कोर्ट के आदेशों के बावजूद ‘करंट ड्यूटी चार्ज’ जारी? नगर निगम लुधियाना पर उठे गंभीर सवाल
सरकारी आदेश की कॉपी ‘जीत समाचार’ के हाथ लगी, फिर भी व्यवस्था में बदलाव क्यों नहीं?
लुधियाना।01 अक्टूबर2026/ विकी कुमार
नगर निगम लुधियाना में ‘करंट ड्यूटी चार्ज’ को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जीत समाचार के हाथ लगे सरकारी आदेश की प्रति में करंट ड्यूटी चार्ज को लेकर निर्देश जारी किए गए हैं, लेकिन इसके बावजूद नगर निगम में ऐसे चार्ज जारी रहने के आरोप सामने आ रहे हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब सरकार की ओर से इस व्यवस्था को लेकर स्पष्ट निर्देश जारी किए जा चुके हैं, तो फिर नगर निगम स्तर पर इनका पालन किस आधार पर हो रहा है? क्या संबंधित अधिकारियों तक सरकारी आदेश की जानकारी नहीं पहुंची या फिर आदेशों की व्याख्या अपने हिसाब से की जा रही है?
नगर निगम प्रशासन अक्सर भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस और नियमों के पालन की बात करता है। ऐसे में करंट ड्यूटी चार्ज को लेकर सामने आए दस्तावेज और आरोप प्रशासन के सामने कई सवाल खड़े करते हैं।
‘जवाब किस बात का, कार्रवाई किस पर?’
जीत समाचार पहले भी नगर निगम में करंट ड्यूटी चार्ज की व्यवस्था को लेकर सवाल उठा चुका है। अब सवाल यह भी है कि यदि सरकारी स्तर पर इस व्यवस्था को हटाने के निर्देश जारी हो चुके हैं, तो क्या नगर निगम की सभी शाखाओं में इसकी समीक्षा की गई है?
क्या केवल बिल्डिंग ब्रांच ही नहीं, बल्कि नगर निगम की अन्य शाखाओं में भी अधिकारी करंट ड्यूटी चार्ज पर जिम्मेदारियां संभाल रहे हैं? यदि ऐसा है तो इसकी पूरी सूची सार्वजनिक कर स्थिति स्पष्ट क्यों नहीं की जाती?
कमिश्नर कार्यालय की जानकारी में है मामला?
सूत्रों के अनुसार इस मामले से संबंधित ई-मेल और पत्राचार उच्च अधिकारियों तक पहुंचने की बात कही जा रही है। ऐसे में अब निगाहें नगर निगम कमिश्नर की कार्रवाई पर टिक गई हैं।
यदि आदेशों की जानकारी प्रशासन को है, तो फिर उनके अनुपालन में देरी क्यों? और यदि जानकारी नहीं है, तो यह प्रशासनिक स्तर पर और भी गंभीर सवाल है।
अब देखना यह होगा कि जीत समाचार में मामला सामने आने के बाद नगर निगम कमिश्नर इस पूरे प्रकरण की जांच करवाते हैं या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाता है।
सरकारी आदेशों का पालन कागजों पर होगा या जमीन पर—इसका जवाब अब नगर निगम प्रशासन को देना होगा।
अगर आप सरकारी आदेश की कॉपी/फोटो भेज दें, तो मैं उसमें लिखे आदेश नंबर, तारीख और वास्तविक शब्दों के आधार पर इसे और ज्यादा मजबूत, दस्तावेज़-आधारित एक्सक्लूसिव खबर बना दूंगा।

