बदल रहे हैं।
