आरटीए दफ्तर में ‘ऑर्डर’ का खेल? सरकारी हुक्म के बाद भी कैसे बदल गए आदेश!
लुधियाना।दिनेश कुमार शर्मा.
आरटीए दफ्तर से जुड़े एक मामले में जीत समाचार के हाथ लगी दस्तावेजी कॉपी ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। सूत्रों के मुताबिक, एक अधिकारी से संबंधित सरकारी आदेश जारी होने के बावजूद बाद में आदेशों को लेकर ऐसी स्थिति सामने आई, जिसने पूरे मामले को सवालों के घेरे में ला खड़ा किया है।
सबसे बड़ा सवाल—जब ऊपर से आदेश आया था तो उसे बदलने या कैंसिल करने का अधिकार किसके पास था? क्या किसी अधिकारी ने अपने स्तर पर ऐसा फैसला लिया? अगर लिया, तो किस नियम और किस सक्षम प्राधिकारी के आदेश के तहत?
मामला यहीं खत्म नहीं होता। आरोप है कि संबंधित कर्मचारी को पब्लिक डीलिंग से दूर रखने/अन्य व्यवस्था के बावजूद पब्लिक डीलिंग का काम कराया गया। अब सवाल उठ रहा है कि आखिर सरकारी आदेशों की पालना हुई या फिर आदेशों को ही दरकिनार कर दिया गया?
‘मुंह मीठा’ करवाकर आदेशों की कॉपी कराने से लेकर आदेश बदलने तक—पूरा मामला जल्द होगा बेनकाब!
जीत समाचार के हाथ लगी दस्तावेजी कॉपी की जांच की जा रही है। जल्द ही संबंधित अधिकारी/कर्मचारी का नाम, आदेशों की तारीख और दस्तावेज सामने रखकर बताया जाएगा कि आखिर आरटीए दफ्तर में यह पूरा खेल कैसे और किसके आदेश पर हुआ?
जीत समाचार का बड़ा खुलासा जल्द
सरकारी आदेशों की अनदेखी हुई या नहीं, किसने आदेश जारी किया और किसने उसे बदलने/रद्द करने की कार्रवाई की—इन सभी सवालों के जवाब दस्तावेजों के आधार पर सामने लाए जाएंगे।
भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने का दावा करने वाला जीत समाचार इस मामले में भी रिकॉर्ड के साथ आगे बढ़ेगा। इसे एक मसालेदार कार्टून जहां पोस्टर बनाएं कर के मुताबिक जो ऑप्शनों की भी आंखों की नींद खुले

