F&CC बैठक में पार्षद गौरव भट्टी ने खोला प्रस्तावों का ‘हिसाब-किताब’, करोड़ों के खर्चों पर उठाए सवाल

डुप्लीकेट एस्टीमेट से लेकर 1100 करोड़ के सॉलिड वेस्ट प्रोजेक्ट तक घेरा | कई प्रस्ताव पेंडिंग, निगम के पैसे की बचत और जवाबदेही की मांग

 लुधियाना | 14 सितंबर 2026 विक्की कुमार

नगर निगम की F&CC बैठक उस समय चर्चा में आ गई, जब वार्ड नंबर 26 के पार्षद गौरव भट्टी ने विभिन्न विकास कार्यों और वित्तीय प्रस्तावों पर एक के बाद एक सवाल खड़े कर दिए। भट्टी ने साफ कहा कि विकास कार्यों का विरोध नहीं है, लेकिन नगर निगम के खजाने पर पड़ने वाले हर अतिरिक्त बोझ का हिसाब होना चाहिए।

बैठक में सबसे पहले HIG कॉलोनी, लवली स्वीट के पास टाइलों के काम का मामला उठाया गया। गौरव भट्टी के अनुसार इसी स्थान के लिए GLADA की ओर से करीब 19 लाख रुपये की टाइलों के काम की Administrative Approval के लिए प्रस्ताव भेजा जा चुका है। इसके बावजूद नगर निगम द्वारा उसी स्थान के लिए करीब 21 लाख रुपये का दूसरा एस्टीमेट तैयार किए जाने पर उन्होंने सवाल उठाया। उन्होंने संबंधित अधिकारियों और SE प्रवीण सिंगला की जिम्मेदारी तय करने की मांग की।

सिंगल टेंडर भी सवालों के घेरे में

CCTV कैमरों के काम के लिए करीब 5.76 लाख रुपये के सिंगल टेंडर का मुद्दा भी बैठक में उठा। भट्टी ने मांग की कि इस मामले में पंजाब ट्रांसपेरेंसी एक्ट के नियमों की पूरी पालना सुनिश्चित की जाए।

6.91 करोड़ की बचत या अतिरिक्त वित्तीय बोझ?

फॉगिंग प्रोजेक्ट पर भी पार्षद ने सवाल उठाए। उनका कहना था कि प्रस्ताव में करीब 6.91 करोड़ रुपये की राशि को बचत के तौर पर दिखाया जा रहा है, लेकिन निगम के पक्के कर्मचारियों और पहले से मौजूद मशीनरी का खर्च तो जारी रहेगा। ऐसे में प्रोजेक्ट का वास्तविक वित्तीय प्रभाव दोबारा जांचा जाना चाहिए।

भट्टी ने स्पष्ट कहा कि नगर निगम को एक करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान पहुंचाने वाला प्रोजेक्ट मंजूर नहीं होना चाहिए।

15 लाख का अतिरिक्त खर्च—“ठेकेदार की समस्या निगम क्यों भुगते?”

प्रस्ताव नंबर 36 में P1 की जगह NP3 पाइप डालने के लिए करीब 15 लाख रुपये अतिरिक्त मांगने पर भी उन्होंने कड़ा ऐतराज जताया। उनका कहना था कि बाजार में पाइप उपलब्ध नहीं होना ठेकेदार की समस्या है, इसका अतिरिक्त बोझ नगर निगम पर नहीं डाला जा सकता। प्रस्ताव पेंडिंग कर दिया गया।

31 लाख से 46 लाख पहुंचा एस्टीमेट

प्रस्ताव नंबर 57 में 2023 के काम का एस्टीमेट करीब 31 लाख से बढ़ाकर 46 लाख रुपये किए जाने पर भी सवाल उठे। भट्टी ने मौके की जांच और एस्टीमेट रिवाइज करने के कारणों की पूरी रिपोर्ट मांगने की बात कही।

15 फीट से 25 फीट सड़क—माप लेने वाले अधिकारी की जिम्मेदारी तय हो

प्रस्ताव नंबर 59 में सग्गू चौक रोड का एस्टीमेट पहले 15 फीट चौड़ाई के हिसाब से और बाद में 25 फीट चौड़ाई के आधार पर रिवाइज किए जाने पर गौरव भट्टी ने सवाल उठाया।उन्होंने कहा कि पहले माप लेने वाले अधिकारी की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। प्रस्ताव पेंडिंग कर दिया गया।

LED लाइटों के 3650 अतिरिक्त घंटे पर भी सवाल

प्रस्ताव नंबर 118 में टाटा कंपनी की LED स्मार्ट स्ट्रीट लाइटों के 3650 अतिरिक्त घंटों की पेमेंट की मांग पर भट्टी ने कहा कि पहले CCMS रिकॉर्ड से पता लगाया जाए कि शहर में लाइटें कितने समय तक बंद रहीं।उनका कहना था कि बंद रहने की अवधि की राशि पहले काटी जाए और उसके बाद ही अतिरिक्त घंटों की पेमेंट पर फैसला हो।

2.62 लाख के वाटर कूलर—निगम के फंड से भुगतान पर ऐतराज

प्रस्ताव नंबर 220 में हलका नॉर्थ में पंजाब निर्माण कार्यक्रम के तहत लगाए गए करीब 2.62 लाख रुपये के वाटर कूलरों की पेमेंट नगर निगम के फंड से करने पर भी उन्होंने सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि अगर संबंधित फंड नहीं आया है तो निगम के खजाने से भुगतान नहीं किया जाना चाहिए। प्रस्ताव पेंडिंग कर दिया गया।

1100 करोड़ के सॉलिड वेस्ट प्रोजेक्ट पर भी उठी आवाज

करीब 1100 करोड़ रुपये के सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्रोजेक्ट पर भी गौरव भट्टी ने सहमति नहीं जताई। उन्होंने कहा कि डोर-टू-डोर कलेक्शन से हजारों परिवारों की रोजी-रोटी जुड़ी हुई है। इसलिए पहले संबंधित यूनियनों के साथ बैठक कर उनकी राय ली जानी चाहिए और उसके बाद ही आगे का फैसला हो।

“पहले काउंसलर कोटे के फंड सुरक्षित हों”

जनरल कोटे में बड़ी संख्या में विकास कार्य आने पर भट्टी ने मेयर और अधिकारियों से सवाल किया कि यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि एक MLA जनरल कोटे में अधिकतम कितने विकास कार्य करवा सकता है, ताकि काउंसलर कोटे के काम प्रभावित न हों।

उन्होंने DCFA से कहा कि पहले काउंसलर कोटे और निगम के जरूरी कार्यों के लिए फंड सुरक्षित किए जाएं। यदि इसके बाद फंड बचता है तो जनरल कोटे के विकास कार्य किए जाएं।

गौरव भट्टी बोले—“विरोध विकास का नहीं, फिजूलखर्ची का है

पार्षद गौरव भट्टी ने कहा कि “नगर निगम का खजाना जनता का पैसा है। मेरा विरोध विकास के खिलाफ नहीं, बल्कि गैर-जरूरी खर्च, वित्तीय नुकसान और बिना पूरी जांच के किए जाने वाले खर्चों के खिलाफ है। हर रुपये की जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित होनी चाहिए।”

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