लुधियाना नगर निगम में 82 करोड़ की स्वीपिंग योजना पर महासंग्राम के आसार!
पार्षद ऊषा कल्याण के निधन से जनरल हाउस स्थगित, सोमवार को फिर सजेगा सियासी अखाड़ा; नकली नोटों का बोरा लेकर पहुंचे गौरव भट्टी, डिप्टी मेयर के खिलाफ भी लगे आरोप
1208 आउटसोर्स सफाईकर्मियों की भर्ती से लेकर मैकेनिकल स्वीपिंग की दरों तक घिरा निगम प्रशासन; ममता आशु और गुरकरण टीना ने उठाए सवाल, वार्डवार रिकॉर्ड सार्वजनिक करने की मांग
लुधियाना,10 अक्टूबर 2026 विक्की कुमार
लुधियाना नगर निगम की राजनीति में शनिवार को उस समय नया मोड़ आ गया, जब पार्षद ऊषा कल्याण के निधन के कारण एफएंडसीसी और जनरल हाउस की कार्यवाही स्थगित कर दी गई। मेयर इंदरजीत कौर की अगुवाई में सदस्यों ने दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत पार्षद को श्रद्धांजलि दी। इसके बाद बैठक स्थगित करने का फैसला लिया गया। अब अगली बैठक सोमवार, 12 अक्टूबर को दोपहर 3 बजे गुरु नानक देव भवन में प्रस्तावित है।
लेकिन बैठक स्थगित होने के बावजूद नगर निगम की सियासत ठंडी नहीं हुई। करीब 82 करोड़ रुपये के मैकेनिकल स्वीपिंग टेंडर, 1208 आउटसोर्स सफाईकर्मियों की तैनाती, ठेके की दरों और भर्ती प्रक्रिया को लेकर उठ रहे सवालों ने निगम प्रशासन की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। अब सबकी निगाहें सोमवार की बैठक पर टिकी हैं, जहां इन मुद्दों पर तीखी बहस होने की संभावना है।
नकली नोटों का बोरा लेकर पहुंचे पार्षद गौरव भट्टी, सदन से पहले ही मचा हंगामा!
शनिवार को जनरल हाउस की बैठक से पहले पार्षद गौरव भट्टी नकली नोटों का बोरा लेकर गुरु नानक देव भवन पहुंचे। भवन के अंदर प्रवेश करने से पहले पुलिस ने उन्हें रोककर बोरे की जांच की और नकली नोटों का बोरा खाली करवाया। जांच के बाद ही उन्हें अंदर जाने दिया गया।
अंदर पहुंचने के बाद गौरव भट्टी ने नकली नोटों का बोरा अपने सिर पर रख लिया। इस पर पार्षद धालीवाल ने ऐतराज जताया। इस घटनाक्रम ने बैठक शुरू होने से पहले ही राजनीतिक माहौल को गरमा दिया। नकली नोटों के इस प्रदर्शन के जरिए पार्षद ने किस मुद्दे पर विरोध दर्ज करवाना चाहा, इसे लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा रही।
डिप्टी मेयर के खिलाफ भाजपा नेता अमन सैनी का प्रदर्शन, भर्ती को लेकर गंभीर आरोप
गुरु नानक देव भवन के बाहर भाजपा नेता अमन सैनी ने डिप्टी मेयर का विरोध किया और उन पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए। अमन सैनी ने आरोप लगाया कि सफाई कर्मचारियों की भर्ती के लिए डेढ़ लाख रुपये तक लिए गए। उन्होंने यह भी दावा किया कि मौजूदा सरकार का कार्यकाल खत्म होने के बाद संबंधित लोगों को कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।
हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे गंभीर आरोपों पर निष्पक्ष जांच और संबंधित पक्ष का जवाब जरूरी है। अब सवाल यह है कि नगर निगम प्रशासन इन आरोपों पर क्या स्पष्टीकरण देता है और क्या सफाईकर्मियों की भर्ती से जुड़े रिकॉर्ड की जांच करवाई जाएगी?
क्या 82 करोड़ की स्वीपिंग योजना पास करवाने का था दबाव?
सूत्रों के हवाले से यह चर्चा भी सामने आई कि जनरल हाउस में रोड क्लीनिंग प्रोजेक्ट को मंजूरी दिलाने के लिए राजनीतिक स्तर पर दबाव बनाया जा रहा था। बताया जा रहा है कि कुछ पार्षदों ने दिवंगत पार्षद ऊषा कल्याण के सम्मान में बैठक न करने की बात कही।
पार्षद के निधन की सूचना सुबह ही फैल गई थी, लेकिन बैठक के लिए निर्धारित समय के आसपास गुरु नानक देव भवन पहुंचने के बाद कार्यवाही स्थगित करने का फैसला लिया गया। इस घटनाक्रम को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं कि बैठक स्थगित करने का निर्णय पहले क्यों नहीं लिया गया।
हालांकि, हाईकमान की ओर से दबाव बनाए जाने संबंधी दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में निगम प्रशासन और संबंधित राजनीतिक नेतृत्व का पक्ष सामने आना महत्वपूर्ण होगा।
दूसरे शहरों की दरों से तुलना, मैकेनिकल स्वीपिंग योजना पर ममता आशु के सवाल
पंजाब के पूर्व मंत्री भारत भूषण आशु की पत्नी ममता आशु ने सोशल मीडिया पर लाइव होकर प्रस्तावित मैकेनिकल स्वीपिंग योजना की लागत पर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि लुधियाना में सड़क सफाई के लिए प्रस्तावित 2500 रुपये प्रति किलोमीटर की दर दूसरे शहरों की तुलना में काफी अधिक है।
ममता आशु ने इंदौर में करीब 400 रुपये, मोहाली में 750 रुपये और चंडीगढ़ में 1400 रुपये प्रति किलोमीटर की दर का हवाला देते हुए पूछा कि लुधियाना नगर निगम इतनी अधिक लागत क्यों प्रस्तावित कर रहा है।
उनका कहना है कि टेंडर की शर्तों, अनुमानित खर्च और अन्य शहरों में लागू दरों की निष्पक्ष तुलना की जानी चाहिए, ताकि सरकारी धन का उचित इस्तेमाल सुनिश्चित हो सके। उन्होंने सीनियर डिप्टी मेयर राकेश पराशर से भी जवाब मांगा।
सवाल यह है कि जब दूसरे शहरों की दरों का हवाला देकर लागत पर सवाल उठ रहे हैं, तो निगम प्रशासन तुलनात्मक रिपोर्ट सार्वजनिक क्यों नहीं करता?
एक किलोमीटर की सफाई 2500 रुपये में या दोनों तरफ के लिए 5000 रुपये?
ममता आशु ने यह आशंका भी जताई कि यदि 2500 रुपये प्रति किलोमीटर की दर सड़क के केवल एक तरफ की सफाई के लिए है, तो दोनों तरफ सफाई का खर्च 5000 रुपये प्रति किलोमीटर तक पहुंच सकता है।
डिवाइडर वाली सड़कों, डबल रोड और अलग-अलग श्रेणी की सड़कों पर सफाई की लागत कैसे तय होगी, यह भी स्पष्ट होना चाहिए। हालांकि, वास्तविक खर्च का आकलन टेंडर की शर्तों, माप की इकाई और काम के दायरे की जांच के बाद ही किया जा सकता है।
नगर निगम को यह बताना चाहिए कि प्रस्तावित दर में मशीनरी, ईंधन, कर्मचारी, पानी, कचरे का उठाव और अन्य सेवाएं शामिल हैं या नहीं। पार्षदों को भी प्रस्ताव पर निर्णय लेने से पहले सभी वित्तीय पहलुओं की जांच करनी चाहिए।
गुरकरण टीना ने भी उठाए सवाल, कंपनी और टेंडर की जांच की मांग
आम आदमी पार्टी की वार्ड नंबर 53 की पार्षद एडवोकेट महक टीना के पति गुरकरण टीना ने भी मैकेनिकल स्वीपिंग टेंडर को लेकर आपत्ति जताई। उन्होंने दिल्ली की कंपनी को काम देने से जुड़े पहलुओं की जांच की जरूरत पर जोर दिया और पंजाबी कहावत ‘अक्खी देख के मखी नी निगली जांदी’ के जरिए अपना विरोध व्यक्त किया।
उनका कहना है कि किसी भी बड़े वित्तीय प्रस्ताव को बिना पूरी पड़ताल के स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए। कंपनी के चयन की प्रक्रिया, तकनीकी योग्यता, टेंडर की शर्तें और अनुमानित खर्च सार्वजनिक होने चाहिए, ताकि पारदर्शिता बनी रहे।
अब निगम प्रशासन के सामने चुनौती है कि वह प्रस्ताव से जुड़े सभी सवालों के तथ्यात्मक जवाब देकर पार्षदों का भरोसा कायम करे।
1208 सफाईकर्मी कहां तैनात हैं? वार्डवार रिकॉर्ड सार्वजनिक करने की मांग
नगर निगम में रखे गए 1208 आउटसोर्स सफाईकर्मियों की तैनाती को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। रूचि विशाल गुलाटी ने मांग की है कि कर्मचारियों की वार्डवार तैनाती का पूरा रिकॉर्ड सार्वजनिक किया जाए।
उन्होंने सवाल उठाया कि किस वार्ड में कितने कर्मचारी लगाए गए हैं और वास्तव में कितने कर्मचारी सफाई कार्य कर रहे हैं। यदि वार्डवार सूची, उपस्थिति रिकॉर्ड और काम का विवरण सार्वजनिक किया जाता है, तो सफाई व्यवस्था की वास्तविक स्थिति का आकलन करना आसान होगा।
आखिर 1208 कर्मचारियों पर होने वाले खर्च के बदले शहर को कितनी सफाई मिल रही है? यह ऐसा सवाल है, जिसका जवाब निगम प्रशासन को रिकॉर्ड के आधार पर देना चाहिए।
पानी की बर्बादी और सड़कों को नुकसान का खतरा भी चर्चा में
मैकेनिकल स्वीपिंग योजना को लेकर पानी की खपत और सड़कों की मजबूती पर भी सवाल उठाए गए हैं। ममता आशु ने भूजल संकट का हवाला देते हुए पूछा कि सड़क सफाई के दौरान पानी के इस्तेमाल का क्या आकलन किया गया है।
इसके अलावा, पानी के दबाव से सड़कों को संभावित नुकसान पहुंचने की आशंका पर भी स्पष्टीकरण मांगा गया है। निगम को बताना चाहिए कि मशीनों में पानी की खपत कितनी होगी, पानी की व्यवस्था कहां से की जाएगी और सड़कों की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए क्या तकनीकी मानक निर्धारित किए गए हैं।
सोमवार की बैठक पर सबकी नजरें
करीब 82 करोड़ रुपये की मैकेनिकल स्वीपिंग योजना और 1208 आउटसोर्स सफाईकर्मियों का मामला अब नगर निगम की राजनीति का बड़ा मुद्दा बन चुका है। एक तरफ टेंडर की लागत और शर्तों पर सवाल उठ रहे हैं, तो दूसरी तरफ कर्मचारियों की भर्ती, तैनाती और सफाई व्यवस्था की जवाबदेही को लेकर पार्षद स्पष्टीकरण मांग रहे हैं।
अब सोमवार, 12 अक्टूबर को प्रस्तावित बैठक में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि निगम प्रशासन इन सवालों का जवाब देता है या नहीं, टेंडर से संबंधित दस्तावेज सदन के सामने रखे जाते हैं या नहीं और पार्षदों की आपत्तियों पर क्या निर्णय लिया जाता है।

