इंस्पेक्टर गायब, कार्रवाई ठप! | आखिर जोन-सी में कौन संभाल रहा कानून ? कमिश्नर ने मानी स्टाफ की कमी, जल्द समाधान का भरोसा

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इंस्पेक्टर बोले जोन-सी—“मेरी ड्यूटी ही नहीं” | एटीपी जोन-सी पर जिम्मेदारी के सवाल | एमटीपी फोन नहीं उठाते | राजेश सोनी  लोहा मंडी प्रधान ने भी उठाए गंभीर मुद्दे

लुधियाना, 18 अगस्त (जीत समाचार ब्यूरो)

नगर निगम लुधियाना की बिल्डिंग ब्रांच जोन-सी को लेकर ‘जीत समाचार’ की लगातार खबरों के बाद अब एक बड़ा सवाल सामने आया है—आखिर इलाके में अवैध या संदिग्ध निर्माणों की निगरानी की जिम्मेदारी किसकी है? जोन-सी में लगातार कमर्शियल निर्माण और शिकायतों के बावजूद कार्रवाई न होने के आरोपों के बीच बिल्डिंग इंस्पेक्टर के बयान ने पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

इंस्पेक्टर जोन-सी का बड़ा दावा—“मेरी ड्यूटी ही नहीं

जब ‘जीत समाचार’ ने जोन-सी के बिल्डिंग इंस्पेक्टर से उनकी जिम्मेदारी को लेकर सवाल किया तो उन्होंने कथित तौर पर कहा—मुझे कोई ऑर्डर तक नहीं दिए गए द्वारा वेल्डिंग ब्रांच के पहले सस्पेंड करके मोगा ट्रांसफर कर दिया था। फिर SIR ड्यूटी के कारण ऑर्डर कैंसिल हुए। उसके बाद बिल्डिंग ब्रांच के ऑर्डर नहीं मिले।”अब सवाल यह है कि यदि इंस्पेक्टर के पास स्पष्ट ड्यूटी आदेश ही नहीं हैं, तो जोन-सी में चल रहे निर्माणों की निगरानी कौन कर रहा है?

नो इंस्पेक्टर, तो जिम्मेदार कौन ?

इलाके में कई निर्माणों को लेकर शिकायतें सामने आ रही हैं। राजेश सोनी ने भी सवाल उठाया कि यदि किसी क्षेत्र में इंस्पेक्टर की स्पष्ट ड्यूटी नहीं है, तो निर्माण गतिविधियों की निगरानी और शिकायतों पर कार्रवाई की जिम्मेदारी किस अधिकारी की होगी? उनका कहना है कि ऐसी स्थिति में संबंधित उच्च अधिकारियों को जवाबदेही स्पष्ट करनी चाहिए।

राजेश सोनी लोहा मंडी प्रधान  ने भी उठाया स्टाफ की कमी का मुद्दा

राजेश सोनी लोहा  ने नगर निगम की व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि जोन-सी जैसे बड़े क्षेत्र में सीमित स्टाफ के साथ काम चलना चिंता का विषय है।उनके अनुसार, स्टाफ की कमी से फील्ड निगरानी प्रभावित हो सकती है, सरकारी राजस्व का नुकसान होने की आशंका बढ़ सकती है और शिकायतों के निपटारे में देरी हो सकती है।

फोन नहीं उठाने पर भी सवाल

शिकायतकर्ताओं और ‘जीत समाचार’ की ओर से यह मुद्दा भी उठाया गया कि संबंधित अधिकारियों से कई बार फोन पर संपर्क नहीं हो पाता। खासकर एमटीपी के फोन न उठाने को लेकर सवाल खड़े किए गए हैं।सवाल यह भी है कि अगर अधिकारी फोन ही नहीं उठाएंगे, तो शिकायतकर्ता को कैसे पता चलेगा कि संबंधित बिल्डिंग पर कर्मचारी या बिल्डिंग ब्रांच की ओर से आखिर क्या कार्रवाई की गई है? क्या निरीक्षण हुआ, नोटिस दिया गया, चालान काटा गया या फिर कोई कार्रवाई ही नहीं हुई—इसकी जानकारी आखिर कौन देगा?

बड़ा सवाल—कार्रवाई हुई या सिर्फ कागजों में ?

जब अधिकारी फोन नहीं उठाएंगे और फील्ड में जिम्मेदारी भी स्पष्ट नहीं होगी, तो शिकायतकर्ता अपनी समस्या लेकर जाए कहां? और उससे भी बड़ा सवाल—जिस बिल्डिंग की शिकायत की गई है, उस पर वास्तव में कार्रवाई हुई भी है या नहीं, इसकी सच्चाई जनता तक कैसे पहुंचेगी?

कमिश्नर ने कहा—जल्द निकलेगा समाधान

नगर निगम कमिश्नर से इस संबंध में बात की गई। उनके अनुसार, मामला उनके ध्यान में लाया गया है और जल्द समाधान निकालने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने फोन न उठाने को भी गलत बताते हुए कहा कि यदि किसी कारण कॉल नहीं ली जा सकती तो संबंधित अधिकारी को बाद में वापस कॉल करनी चाहिए।

कमिश्नर ने जोन-सी में स्टाफ की कमी को लेकर भी जल्द समाधान का भरोसा दिलाया।

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