जीत समाचार | ZONE-D EXCLUSIVE रिहायशी नक्शे की आड़ में कमर्शियल निर्माण? बिल्डिंग ब्रांच की कथित मिलीभगत पर सवाल

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जॉइंट कमिश्नर, एटीपी और इंस्पेक्टर को शिकायत के बावजूद काम नहीं रुका | अधिकारियों के दावों के उलट निर्माण तेज होने का आरोप

लुधियाना, 6 सितंबर 2026 | विक्की कुमार

लुधियाना शहर में अवैध निर्माणों पर कार्रवाई को लेकर नगर निगम की बिल्डिंग ब्रांच एक बार फिर सवालों के घेरे में है। बड़ी हैबोवाल, ज्वाला सिंह चौक के नजदीक ब्लॉक-32 में रिहायशी नक्शे की आड़ में कथित तौर पर कमर्शियल निर्माण किए जाने का मामला सामने आया है।आरोप है कि संबंधित निर्माण को लेकर जॉइंट कमिश्नर, एटीपी और बिल्डिंग इंस्पेक्टर को शिकायत और सूचना दिए जाने के बावजूद मौके पर काम पूरी तरह नहीं रुका। इसके उलट स्थानीय लोगों के अनुसार निर्माण कार्य तेजी से आगे बढ़ता दिखाई दे रहा है।

अधिकारियों के दावे और मौके की स्थिति में अंतर?

मामले से जुड़े लोगों का कहना है कि जब संबंधित एटीपी ZONE D और इंस्पेक्टर से निर्माण को लेकर सवाल किया गया तो उनका जवाब रहा कि काम रुकवा दिया गया है।लेकिन यदि मौके पर निर्माण गतिविधियां जारी हैं तो सवाल उठता है कि आखिर काम वास्तव में बंद हुआ था या केवल कागजों में कार्रवाई दिखाई गई?सूत्रों का दावा है कि निगम का एक कर्मचारी भी बिल्डिंग मालिक से कई बार संपर्क कर चुका है। इसके बावजूद निर्माण जारी रहने की बात सामने आ रही है।

शनिवार-रविवार को लैंटर डालने का आरोप

स्थानीय स्तर पर एक और गंभीर आरोप सामने आया है। सूत्रों का कहना है कि कुछ निर्माणकर्ता शनिवार और रविवार जैसे छुट्टी वाले दिनों में लैंटर डालने का प्रयास करते हैं, क्योंकि इन दिनों अधिकारियों की मौजूदगी सीमित रहती है।यदि यह आरोप सही है तो सवाल यह है कि क्या छुट्टी वाले दिनों में चलने वाले निर्माणों की निगरानी के लिए नगर निगम की कोई प्रभावी व्यवस्था है?

‘हम देखेंगे’—क्या कार्रवाई का मतलब सिर्फ इतना ही?

शिकायतकर्ताओं के अनुसार जब अधिकारियों के सामने निर्माण का मुद्दा उठाया जाता है तो कई बार जवाब मिलता है—‘हम देखेंगे।’ लेकिन सवाल यह है कि कब देखेंगे?यदि अधिकारियों को निर्माण की जानकारी पहले से है, तो मौके पर जाकर स्वीकृत नक्शे और वास्तविक निर्माण का मिलान क्यों नहीं किया जा रहा? यदि निर्माण नियमों के विपरीत है तो तत्काल कार्रवाई क्यों नहीं?

पहले निर्माण, बाद में सील—फिर आगे क्या?

शहर में अवैध निर्माणों को लेकर पहले भी यह आरोप लगते रहे हैं कि कई मामलों में निर्माण काफी आगे बढ़ने के बाद कार्रवाई होती है। कहीं सीलिंग होती है तो कहीं चालान की कार्रवाई, लेकिन उसके बावजूद निर्माण जारी रहने के आरोप सामने आते रहे हैं।ऐसे मामलों में सबसे बड़ा सवाल नगर निगम की निगरानी व्यवस्था और जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया पर उठता है।

एटीपी ZONE D  की भूमिका पर भी सवाल

सूत्रों का आरोप है कि कुछ निर्माणों में संबंधित  एटीपी ZONE D की भूमिका को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।इसीलिए जरूरी है कि शिकायत मिलने के बाद निगम अधिकारी केवल मौखिक जवाब देने के बजाय मौके की वीडियोग्राफी, स्वीकृत नक्शे, भूमि के उपयोग और वास्तविक निर्माण का रिकॉर्ड के आधार पर मिलान करवाएं।

अब कमिश्नर से सीधा सवाल –इस पूरे मामले में अब नगर निगम कमिश्नर से सवाल है कि:

1 क्या ब्लॉक-32 के निर्माण की मौके पर जांच होगी?

2  क्या स्वीकृत रिहायशी नक्शे और मौके पर हो रहे निर्माण का मिलान होगा?

3  क्या कमर्शियल गतिविधि पाए जाने पर तत्काल कार्रवाई होगी?

4  क्या शनिवार-रविवार को निर्माण और लैंटर डालने की शिकायतों की जांच होगी?

5  और यदि अधिकारियों को पहले से जानकारी थी तो समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

‘सब कुछ पता होने के बावजूद…’

स्थानीय सूत्रों का कहना है कि बिल्डिंग ब्रांच को क्षेत्र में चल रहे कई निर्माणों की जानकारी रहती है, लेकिन कार्रवाई को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं होती। जीत समाचार को मिल रही जानकारी के अनुसार ऐसे मामलों के दस्तावेज और मौके की स्थिति को एक-एक कर सामने लाने की तैयारी की जा रही है।अब देखना होगा कि नगर निगम इस मामले में सिर्फ ‘देखेंगे’ कहकर मामला छोड़ता है या वास्तव में मौके पर जाकर जांच और कार्रवाई करता है।क्योंकि सवाल सिर्फ एक बिल्डिंग का नहीं—सवाल यह है कि नगर निगम की बिल्डिंग ब्रांच के नियम मौके पर लागू होते हैं या सिर्फ फाइलों में?

जीत समाचार इस मामले से जुड़े तथ्यों और उपलब्ध दस्तावेजों की पड़ताल जारी रखेगा।

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