जोन-C में सवालों के घेरे में आए इंस्पेक्टर की जोन-A में नई पारी!
नूर वाला रोड ब्लॉक-32 की बिल्डिंग ने फिर खोल दिए पुराने राज—शटरिंग उतरी थी, फिर दोबारा कैसे चढ़ गई?
जांच में भूमिका पर सवाल उठने की चर्चा, फिर भी बिल्डिंग ब्रांच में जिम्मेदारी! सरकारी राजस्व और नियमों की निगरानी पर बड़ा सवाल
लुधियाना | जीत समाचार | एक्सक्लूसिव जांच रिपोर्ट
नगर निगम लुधियाना की बिल्डिंग ब्रांच जोन-C में सामने आए निर्माण संबंधी विवादों की गूंज अभी थमी भी नहीं थी कि अब वही कहानी जोन-A तक पहुंचती दिखाई दे रही है। मामला एक ऐसे बिल्डिंग इंस्पेक्टर से जुड़ा बताया जा रहा है, जिसकी जोन-C में तैनाती के दौरान कुछ निर्माणों को लेकर शिकायतें और जांच सामने आने की चर्चा रही है।
सूत्रों के मुताबिक, जांच के बाद कर्मचारी का तबादला जोन-A में कर दिया गया। लेकिन सवाल यह है कि अगर उसकी पिछली ड्यूटी को लेकर जांच में गंभीर सवाल उठे थे, तो फिर बिल्डिंग इंस्पेक्टर की जिम्मेदारी दोबारा कैसे मिल गई?
ब्लॉक-32 में शटरिंग का खेल?
अब नूर वाला रोड, ब्लॉक-32 की एक बिल्डिंग इस पूरे मामले को फिर सुर्खियों में ले आई है।
सूत्रों के अनुसार, इस बिल्डिंग की शटरिंग पहले हटाई गई थी। अब वहां दोबारा शटरिंग किए जाने की जानकारी सामने आ रही है।
आखिर शटरिंग हटाने के बाद दोबारा लगाने की अनुमति किस आधार पर हुई?
क्या बिल्डिंग का नक्शा स्वीकृत है?
क्या निर्माण स्वीकृत नक्शे के मुताबिक हो रहा है?
क्या निगम की ओर से सभी जरूरी फीस जमा करवाई गई हैं?
क्या मौके की जांच के बाद निर्माण को आगे बढ़ने दिया गया?
इन सवालों के जवाब अब निगम के रिकॉर्ड से सामने आने चाहिए।
लैंटर पड़ा या पड़ने की तैयारी?
मामला यहीं खत्म नहीं होता। चर्चा यह भी है कि बिल्डिंग का लैंटर डाला जा चुका है या लैंटर डालने की तैयारी की जा रही है।
अगर ऐसा है तो सवाल सीधा है—
जब निर्माण पर पहले आपत्ति उठ चुकी थी तो दोबारा निर्माण आगे कैसे बढ़ा?
जीत समाचार इस मामले में मौके की वास्तविक स्थिति, उपलब्ध दस्तावेजों और निगम रिकॉर्ड का मिलान कर आगे की जानकारी पाठकों के सामने रखेगा।
जोन-C की जांच के बाद जोन-A में जिम्मेदारी क्यों?
सबसे बड़ा सवाल कर्मचारी की तैनाती को लेकर है।
यदि किसी कर्मचारी की पिछली तैनाती के दौरान उसके क्षेत्र में कई निर्माणों को लेकर शिकायतें हुईं और उच्च अधिकारियों ने उनकी जांच की, तो क्या उस जांच का अंतिम निष्कर्ष सार्वजनिक किया गया?
अगर कर्मचारी दोषमुक्त है तो निगम को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
और अगर जांच में उसकी जिम्मेदारी तय हुई है तो फिर उसे बिल्डिंग ब्रांच में संवेदनशील जिम्मेदारी पर रखने का आधार क्या है?
सरकारी खजाने का हिसाब कौन देगा?
बिल्डिंग निर्माण से जुड़े मामलों में नियमों के साथ-साथ नगर निगम के राजस्व का भी बड़ा सवाल है।
यदि किसी निर्माण में निर्धारित फीस, कंपाउंडिंग फीस या अन्य देय राशि निगम के खाते में जमा नहीं हुई, तो संभावित राजस्व नुकसान का हिसाब कौन देगा?
जीत समाचार का सवाल है—नियम सिर्फ आम आदमी के लिए हैं या बिल्डिंग ब्रांच के अधिकारियों-कर्मचारियों की जिम्मेदारी भी उतनी ही तय होगी?
अब कमिश्नर की परीक्षा!
मामले में अब निगाहें नगर निगम कमिश्नर और उच्च अधिकारियों पर हैं।
जरूरत है कि:
1 ब्लॉक-32 की बिल्डिंग की फाइल खोली जाए।
2 स्वीकृत नक्शा जांचा जाए।
3 मौके की मौजूदा स्थिति का मिलान किया जाए।
4 फीस और सरकारी राजस्व का हिसाब देखा जाए।
5 और जोन-C में संबंधित कर्मचारी की पिछली भूमिका से जुड़ी जांच का रिकॉर्ड भी सामने लाया जाए।
अगर जांच में अनियमितता साबित होती है तो जिम्मेदारी तय होनी चाहिए और अगर आरोप सही नहीं पाए जाते तो संबंधित कर्मचारी को भी अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर मिलना चाहिए।
जीत समाचार का सवाल
“जोन-C में उठे सवालों के बाद जोन-A में नई जिम्मेदारी—क्या यह सिर्फ तबादला है या जिम्मेदारी का नया अध्याय?”
ब्लॉक-32 की बिल्डिंग का पूरा सच अब दस्तावेजों और मौके की जांच से सामने आएगा।
जीत समाचार—सवाल वही, जो जवाब मांगते हैं।

