OT असिस्टेंट भर्ती में योग्यता से समझौता नहीं: हाईकोर्ट
अदालत बोली—भर्ती की योग्यता तय करना नियोक्ता का अधिकार, स्पष्ट नियमों को न्यायिक समीक्षा के जरिए बदला नहीं जा सकता
शिमला 22 / 09 / 2026 (दिनेश कुमार शर्मा)
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने ऑपरेशन थिएटर असिस्टेंट (OTA) भर्ती मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि किसी पद के लिए आवश्यक शैक्षणिक योग्यता तय करना नियोक्ता का विशेषाधिकार है। यदि भर्ती नियम और विज्ञापन में योग्यता की शर्तें स्पष्ट हैं, तो अदालत न्यायिक समीक्षा के माध्यम से उनमें बदलाव या छूट नहीं दे सकती।
न्यायमूर्ति रंजन शर्मा ने नरिंदर कुमार व अन्य की ओर से दायर याचिका को खारिज करते हुए यह फैसला सुनाया।
113 पदों के लिए निकला था विज्ञापन
मामले के अनुसार कर्मचारी चयन आयोग ने 16 सितंबर 2017 को ऑपरेशन थिएटर असिस्टेंट (पोस्ट कोड-642) के 113 पदों पर भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया था।भर्ती नियमों के अनुसार उम्मीदवार के लिए 50 प्रतिशत अंकों के साथ 10+2 साइंस, जिसमें भौतिकी, रसायन विज्ञान और जीव विज्ञान विषय शामिल हों, उत्तीर्ण होना आवश्यक था। इसके साथ ही मान्यता प्राप्त संस्थान से ओटीए ट्रेनिंग कोर्स या समकक्ष डिग्री भी जरूरी थी।
याचिकाकर्ताओं ने भर्ती के लिए आवेदन किया और मूल्यांकन प्रक्रिया में भी शामिल हुए, लेकिन बाद में उन्हें अयोग्य घोषित कर दिया गया। कारण यह था कि उनके पास निर्धारित 10+2 साइंस विषयों में आवश्यक योग्यता नहीं थी।
एक ने कॉमर्स, दूसरे ने बिना बायोलॉजी की साइंस की थी
याचिकाकर्ताओं की ओर से भर्ती की शर्त को चुनौती दी गई थी। नमिता देवी ने 10+2 कॉमर्स विषय से की थी, जबकि करण शेखर ने साइंस से 10+2 किया था, लेकिन उनके विषयों में बायोलॉजी शामिल नहीं थी याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि जब उन्हें सरकार से मान्यता प्राप्त संस्थान से ओटीए डिप्लोमा करने की अनुमति दी गई, तो केवल 10+2 के विषयों के आधार पर उन्हें भर्ती से बाहर नहीं किया जाना चाहिए।
‘OTA के लिए जीव विज्ञान का बुनियादी ज्ञान जरूरी’
हाईकोर्ट ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने कहा कि ऑपरेशन थिएटर असिस्टेंट के पद पर कार्य करने वाले कर्मचारियों के लिए मानव शरीर और जैविक परिस्थितियों का बुनियादी ज्ञान आवश्यक है।अदालत ने स्पष्ट किया कि भर्ती नियमों में निर्धारित योग्यता को नजरअंदाज करके किसी ऐसे उम्मीदवार को नियुक्त करना, जो निर्धारित मानकों को पूरा नहीं करता, समानता के संवैधानिक सिद्धांतों के अनुरूप नहीं होगा।
भर्ती आयोग का फैसला बरकरार
हाईकोर्ट ने भर्ती विज्ञापन में निर्धारित योग्यता की शर्तों को वैध माना और उम्मीदवारों को अयोग्य घोषित करने के कर्मचारी चयन आयोग के फैसले को बरकरार रखा।
अदालत ने कहा कि भर्ती की शर्तों में कोई अवैधता या मनमानी नहीं पाई गई। इसके साथ ही रिट याचिका खारिज कर दी गई।
हालांकि, कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को यह स्वतंत्रता दी कि यदि नियमों में किसी प्रकार की छूट का प्रावधान है, तो वे इसके लिए संबंधित सक्षम प्राधिकारी के समक्ष आवेदन कर सकते हैं।
फैसले का संदेश
भर्ती विज्ञापन में योग्यता स्पष्ट है तो नियुक्ति प्रक्रिया उसी के आधार पर होगी—बाद में योग्यता की शर्त बदलने की मांग को अदालत के जरिए लागू नहीं कराया जा सकता।

