शिकायतकर्ता का फूटा गुस्सा—“कमिश्नर साहब के सामने खोलूंगा पूरा चिट्ठा!”

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जोन-C में ‘चालान-कंपाउंडिंग’ का खेल? शिकायतकर्ता का आरोप—बिल्डिंग मालिक खुश, कर्मचारी खुश और निगम को करोड़ों का नुकसान!

लुधियाना | 2 सितंबर 2026 |विक्की कुमार

जोन-A के बाद अब नगर निगम जोन-C की बिल्डिंग ब्रांच भी सवालों के घेरे में है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि उसने कथित नाजायज कमर्शियल बिल्डिंगों को लेकर नगर निगम कमिश्नर से शिकायत की, लेकिन जोन-C में कार्रवाई के नाम पर सिर्फ चालान और कंपाउंडिंग का खेल चलता दिखाई दे रहा है।शिकायतकर्ता का कहना है कि कई मामलों में चालान काटने की कार्रवाई तो दिखाई जाती है, लेकिन निर्माण पर प्रभावी रोक और अगली कार्रवाई को लेकर सवाल बने हुए हैं।

चिट्ठा लेकर कमिश्नर के पास जाऊंगा!

शिकायतकर्ता ने जीत समाचार को बताया कि वह जल्द ही कमिश्नर के सामने जोन-C के एटीपी जोन-C और संबंधित बिल्डिंग इंस्पेक्टरों की शिकायतों का पूरा रिकॉर्ड लेकर पेश होगा।उसका दावा है कि शिकायतों की सूची छोटी नहीं है—ब्लॉक-22, ब्लॉक-21, ब्लॉक-16 ,ब्लॉक-37 .ब्लॉक-29 ,ब्लॉक-29 और अन्य इलाकों में भी निर्माण संबंधी शिकायतें दी गई हैं।

सवाल—चालान के बाद कहानी खत्म क्यों?

शिकायतकर्ता का आरोप है कि चालान काटकर मामला आगे बढ़ाने के बजाय कंपाउंडिंग की प्रक्रिया का सहारा लिया जा रहा है। यदि ऐसा है तो सवाल यह है कि इससे नगर निगम को वास्तविक राजस्व कितना मिल रहा है और नियमों के उल्लंघन पर प्रभावी कार्रवाई कितनी हुई?

जीत समाचार का सीधा सवाल

अगर शिकायतें महीनों से पहुंच रही हैं, तो जोन-C में कार्रवाई का हिसाब कौन देगा?चालान हुआ तो आगे क्या हुआ? कंपाउंडिंग हुई तो कितनी फीस निगम के खाते में जमा हुई? और जहां निर्माण नियमों के खिलाफ था, वहां जिम्मेदारी किसकी तय हुई?अब देखना होगा कि कमिश्नर साहब शिकायतकर्ता के ‘चिट्ठे’ पर जांच बैठाते हैं या जोन-C का यह ‘चालान-कंपाउंडिंग फॉर्मूला’ यूं ही चलता रहता है।

शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित अधिकारियों/कर्मचारियों का पक्ष मिलने पर उसे भी प्रकाशित किया जाएगा।

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