जोन-C में ‘सील’ के बाद खेल का आरोप!
सील लगी बिल्डिंग कुछ समय बाद खुलने का दावा, निगम के राजस्व पर उठे सवाल
‘जीत समाचार’ की पड़ताल में सामने आया मामला—रिकॉर्ड में क्या जमा हुआ और मौके पर क्या हुआ, जांच का विषय
लुधियाना, 30 सितंबर।विक्की कुमार
नगर निगम लुधियाना की बिल्डिंग ब्रांच में अवैध निर्माणों पर कार्रवाई और सीलिंग को लेकर एक नया मामला चर्चा में है। जोन-C की एक कमर्शियल बिल्डिंग को पहले सील किए जाने और बाद में कथित तौर पर सील हटाए जाने को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
शिकायत और उपलब्ध जानकारी के अनुसार, संबंधित बिल्डिंग के निर्माण को लेकर नक्शे, चालान/कंपाउंडिंग फीस तथा सीलिंग की कार्रवाई से जुड़े रिकॉर्ड की जांच की जरूरत है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि संबंधित मामले में नगर निगम का कितना राजस्व निर्धारित हुआ, कितना जमा हुआ और सील हटाने के लिए विभागीय स्तर पर कोई आधिकारिक आदेश जारी हुआ था या नहीं।
सील लगी तो खुली कैसे ?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर किसी निर्माण पर नगर निगम ने नियमों के तहत सील लगाई थी तो बाद में उसे खोलने की अनुमति किस स्तर पर दी गई? क्या संबंधित फीस निगम के खाते में जमा हुई? क्या भवन को स्वीकृत नक्शे के अनुसार नियमित किया गया? या फिर बिना पूरी प्रक्रिया के सील हटाई गई?
नगर निगम की आधिकारिक वेबसाइट पर बिल्डिंग चालान सर्च और रिपोर्ट की सुविधा उपलब्ध है। ऐसे में इस मामले में रिकॉर्ड और मौके की स्थिति का मिलान महत्वपूर्ण हो जाता है।
राजनीतिक दखल की भी चर्चा
मामले में सूत्रों की ओर से कथित राजनीतिक हस्तक्षेप की बात भी कही जा रही है। चर्चा है कि नगर निगम की राजनीति में प्रभाव रखने वाले कुछ लोग अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर बिल्डिंग ब्रांच के मामलों में दखल देते हैं।
यदि यह आरोप सही साबित होता है तो सवाल और गंभीर हो जाता है कि क्या राजनीतिक सिफारिश के सामने नगर निगम के नियम कमजोर पड़ जाते हैं?
हालांकि, संबंधित राजनीतिक व्यक्ति की पहचान, भूमिका अथवा किसी अधिकारी को दिए गए कथित निर्देशों की स्वतंत्र पुष्टि अभी बाकी है।
पहले भी उठ चुके हैं निगम में राजनीतिक हस्तक्षेप के सवाल
नगर निगम में राजनीतिक हस्तक्षेप को लेकर पहले भी अलग-अलग मामलों में आरोप सामने आते रहे हैं। ठेकेदारों और निगम कर्मचारियों से जुड़े विवाद भी समय-समय पर चर्चा में रहे हैं। ऐसे में जोन-C की इस बिल्डिंग का मामला भी अब जांच के घेरे में आता दिखाई दे रहा है।
सरकारी खजाने के नुकसान का दावा—लेकिन आंकड़े सामने आना बाकी
सूत्रों के हवाले से सरकारी राजस्व को नुकसान होने की बात कही जा रही है, लेकिन करोड़ों रुपये के नुकसान का दावा अभी दस्तावेजी तौर पर साबित होना बाकी है। इसलिए इस मामले में वास्तविक नुकसान कितना हुआ, यह निगम के रिकॉर्ड, निर्धारित शुल्क और जमा राशि की जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।
गौरतलब है कि हाल के दिनों में जोन-C की बिल्डिंग ब्रांच से संबंधित मामलों में वरिष्ठ अधिकारियों ने अनधिकृत निर्माण, चालान, सीलिंग और रिकवरी का रिकॉर्ड तलब किया था। वहीं 30 सितंबर 2026 को प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, बिल्डिंग ब्रांच के तीन अधिकारियों के खिलाफ कथित लापरवाही और संभावित राजस्व नुकसान को लेकर विभागीय कार्रवाई की सिफारिश किए जाने की बात सामने आई है।
‘घर की बात घर में’ रखने का खेल तो नहीं?
‘जीत समाचार’ को मिली जानकारी के अनुसार मामले की कड़ियां धीरे-धीरे जोड़ने की कोशिश की जा रही है। दस्तावेज, सीलिंग रिकॉर्ड, फीस जमा होने की स्थिति और मौके की तस्वीरों का मिलान किया जा रहा है।
अगर रिकॉर्ड और मौके की स्थिति में अंतर सामने आता है, तो यह मामला केवल एक बिल्डिंग तक सीमित नहीं रहेगा।
अब कमिश्नर के सामने तीन बड़े सवाल
1. संबंधित बिल्डिंग पर सील किस आदेश के तहत लगाई गई थी?
2. सील हटाने का आदेश किसने और कब जारी किया?
3. निर्धारित कंपाउंडिंग/चालान राशि निगम के खाते में जमा हुई या नहीं?
अगर रिकॉर्ड में राशि बकाया है और इसके बावजूद सील हटाई गई, तो मामला गंभीर प्रशासनिक जांच का विषय बन सकता है। दूसरी ओर, यदि सभी शुल्क जमा हैं और सील हटाने की विधिवत अनुमति मौजूद है, तो रिकॉर्ड के आधार पर स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
‘जीत समाचार’ इस मामले से जुड़े दस्तावेजों और रिकॉर्ड की पड़ताल जारी रखेगा।
सवाल सीधा है—सील लगाना आसान है, लेकिन अगर सील खुली तो सरकारी रिकॉर्ड में उसका हिसाब कहां है?

