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ब्लॉक-18 में बेसमेंट से तीसरी मंजिल तक निर्माण, कंपाउंडिंग फीस जमा होने का रिकॉर्ड नहीं होने का आरोप; सिर्फ चालान का खेल?

हेड ड्राफ्ट्समैन को बिल्डिंग इंस्पेक्टर का चार्ज, फिर भी अपने इलाके की बिल्डिंग की जानकारी नहीं! पीसीएस अधिकारी बोले—जांच होगी, दोषी मिला तो कार्रवाई करेंगे

लुधियाना। 27 अक्टूबर 2026 विक्की /कुमार

लुधियाना नगर निगम की बिल्डिंग ब्रांच में नियमों की पालना और सरकारी खजाने को होने वाली संभावित राजस्व हानि को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो रहे हैं। पहले जोन-C की बिल्डिंग ब्रांच को लेकर उठाए गए सवालों के बाद अब जोन-D के ब्लॉक -18 में बन रही एक बिल्डिंग का मामला सामने आया है। आरोप है कि इस बिल्डिंग में बेसमेंट से लेकर तीसरी मंजिल तक लिंटर डाला जा चुका है, लेकिन कंपाउंडिंग फीस जमा होने और बिल्डिंग के स्वीकृत नक्शे से संबंधित स्थिति स्पष्ट नहीं है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या नगर निगम की कार्रवाई सिर्फ चालान काटने तक ही सीमित रह गई है?

 चालान हुआ, फिर निर्माण कैसे बढ़ता गया?

मामले के अनुसार, ब्लॉक-18, जोन-D में निर्माणाधीन बिल्डिंग को लेकर यह आरोप लगाया जा रहा है कि आवश्यक फीस और नक्शे की स्थिति स्पष्ट हुए बिना ही निर्माण आगे बढ़ता रहा। यदि चालान काटा गया था, तो उसके बाद निर्माण रोकने, नियमों के अनुसार कार्रवाई करने और बिल्डिंग की स्थिति की जांच करने के लिए क्या कदम उठाए गए? यह जांच का विषय है।

सवाल सीधा है—अगर किसी बिल्डिंग का चालान काट दिया जाता है, तो क्या इससे आगे निर्माण करने की छूट मिल जाती है? नियमानुसार चालान की कार्रवाई अपने आप में भवन निर्माण की मंजूरी नहीं होती। बिल्डिंग की वैधता, स्वीकृत नक्शे, लागू नियमों और फीस की स्थिति की अलग से जांच जरूरी है।

 एटीपी बोले—इंस्पेक्टर को पता है, कार्रवाई करेंगे

जब इस मामले को लेकर संबंधित एटीपी से बात की गई, तो उन्होंने बताया कि बिल्डिंग का चालान किया गया है और संबंधित इंस्पेक्टर को इसके बारे में जानकारी है। उन्होंने यह भी कहा कि मामला उनके ध्यान में लाया गया है और इस पर कार्रवाई की जाएगी।अब सवाल यह है कि यदि चालान पहले ही किया जा चुका था, तो उसके बाद बेसमेंट से तीसरी मंजिल तक निर्माण कैसे पहुंच गया? क्या मौके पर दोबारा निरीक्षण किया गया? क्या निर्माण रोकने के लिए कोई आदेश जारी हुआ? और क्या कंपाउंडिंग फीस या अन्य आवश्यक शुल्क जमा करवाए गए? इन सवालों के जवाब सामने आना अभी बाकी हैं।

 हेड ड्राफ्ट्समैन को इंस्पेक्टर का चार्ज, अपने इलाके की बिल्डिंग की जानकारी नहीं!

इस मामले में सबसे चौंकाने वाला पहलू उस कर्मचारी का जवाब है, जिसे बिल्डिंग इंस्पेक्टर का करंट ड्यूटी चार्ज दिया गया है।जब बिल्डिंग ब्रांच के हेड ड्राफ्ट्समैन से इस निर्माण के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कथित तौर पर कहा कि यह बिल्डिंग उनके ध्यान में नहीं है। बाद में जब उन्हें बताया गया कि संबंधित एटीपी से इस बारे में बात हो चुकी है, तो उन्होंने भी चालान होने की बात स्वीकार की।ऐसे में सवाल उठता है कि जिस कर्मचारी को बिल्डिंग इंस्पेक्टर की जिम्मेदारी सौंपी गई है, क्या उसे अपने क्षेत्र में चल रहे निर्माण कार्यों की नियमित जानकारी नहीं होनी चाहिए? यदि निर्माण बेसमेंट से तीसरी मंजिल तक पहुंच गया, तो इसकी निगरानी किसकी जिम्मेदारी थी?

यह मामला केवल एक बिल्डिंग तक सीमित नहीं है। यह नगर निगम की निगरानी व्यवस्था, अधिकारियों की जवाबदेही और निर्माण संबंधी नियमों के पालन पर भी सवाल खड़े करता है।

 सरकारी खजाने को राजस्व का नुकसान होने की आशंका

यदि किसी निर्माण के लिए नियमानुसार नक्शा मंजूर करवाना, कंपाउंडिंग फीस या अन्य निर्धारित शुल्क जमा करना जरूरी है, तो संबंधित रिकॉर्ड की जांच से ही स्पष्ट होगा कि नगर निगम को कितना राजस्व मिलना चाहिए था और वास्तव में कितना जमा हुआ।यदि नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित पक्षों की भूमिका की जांच होनी चाहिए। हालांकि, बिना आधिकारिक रिकॉर्ड और जांच के किसी कर्मचारी को राजस्व नुकसान या भ्रष्टाचार के लिए दोषी ठहराना उचित नहीं होगा।

पर्दे में रहने दो, पर्दा न उठाना…!

इस पूरे मामले पर एक गाना याद आता है—“पर्दे में रहने दो, पर्दा न उठाना।”

जोन-D की इस बिल्डिंग को लेकर भी अब यही सवाल उठ रहा है कि आखिर निर्माण की वास्तविक स्थिति, चालान की कार्रवाई और फीस से संबंधित रिकॉर्ड सामने कब आएंगे? यदि सब कुछ नियमानुसार हुआ है, तो संबंधित विभाग को दस्तावेजों के साथ स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। और यदि नियमों का उल्लंघन हुआ है, तो कार्रवाई में देरी क्यों?

 पीसीएस अधिकारी का बयान—चालान काटने का मतलब काम पूरा करना नहीं!

जब इस मामले को बिल्डिंग ब्रांच के पीसीएस अधिकारी के ध्यान में लाया गया, तो उन्होंने कहा कि इस तरह निर्माण होना बिल्कुल गलत है। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल चालान काट देने का अर्थ यह नहीं है कि कार्रवाई पूरी हो गई।

अधिकारी के अनुसार, मामले की जांच करवाई जाएगी और पता लगाया जाएगा कि चालान होने के बावजूद बिल्डिंग में इतनी मंजिलों तक निर्माण कैसे हुआ। यदि जांच में कोई कर्मचारी दोषी पाया जाता है, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी और सरकार को भी लिखकर भेजा जाएगा।

 अब नए नगर निगम कमिश्नर की कार्रवाई पर निगाहें

जोन-D की इस बिल्डिंग को लेकर अब निगाहें नगर निगम के नए कमिश्नर अंकुर महिंद्रू पर टिकी हैं। क्या संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय होगी? क्या बिल्डिंग के नक्शे, चालान, कंपाउंडिंग फीस और मौके पर हुए निर्माण की निष्पक्ष जांच करवाई जाएगी? क्या जांच के बाद दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होगी?

इन सवालों का जवाब आने वाले दिनों में सामने आ सकता है।

अब देखना यह है कि नगर निगम प्रशासन इस मामले में सिर्फ जांच के आश्वासन तक सीमित रहता है या वास्तव में रिकॉर्ड की जांच करके जिम्मेदारी तय करता है।

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