ब्लॉक-29 में गरीबों पर चला ‘पीला पंजा’, 18 फुट रोड वाली कमर्शियल बिल्डिंग पर मेहरबानी क्यों?

बिजली की तारों से करीब 4 इंच के करीब की दूरी पर बन रही बिल्डिंग ने उठाए बड़े सवाल — जीत समाचार के पास पहुंचे दस्तावेज और मौके के सबूत

लुधियाना | 14 सितंबर, 2026 / जीत समाचार की विशेष रिपोर्ट

लुधियाना नगर निगम की बिल्डिंग ब्रांच एक बार फिर सवालों के घेरे में है। ब्लॉक-29 में गरीब लोगों की इमारतों पर कार्रवाई के बाद अब सवाल उठ रहा है कि क्या नगर निगम का कानून अमीर और गरीब के लिए अलग-अलग है?जीत समाचार के सामने एक ऐसी निर्माणाधीन बिल्डिंग का मामला आया है, जो कथित तौर पर 18 फुट रोड पर कमर्शियल निर्माण के रूप में तैयार हो रही है। मौके पर यह भी सवाल खड़ा हो रहा है कि बिल्डिंग बिजली की तारों के बेहद करीब कैसे तैयार हो रही है। स्थानीय स्तर पर दावा है कि तारों और निर्माण के बीच दूरी करीब 4 इंच के करीब के आसपास है। ऐसे में सुरक्षा नियमों और नगर निगम की अनुमति को लेकर जांच जरूरी हो जाती है।

इंस्पेक्टर बदले, लेकिन पुरानी बिल्डिंगों का जिम्मेदार कौन?

इस क्षेत्र में पहले बिल्डिंग इंस्पेक्टर कमलधीर की तैनाती बताई जाती है। अब उनका तबादला जोन-डी में हो चुका है। इस दौरान इलाके में बनी या निर्माणाधीन कथित अनधिकृत इमारतों को लेकर सवाल उठ रहे हैं।सबसे बड़ा सवाल यही है—अगर किसी बिल्डिंग में नियमों का उल्लंघन हुआ है, तो अधिकारी बदलने के बाद उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी?जीत समाचार के पास ऐसी कई इमारतों से संबंधित जानकारी और मौके के सबूत होने का दावा है, जिनकी जांच कराकर जल्द ही रिकॉर्ड जनता के सामने रखा जाएगा।

गरीबों पर कार्रवाई तेज, फिर इस बिल्डिंग पर ‘पीला पंजा’ क्यों नहीं?

नगर निगम द्वारा गरीब लोगों की इमारतों पर कार्रवाई किए जाने के बाद अब जनता पूछ रही है कि यदि किसी बड़े या व्यावसायिक निर्माण में भी नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो वहां भी एक समान कार्रवाई क्यों नहीं की जाती?बताया गया है कि संबंधित बिल्डिंग का चालान काटे जाने की बात कही गई है। लेकिन सवाल यह है कि अगर चालान पर्याप्त कार्रवाई है तो गरीबों के मामलों में सीधे तोड़फोड़ की कार्रवाई क्यों दिखाई देती है?कानून सबके लिए एक है तो कार्रवाई भी एक जैसी क्यों नहीं?

अब निगाहें नगर निगम कमिश्नर पर हैं। सवाल यह है कि—

1 क्या इस बिल्डिंग की अनुमति और नक्शे की जांच होगी?

2 क्या निर्माण की वैधता की जांच की जाएगी?

3 बिजली की तारों से दूरी के सुरक्षा मानकों की जांच होगी?

4 यदि निर्माण अवैध पाया जाता है तो क्या कार्रवाई होगी?

5  पहले से बनी कथित अनधिकृत इमारतों की जिम्मेदारी किस अधिकारी की तय होगी?

6 क्या गरीब और बड़े बिल्डिंग मालिकों के लिए कार्रवाई का पैमाना समान रखा जाएगा?

जीत समाचार इस मामले में किसी व्यक्ति को दोषी घोषित नहीं कर रहा, बल्कि नगर निगम के संबंधित अधिकारियों से जवाब और निष्पक्ष जांच की मांग कर रहा है।

जीत समाचार का अगला खुलासा जल्द

इस मामले से जुड़े रिकॉर्ड, मौके के सबूत और अन्य कथित अनधिकृत निर्माणों की जानकारी जीत समाचार द्वारा जुटाई जा रही है। दस्तावेजों की पुष्टि के बाद इन्हें जनता के सामने रखा जाएगा।

अब देखना होगा—नगर निगम कमिश्नर इस मामले में जांच के आदेश देते हैं या नहीं, और अगर निर्माण नियमों के खिलाफ पाया जाता है तो ‘पीला पंजा’ किस पर चलता है?

सबसे बड़ा सवाल: गरीब पर कार्रवाई और बड़े निर्माण पर सिर्फ चालान—क्या यही है नगर निगम का कानून?

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