रिश्वत के मामले में FIR और जेल जा चुका ATP फिर नगर निगम में तैनात?”—CM विंडो पर पहुंची शिकायत ने मचाई हलचल!

शिकायतकर्ता का दावा—फगवाड़ा में रिश्वत मामले में कार्रवाई के बावजूद लुधियाना नगर निगम की बिल्डिंग ब्रांच में दी गई जिम्मेदारी; मुख्यमंत्री से ATP को हटाने की मांग

लुधियाना | 13 सितंबर 2026 | विक्की कुमार

लुधियाना नगर निगम की बिल्डिंग ब्रांच एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। इस बार मामला किसी निर्माणाधीन बिल्डिंग का नहीं, बल्कि एक ATP की तैनाती को लेकर उठे गंभीर सवालों का है।जीत समाचार के पास उपलब्ध एक शिकायत की प्रति के अनुसार, शिकायतकर्ता ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को शिकायत भेजकर आरोप लगाया है कि लुधियाना नगर निगम में तैनात एक ATP के खिलाफ पहले रिश्वतखोरी से जुड़ा मामला दर्ज हुआ था और वह जेल भी जा चुका है।

शिकायतकर्ता ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि उक्त अधिकारी को लुधियाना नगर निगम से हटाया जाए और पूरे मामले की जांच करवाई जाए।

CM विंडो तक पहुंची शिकायत—अब सवाल सीधे सरकार से!

1 उपलब्ध दस्तावेज के अनुसार शिकायत CM Window पर भी दर्ज करवाई गई है। शिकायत पर 13 अगस्त 2026 की तारीख दर्ज है।

2 शिकायत में पंजाब के मुख्यमंत्री को संबोधित करते हुए संबंधित ATP की लुधियाना में तैनाती पर सवाल उठाए गए हैं।

3   शिकायतकर्ता का आरोप है कि संबंधित अधिकारी के खिलाफ पहले फगवाड़ा में रिश्वत लेने के आरोप में मामला दर्ज हुआ था और वह जेल जाकर आया है।

 लेकिन बड़ा सवाल यह है—अगर ये आरोप सरकारी रिकॉर्ड में सही पाए जाते हैं, तो फिर लुधियाना नगर निगम में तैनाती कैसे हुई?

  शिकायत में क्या-क्या आरोप लगाए गए?

1 शिकायतकर्ता ने दावा किया है कि संबंधित ATP को लगभग 5-6 महीने पहले फगवाड़ा में रिश्वत के मामले में पकड़ा गया था।

2 शिकायत ने यह भी आरोप लगाया गया है कि उसके खिलाफ परचा दर्ज हुआ और वह जेल में रहकर आया।

3 इसके बाद भी उसके लुधियाना नगर निगम में तैनात होने को लेकर शिकायतकर्ता ने सवाल उठाए हैं।

यही नहीं, शिकायतकर्ता ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि मामले की गंभीरता से जांच करते हुए संबंधित अधिकारी को लुधियाना से हटाया जाए।

एक तरफ कार्रवाई, दूसरी तरफ सरकारी तैनाती?”

यही सवाल अब इस शिकायत के सामने आने के बाद सबसे ज्यादा चर्चा में है।अगर किसी अधिकारी के खिलाफ वास्तव में कोई आपराधिक मामला दर्ज हुआ था, तो—क्या विभाग ने उसका रिकॉर्ड जांचा था? क्या उसकी वर्तमान तैनाती से पहले कोई विभागीय जांच हुई?क्या नगर निगम के उच्च अधिकारियों को इस मामले की जानकारी थी?और अगर जानकारी थी तो—फिर लुधियाना नगर निगम की बिल्डिंग ब्रांच में तैनाती का आधार क्या रहा?इन सवालों के जवाब अब नगर निगम प्रशासन और संबंधित विभाग से मांगे जाने चाहिए।

मुख्यमंत्री से लेकर कमिश्नर तक पहुंची शिकायत

शिकायत की प्रतियां केवल मुख्यमंत्री कार्यालय तक सीमित नहीं रखी गईं। दस्तावेज के अनुसार इसकी प्रतियां राज्यपाल पंजाब, स्थानीय निकाय मंत्री, स्थानीय निकाय विभाग के सचिव तथा नगर निगम कमिश्नर को भी भेजी गई हैं।यानी मामला अब सीधे सरकारी स्तर पर जांच के दायरे में आने की मांग कर रहा है।

अब कमिश्नर साहब के सामने भी बड़ा सवाल

नगर निगम की बिल्डिंग ब्रांच पहले ही निर्माण संबंधी शिकायतों को लेकर चर्चा में रही है। ऐसे समय में किसी अधिकारी की तैनाती को लेकर इस तरह की शिकायत सामने आना प्रशासन के लिए गंभीर विषय है।

अब देखना होगा कि नगर निगम कमिश्नर—

क्या संबंधित अधिकारी का रिकॉर्ड मंगवाते हैं?

क्या फगवाड़ा मामले की सच्चाई की पुष्टि करवाते हैं?

क्या पुलिस रिकॉर्ड और विभागीय रिकॉर्ड का मिलान होता है?

और जांच पूरी होने तक तैनाती को लेकर कोई प्रशासनिक फैसला लिया जाता है या नहीं?

 जीत समाचार का सीधा सवाल

अगर शिकायत में लगाए गए आरोप रिकॉर्ड से सही साबित होते हैं, तो ऐसे अधिकारी की संवेदनशील बिल्डिंग ब्रांच में तैनाती पर जवाबदेही किसकी बनती है?”

अब गेंद नगर निगम प्रशासन और पंजाब सरकार के पाले में है।

शिकायतकर्ता ने अपना पक्ष सरकार के सामने रख दिया है। अब इंतजार इस बात का है कि सरकारी रिकॉर्ड क्या कहता है और संबंधित अधिकारी इस शिकायत पर क्या जवाब देते हैं।

 जीत समाचार की लड़ाई

“शिकायत गंभीर है तो जांच भी गंभीर होनी चाहिए!”

जीत समाचार की नजर अब शिकायत से आगे—सरकारी कार्रवाई पर है।

नोट: इस खबर में रिश्वत/मामले से जुड़े आरोप शिकायत में लगाए गए दावों के रूप में प्रकाशित किए जा रहे हैं। इन्हें न्यायिक रूप से सिद्ध तथ्य नहीं माना जा रहा। संबंधित ATP/नगर निगम प्रशासन का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

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