करंट चार्ज का खेल या आदेशों की अनदेखी? D-Zone में ही क्यों उठ रहे सवाल !
शिकायत उसी अधिकारी/शाखा तक पहुंची, जिसके कामकाज को लेकर उठाए गए थे सवाल—फाइल एक टेबल से दूसरी टेबल घूमती रही!
जीत समाचार | लुधियाना | 15 सितंबर 2026 यादविंदर
नगर निगम लुधियाना की बिल्डिंग ब्रांच, D-Zone में करंट ड्यूटी चार्ज को लेकर एक शिकायत ने प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जीत समाचार के पास इस मामले से जुड़े विभिन्न आदेश और शिकायत की पूरी टाइमलाइन उपलब्ध होने का दावा है, जिनकी जांच के आधार पर कई सवाल सामने आते हैं।
17 अगस्त को शिकायत पहुंची… फिर शुरू हुआ ‘फाइल पासिंग गेम’?
जानकारी के मुताबिक नगर निगम कमिश्नर को Gmail के माध्यम से शिकायत भेजी गई। इसके बाद शिकायत 1100 पोर्टल के माध्यम से भी दर्ज की गई।बताया गया कि 17 अगस्त 2026 को शिकायत तरुण गोयल, सुपरिंटेंडेंट, नगर निगम लुधियाना के पास पहुंची। इसके बाद मामला असिस्टेंट टाउन प्लानर रणधीर सिंह के पास भेजे जाने की बात सामने आई।लेकिन इसके बाद शिकायत जिस दिशा में गई, उसने शिकायतकर्ता के सामने नया सवाल खड़ा कर दिया।
जिसके खिलाफ सवाल, उसी से जवाब ?
जीत समाचार को मिली जानकारी के अनुसार, रणधीर सिंह की ओर से शिकायत भारत मलिक, हेड ड्राफ्ट्समैन को भेजी गई।इसके बाद फाइल रविंद्र सिंह, ड्राफ्ट्समैन के पास गई और फिर वापस भारत मलिक के पास भेजे जाने की बात सामने आई।अब सबसे बड़ा सवाल यही है—अगर शिकायत करंट ड्यूटी चार्ज की व्यवस्था को लेकर है, तो क्या उसी व्यवस्था से जुड़े अधिकारियों के पास शिकायत भेजना निष्पक्ष जांच माना जा सकता है?
करंट ड्यूटी का मुद्दा… और जवाब भी करंट ड्यूटी वाले दे रहे हैं?
शिकायत में जिस करंट ड्यूटी चार्ज की व्यवस्था पर सवाल उठाया गया है, उसी से संबंधित अधिकारियों/व्यवस्था के भीतर शिकायत के घूमने से पारदर्शिता को लेकर सवाल पैदा हो रहे हैं।शिकायतकर्ता का कहना है कि सरकार की ओर से जारी आदेशों की भावना के अनुसार यदि किसी व्यवस्था पर सवाल उठाया गया है, तो उसकी जांच स्वतंत्र एवं सक्षम अधिकारी से होनी चाहिए।
फाइल इधर से उधर… जिम्मेदारी किसकी?
एक अधिकारी से दूसरे अधिकारी तक फाइल भेजने की प्रक्रिया के बीच मूल सवाल वहीं खड़ा है—
1 क्या शिकायत पर स्वतंत्र जांच हुई?
2 क्या संबंधित आदेशों की कानूनी स्थिति जांची गई?
3 क्या करंट ड्यूटी चार्ज देने की वर्तमान व्यवस्था सरकार के आदेशों के अनुरूप है?
जीत समाचार के पास हैं दस्तावेज!
इस मामले में करंट ड्यूटी चार्ज से संबंधित सरकारी/विभागीय आदेशों की प्रतियां जीत समाचार के पास उपलब्ध होने का दावा है।
इन आदेशों में क्या लिखा है, किन पदों पर करंट चार्ज को लेकर निर्देश दिए गए हैं और D-Zone में वर्तमान व्यवस्था उन आदेशों के अनुरूप है या नहीं—इसका दस्तावेजी विश्लेषण अगली रिपोर्ट में सामने रखा जाएगा।
जीत समाचार के 5 बड़े सवाल
1️⃣ D-Zone में करंट ड्यूटी चार्ज की व्यवस्था किस आदेश के तहत चल रही है?
2️⃣ क्या पुराने आदेशों के आधार पर आज भी करंट चार्ज जारी रखा जा सकता है?
3️⃣ शिकायत जिस व्यवस्था के खिलाफ है, उसी व्यवस्था से जुड़े अधिकारियों के पास जवाब मांगने का फैसला किसने लिया?
4️⃣ शिकायत पर स्वतंत्र जांच क्यों नहीं करवाई गई?
5️⃣ अगर सरकार के आदेश मौजूद हैं, तो नगर निगम उनकी अनुपालना सुनिश्चित क्यों नहीं कर रहा?
अब गेंद नगर निगम कमिश्नर के पाले में!
अब देखना यह है कि नगर निगम कमिश्नर इस मामले में सिर्फ फाइल आगे बढ़ाते हैं या पूरे मामले की स्वतंत्र जांच करवाकर करंट ड्यूटी चार्ज की वैधता और जिम्मेदारी स्पष्ट करते हैं।जीत समाचार किसी अधिकारी को बिना जांच दोषी नहीं ठहरा रहा। सवाल सिर्फ इतना है—सरकारी आदेश अगर स्पष्ट हैं, तो उनका पालन कौन करवाएगा?
नगर निगम कमिश्नर का भी लिया गया पक्ष
जीत समाचार ने इस पूरे मामले को लेकर नगर निगम कमिश्नर साहब से भी उनका पक्ष जानने के लिए बातचीत की। कमिश्नर साहब ने मामले पर अपना पक्ष रखते हुए कहा कि शिकायत और संबंधित दस्तावेजों को देखा जाएगा तथा नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।अब देखने वाली बात यह होगी कि कमिश्नर साहब के निर्देशों के बाद D-Zone में करंट ड्यूटी चार्ज को लेकर उठे सवालों पर क्या कार्रवाई होती है और जिम्मेदारी किसकी तय होती है।

