ब्लॉक-37 में निर्माण का खेल! चारदीवारी का भरोसा देकर भी काम जारी रहने के आरोप
जोन-C की बिल्डिंग ब्रांच पर सवालों की बौछार, एटीपी के आदेशों का कितना हुआ पालन?
जीत समाचार की खबरों के बाद भी कार्रवाई का इंतजार—बिल्डिंग इंस्पेक्टर की भूमिका पर उठे सवाल
लुधियाना।09 अक्टूबर 2026 विक्की कुमार
लुधियाना नगर निगम के जोन-C स्थित ब्लॉक-37 में कथित निर्माण कार्य को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। शिकायत के बाद चारदीवारी करवाकर निर्माण बंद करने का भरोसा दिया गया था, लेकिन अब सामने आई तस्वीरों के आधार पर मौके पर काम जारी रहने के आरोप लगाए जा रहे हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि जब निर्माण रोकने की बात कही गई थी, तो फिर मौके पर काम कैसे चल रहा है?
चारदीवारी का भरोसा, फिर निर्माण कैसे जारी?
शिकायतकर्ता के अनुसार, इस मामले में पहले भी नगर निगम के अधिकारियों को जानकारी दी गई थी। आरोप है कि संबंधित बिल्डिंग इंस्पेक्टर कमलधीर की ओर से चारदीवारी करवाने की बात कही गई थी। इसके बाद तबादले का मामला भी सामने आया, लेकिन अब निर्माण कार्य को लेकर फिर सवाल खड़े हो रहे हैं।
यदि एटीपी की ओर से निर्माण रोकने के निर्देश दिए गए थे, तो उनकी पालना सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी किसकी थी? क्या अधिकारियों ने दोबारा मौके का निरीक्षण किया?
एनओसी है तो क्या निर्माण की भी मंजूरी है?
मामले में एक अहम सवाल एनओसी और भवन निर्माण की मंजूरी को लेकर भी है। यदि संबंधित प्लॉट की एनओसी जारी की गई है, तो क्या वह भवन निर्माण की अनुमति भी मानी जा सकती है?
नगर निगम को स्पष्ट करना चाहिए कि संबंधित प्लॉट का नक्शा स्वीकृत है या नहीं, निर्माण के लिए आवश्यक मंजूरियां ली गई हैं या नहीं और नियमानुसार फीस जमा करवाई गई है या नहीं।
यदि निर्माण वैध है, तो संबंधित दस्तावेजों के आधार पर स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए। वहीं, नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होने पर नियमानुसार कार्रवाई जरूरी है।
छोटे निर्माणों पर सख्ती, बड़े निर्माणों पर नरमी क्यों?
नगर निगम की कार्रवाई को लेकर आम लोगों के बीच यह सवाल भी उठता रहा है कि छोटे निर्माणों पर तुरंत कार्रवाई होती है, जबकि बड़े निर्माणों के मामलों में कार्रवाई की गति धीमी क्यों दिखाई देती है?
हालांकि, इस मामले में किसी अधिकारी या निर्माण मालिक की भूमिका को लेकर लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है। इसलिए जरूरी है कि नगर निगम रिकॉर्ड के आधार पर निष्पक्ष जांच करवाए और वास्तविक स्थिति जनता के सामने रखे।
जीत समाचार की खबरों के बाद अब कमिश्नर की कार्रवाई पर नजर
जीत समाचार की ओर से इस क्षेत्र में निर्माण को लेकर पहले भी सवाल उठाए जा चुके हैं। अब दोबारा सामने आई तस्वीरों के बाद नगर निगम की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
नगर निगम कमिश्नर और संबंधित उच्चाधिकारियों को यह स्पष्ट करना चाहिए कि निर्माण के संबंध में क्या आदेश जारी हुए, मौके पर कितनी बार निरीक्षण किया गया और संबंधित भवन के पास कौन-कौन सी वैध मंजूरियां मौजूद हैं।
जीत समाचार का सीधा सवाल—
अगर निर्माण वैध है तो नक्शा और मंजूरियां सामने लाएं; अगर नियमों का उल्लंघन है तो कार्रवाई में देरी क्यों?

