जोन सी बिल्डिंग ब्रांच का ‘काला कारनामा’? | सील बिल्डिंग राजनीतिक दबाव में पूरी करवाने का आरोप

इंस्पेक्टर और एटीपी जोन सी की भूमिका पर सवाल | शिकायतकर्ता ने ‘जीत समाचार’ को दिए सीलिंग के फोटो और दस्तावेज

लुधियाना, 18 अगस्त (जीत समाचार ब्यूरो)

नगर निगम लुधियाना की जोन सीबिल्डिंग ब्रांच एक बार फिर गंभीर आरोपों के घेरे में है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि जिस बिल्डिंग को कथित नियम उल्लंघन के चलते सील किया गया था, उसे बाद में राजनीतिक दबाव के चलते दोबारा निर्माण कर पूरा करवाने दिया गया।

पूरा मामला क्या है?

1 शिकायतकर्ता ने ‘जीत समाचार’ को सीलिंग से जुड़ी फोटो और अन्य दस्तावेज उपलब्ध कराए हैं।

2 आरोप है कि बिल्डिंग का निर्माण बिना आवश्यक मंजूरी और फीस जमा करवाए किया जा रहा था।

3 शिकायत बिल्डिंग इंस्पेक्टर, ATP और नगर निगम अधिकारियों को दी गई थी।

4 शिकायतकर्ता के अनुसार, तत्कालीन कमिश्नर ने ऊपरी मंजिल पर कार्रवाई के निर्देश दिए थे, जिसके बाद बिल्डिंग को सील किया गया।

फिर कैसे पूरा हुआ निर्माण?

अब शिकायतकर्ता का गंभीर आरोप है कि सीलिंग कार्रवाई के बाद भी राजनीतिक दबाव के चलते निर्माण कार्य दोबारा शुरू हुआ और बिल्डिंग को पूरा कर दिया गया। सवाल यह है कि यदि बिल्डिंग पर कार्रवाई हो चुकी थी, तो फिर सीलिंग के बाद निर्माण किसकी अनुमति से हुआ?

दोहरा कानून?

शिकायतकर्ता का आरोप है कि आम और प्रभावशाली लोगों के मामलों में कार्रवाई का तरीका अलग-अलग दिखाई देता है।सवाल यह है—क्या निगम की कार्रवाई सिर्फ कमजोर लोगों तक सीमित है, जबकि प्रभावशाली लोगों के मामलों में फाइलें और सील दोनों बेअसर हो जाती हैं?

जीत समाचार के बड़े सवाल:

1 सील बिल्डिंग में दोबारा निर्माण किसकी अनुमति से हुआ?

2 तत्कालीन कमिश्नर के निर्देशों पर क्या कार्रवाई हुई?

3 क्या सील तोड़ने की जांच की गई?

4 बिल्डिंग इंस्पेक्टर और ATP ने निर्माण रुकवाने के लिए क्या कदम उठाए ?

सिस्टम में ही गड़बड़ी है ?

यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह केवल किसी एक कर्मचारी का मामला नहीं, बल्कि पूरी शिकायत निवारण व्यवस्था की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल होगा। निष्पक्ष जांच से ही स्पष्ट हो सकेगा कि शिकायतों की फाइलें किस स्तर पर और किसके निर्देश पर संबंधित कर्मचारियों तक भेजी गईं।

जीत समाचार की मांग

शिकायत निवारण व्यवस्था को पूरी तरह पारदर्शी बनाया जाए। गंभीर शिकायतें सीधे सक्षम उच्च अधिकारी या स्वतंत्र जांच एजेंसी तक पहुंचें और जिस कर्मचारी के खिलाफ शिकायत हो, उसे जांच प्रक्रिया को प्रभावित करने का अवसर न मिले।

 

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