मेयर विदेश गए तो पराशर के हाथ कमान! | क्या नगर निगम की व्यवस्था एक व्यक्ति के भरोसे?
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मेयर बाहर, पराशर अंदर ‘एक्शन मोड’ में! | अब लंबित फाइलें दौड़ेंगी या फिर दफ्तरों में धूल फांकेंगी?
लुधियाना (विक्रम सैनी)
नगर निगम लुधियाना की प्रशासनिक व्यवस्था एक बार फिर चर्चा में है। मेयर इंद्रजीत कौर के निजी विदेश दौरे पर जाते ही सीनियर डिप्टी मेयर राकेश पराशर को कार्यवाहक मेयर की जिम्मेदारी सौंप दी गई है।
निगम के इतिहास में यह तीसरा अवसर बताया जा रहा है, जब मेयर की गैर-मौजूदगी में बाकायदा आदेश जारी कर सीनियर डिप्टी मेयर को कार्यभार सौंपा गया है।
मेयर गए विदेश, निगम की कमान बदली—लेकिन सवाल बरकरार
सबसे बड़ा सवाल यह है कि करोड़ों रुपये के बजट और लाखों लोगों से जुड़े नगर निगम की प्रशासनिक व्यवस्था आखिर कितनी मजबूत है? क्या मेयर के कुछ समय के लिए शहर से बाहर जाने पर अलग से कार्यभार सौंपने की जरूरत प्रशासनिक मजबूती है या फिर व्यवस्था में किसी कमी का संकेत?
मेयर की गैर-मौजूदगी में कार्यभार हस्तांतरण के बाद निगम के नेतृत्व और कामकाज को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
पराशर को मिली दैनिक प्रशासनिक और वित्तीय मंजूरियों की जिम्मेदारी
राकेश पराशर ने 18 अगस्त को जारी पत्र के माध्यम से नगर निगम आयुक्त, पार्षदों और विभागाध्यक्षों को सूचित किया कि नगर निगम अधिनियम 1976 की धारा 40(2) के तहत मेयर की वापसी तक दैनिक प्रशासनिक कार्यों और वित्तीय स्वीकृतियों से जुड़े मामलों का कार्यभार सीनियर डिप्टी मेयर कार्यालय के माध्यम से संभाला जाएगा।
सवाल—मेयर की गैर-मौजूदगी में व्यवस्था क्यों बदलनी पड़ती है?
नगर निगम में पहले भी मेयर की अनुपस्थिति के दौरान प्रवीण बांसल और प्रेम मित्तल कार्यवाहक मेयर की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। लेकिन मौजूदा घटनाक्रम ने फिर सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या निगम में ऐसी स्पष्ट और मजबूत व्यवस्था है, जिससे प्रमुख पदाधिकारी के शहर से बाहर होने पर भी कामकाज बिना किसी असमंजस के चलता रहे?
पराशर बोले—काम नहीं रुकने देंगे
कार्यवाहक मेयर राकेश पराशर का कहना है कि मेयर की गैर-मौजूदगी में विकास कार्यों और जन-सुविधाओं से जुड़ी फाइलों में देरी नहीं होने दी जाएगी। अति-आवश्यक प्रशासनिक फाइलों, वित्तीय मंजूरियों और जरूरी पत्राचार को प्राथमिकता के आधार पर निपटाने की बात कही गई है।
लेकिन असली सवाल—अब जमीन पर कितना काम होगा?
शहर में सड़कें, सफाई, सीवरेज, अवैध निर्माण, यातायात और अन्य नागरिक समस्याओं को लेकर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में अब शहरवासियों की नजर इस बात पर रहेगी कि कार्यवाहक व्यवस्था सिर्फ कागजों और आदेशों तक सीमित रहती है या वास्तव में निगम के कामकाज को रफ्तार मिलती है।
जनता के तीखे सवाल
1 क्या मेयर की गैर-मौजूदगी में ही फाइलें तेजी से चलेंगी?
2 क्या नियमित प्रशासनिक व्यवस्था इतनी मजबूत है कि नेतृत्व बदलने से काम प्रभावित न हो?
3 अगर कार्यवाहक मेयर के पास मंजूरी देने के अधिकार हैं, तो आम दिनों में फाइलों में देरी की शिकायतें क्यों आती हैं?
अब शहर को सिर्फ आश्वासन नहीं, नतीजे चाहिए। मेयर विदेश में हैं और निगम की कमान फिलहाल राकेश पराशर के हाथ में है। आने वाले दिनों में साफ होगा कि यह कार्यवाहक व्यवस्था निगम के कामकाज को नई रफ्तार देती है या फिर सवालों का एक और अध्याय बनकर रह जाती है।
