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जीत समाचार | ZONE-A EXCLUSIVE

जोन-A में नगर निगम की कार्रवाई पर सवाल | बिल्डिंग मालिक और अधिकारियों की भूमिका जांच के घेरे में

लुधियाना नगर निगम की बिल्डिंग ब्रांच जोन-A एक बार फिर सवालों के घेरे में है। जीत समाचार ने पहले ही आशंका जताई थी कि नगर निगम द्वारा बिल्डिंग सील किए जाने के बावजूद बिल्डिंग मालिक और संबंधित अधिकारियों की कथित मिलीभगत से बाहर का प्लास्टर पूरा कर दिया जाएगा और इसके बाद अंदर का काम भी पूरा करके बिल्डिंग खोल दी जाएगी। अब मौके की स्थिति ने इन आशंकाओं को और गंभीर बना दिया है।नगर निगम की ओर से सील की गई बिल्डिंग पर बाहर का प्लास्टर पूरा हो चुका है। इससे सवाल उठता है कि सीलिंग के बाद बिल्डिंग में काम कैसे हुआ और इसकी निगरानी कौन कर रहा था?

नियमों के अनुसार किसी बिल्डिंग को सील किए जाने के बाद उसमें किसी भी प्रकार का निर्माण, प्लास्टर, रंग-पेंट या अन्य काम नहीं किया जा सकता। इसके बावजूद जीत समाचार ने मौके पर अंदर काम चलने और रात के समय भी निर्माण गतिविधियां जारी रहने की बात सामने रखी थी।

पहले ही बताया गया था कि प्लास्टर करवाकर इस बिल्डिंग को पुरानी इमारत जैसा दिखाने की कोशिश की जा सकती है। अब बाहर का प्लास्टर पूरा होने के बाद यह सवाल और गंभीर हो गया है कि क्या सील केवल कागजों में हुई थी या मौके पर भी इसका पालन करवाया गया?

इस मामले में संबंधित बिल्डिंग इंस्पेक्टर से बातचीत की गई। इंस्पेक्टर ने कहा कि उन्होंने बाहर से चली और बांस उतरवा दिए हैं।

इस पर सवाल उठता है कि यदि प्लास्टर का काम पूरा हो चुका है तो बांस उतरवाने की कार्रवाई अब क्यों की गई? क्या निगम अधिकारियों को पहले से पता नहीं था कि सील की गई बिल्डिंग पर काम चल रहा है? यदि पता था तो काम रुकवाने और जिम्मेदार लोगों पर तत्काल कार्रवाई क्यों नहीं की गई?

बातचीत के दौरान इंस्पेक्टर ने कहा कि यह गलत है और वह बिल्डिंग मालिक के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करते हुए पूरी रिपोर्ट लिखकर कमिश्नर को देंगे। उन्होंने यह भी कहा कि निगम द्वारा सील किए जाने के बाद बिल्डिंग में काम कैसे किया गया, इसकी जानकारी उच्च अधिकारियों को दी जाएगी।

अब देखना होगा कि यह कार्रवाई केवल बयान तक सीमित रहती है या वास्तव में बिल्डिंग मालिक, ठेकेदार और जिम्मेदार अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ मामला दर्ज होता है।

मामला केवल सील तोड़कर काम करने तक सीमित नहीं है। आरोप है कि बिल्डिंग का निर्माण बिना स्वीकृत नक्शे के किया गया है। ऐसे में यह भी जांच का विषय है कि क्या इस निर्माण के लिए कंपोजिशन फीस या अन्य सरकारी शुल्क जमा किया गया है।

यदि नक्शा पास नहीं था और निर्माण नियमों के विपरीत किया गया, तो इतनी बड़ी बिल्डिंग बनने तक नगर निगम की बिल्डिंग ब्रांच क्या कर रही थी? क्या निर्माण शुरू होने से लेकर सीलिंग तक विभागीय अधिकारियों को इसकी जानकारी नहीं थी?

सूत्रों के हवाले से चर्चा है कि इस बिल्डिंग की पहले ही कथित सेटिंग हो चुकी थी। यह भी कहा जा रहा है कि इतनी बड़ी बिल्डिंग बिना राजनीतिक प्रभाव या किसी बड़े संरक्षण के बनना आसान नहीं है।

हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी बाकी है, लेकिन यदि सीलिंग के बावजूद निर्माण कार्य जारी रहा और बाहर का प्लास्टर पूरा हो गया, तो नगर निगम के वरिष्ठ अधिकारियों और एमटीपी विभाग की भूमिका की निष्पक्ष जांच जरूरी है।

अब सवाल यह है कि नगर निगम कमिश्नर और एमटीपी विभाग इस मामले में क्या कार्रवाई करते हैं।

क्या बिल्डिंग मालिक के खिलाफ कानूनी कार्रवाई होगी?
क्या सीलिंग के बाद काम करवाने वालों पर एफआईआर दर्ज होगी?
क्या संबंधित बिल्डिंग इंस्पेक्टर और निगरानी अधिकारियों की जिम्मेदारी तय होगी?
क्या बिना नक्शे के निर्माण और कंपोजिशन फीस की जांच होगी?
क्या बिल्डिंग को दोबारा सील करके आगे का काम पूरी तरह रोका जाएगा?

सील के बावजूद प्लास्टर पूरा होना नगर निगम की निगरानी व्यवस्था पर बड़ा सवाल है। यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो यह संदेश जाएगा कि सीलिंग के बाद भी प्रभावशाली बिल्डिंग मालिक निर्माण जारी रख सकते हैं।

जीत समाचार ने अभी एक बिल्डिंग का मामला सामने रखा है। आने वाले समय में ऐसी अन्य इमारतों और कथित अनियमितताओं की भी पड़ताल की जाएगी।

सब गोलमाल है जी, गोलमाल है—लेकिन धीरे-धीरे हर मामले की सच्चाई सामने लाई जाएगी।

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